Income Tax on Capital Gain: इनकम टैक्स कैलकुलेट करना शुरू से मुश्किल काम रहा है क्योंकि आपको इसमें अपनी सैलरी, किराये से इनकम, एफडी से मिले ब्याज पर इनकम और कैपिटल गेन को भी जोड़ना होता है। उसके बाद आपकी कुल आय पर इनकम टैक्स कैलकुलेट किया जाता है। ये सभी आपको अपने ITR में बताना होता है। अपनी आईटीआईर में कैपिटल गेन को सही तरीके से बताना जरूरी होता है, नहीं तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपको नोटिस भेज सकता है।
पहले समझना होगा कि कैपिटल गेन में क्या क्या आता है
कैपिटल गेन को सही केटेगरी में बांटना जरूरी है। इसके लिए ट्रेडिंग गेन और निवेश से होने वाले फायदे को जानना और समझना जरूरी है। इसमें शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन को समझना होगा। कई बार लोग लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन को मिला देतै हैं जिसके कारण कई बार लोगों को इनकम टैक्स का नोटिस आ जाता है।
लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स में यहां मिलती है छूट
अगर आपको एक फाइनेंशियल ईयर में एक लाख रुपये तक का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन होता है तो वह छूट के दायरे में आता है। यानी, आपको तब टैक्स नहीं देना होगा। अगर आपको 1 लाख रुपये से अधिक का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन होता है, तो तब आपको टैक्स देना होगा।
प्रॉपर्टी की सेल पर लगता है कैपिटल गेन टैक्स
कई बार जब लोग प्रॉपर्टी आदि की सेल करते हैं लेकिन कई बार उनकी सही कीमत का पता नहीं होता। इस कारण भी कई बार टैक्सपेयर्स के पास नोटिस आता है। कई बार ऐसे भी ट्रांजेक्शन होते हैं जिसमें आईटीआर में भी बताना जरूरी होता है। अगर आप नहीं बताते तो आपको नोटिस आ सकता है।