देश के 69 पर्सेंट परिवार बैंकिंग इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं, जबकि सिर्फ 4 पर्सेंट परिवार अपनी बचत का पैसा पोस्ट ऑफिस में रखते हैं। एक सर्वे में यह बात सामने आई है। यह सर्वे पीपुल रिसर्च ऑन इंडियाज कंज्यूमर इकनॉमी (PRICE) नामक थिंक टैंक ने किया है। इस सर्वे में 25 राज्यों के 40,000 परिवारों को शामिल किया गया। सर्वे में शहरी और ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों के लोग शामिल थे।
सर्वे के मुताबिक, 14 पर्सेंट घरों के लिए बीमा पॉलिसी बचत का बड़ा जरिया हैं। गरीब परिवारों में भी बैंकों में ही निवेश का प्रचलन ज्यादा है। गोल्ड और इससे जुड़े प्रॉडक्ट निवेश के लिए लोगों की तीसरी पसंद हैं। यह बात सभी इनकम ग्रुप के लोगों पर लागू होती है। सर्वे के मुताबिक, तकरीबन सभी परिवारों में बचत खाता है और 82 पर्सेंट परिवारों में मौजूद बैंक खाते आधार से जुड़े हुए हैं। कम इनकम ग्रुप वाले परिवारों के मामले में यह आंकड़ा 61 पर्सेंट है।
क्यों बचत करते हैं भारत के लोग?
30 लाख सालाना से ज्यादा कमाने वालों को अमीर की कैटगरी में रखा गया है, जबकि सुपररिच ऐसे लोगों को माना गया जिनकी सालाना इनकम 2 करोड़ से ज्यादा है। 1.25 लाख सालाना से कम कमाने वाले को गरीब की कैटगरी में रखा गया है।
मध्य वर्ग और अमीर परिवारों के पोर्टफोलियो में है डायवर्सिटी
सर्वे के मुताबिक, गरीब और कम इनकम ग्रुप वाले परिवार ज्यादातर पैसा बैंक खातों में रखते हैं और कुछ पैसा गोल्ड और ज्वैलरी में भी लगाते हैं। मध्य वर्ग और अमीर कैटगरी के लोगों के पोर्टफोलियो में बैंक डिपॉजिट, इंश्योरेंस पॉलिसी, गोल्ड आदि के विकल्प होते हैं।
तीन-चौथाई भारतीय परिवारों के पास कोई कर्ज नहीं
सर्वे में शामिल तीन-चौथाई परिवारों ने बताया कि उनके पास कोई कर्ज नहीं है। सबसे ज्यादा कर्जमुक्त परिवार ज्यादा इनकम वाली कैटगरी मे हैं, जबकि कम इनकम ग्रुप में कर्जमुक्त परिवारों की संख्या सबसे कम है।
प्रॉपर्टी खरीदने के लिए संस्थानों से लोन लेते हैं हाई इनकम ग्रुप वाले लोग
सर्वे के मुताबिक, तकरीबन 38 पर्सेंट लोग कृषि और पशुओं की खरीद के लिए संस्थाओं से लोन लेते हैं। अमीर लोगों द्वारा संस्थानों से लिया जाने वाला तकरीबन 40 पर्सेंट लोन प्रॉपर्टी की खरीद के लिए लिया जाता है, जबकि मध्य वर्ग में सिर्फ 11 पर्सेंट परिवार प्रॉपर्टी के लिए बैंकों या अन्य ऐसे संस्थानों से लोन लेते हैं।
इलाज के लिए निजी लोगों से कर्ज लेते हैं गरीब
तकरीबन 10 पर्सेंट भारतीय परिवार जमीन खरीदने के लिए निजी लोगों से कर्ज लेते हैं और इस तरह के 25 पर्सेंट कर्ज मेडिकल इमरजेंसी और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों की वजह से लिए जाते हैं। सर्वे के मुताबिक, सामाजिक जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए लिए जाने वाले कर्ज का आंकड़ा 21 पर्सेंट है। कम इनकम ग्रुप वाले परिवार ऐसे 30 पर्सेंट लोन का इस्तेमाल मेडिकल जरूरतों के लिए करते हैं।