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चावल के बाद, दाल और गेहूं की बढ़ती कीमतों पर लगाम कसने के लिए जरूरी कदम उठा सकती है सरकार

कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए कुछ उपाय पहले से ही मौजूद हैं। सरकार ने पिछले साल मई से गेहूं निर्यात पर लगे प्रतिबंध को अभी तक नहीं हटाया है, और दालों के लिए तुअर और उड़द पर 10 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी को वित्त वर्ष 2023-24 के आखिर तक जीरो रखा है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के एक नोटिफिकेशन के अनुसार, घरेलू कीमतों में बढ़ोतरी को रोकने के लिए सरकार ने 20 जुलाई को गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर रोक लगी दी

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 21, 2023 पर 1:18 PM
चावल के बाद, दाल और गेहूं की बढ़ती कीमतों पर लगाम कसने के लिए जरूरी कदम उठा सकती है सरकार
दाल और गेहूं की बढ़ती कीमतों पर लगाम कसने के लिए जरूरी कदम उठा सकती है सरकार

चावल (Rice) के निर्यात (Export) पर रोक लगाने के बाद सरकार अब दालों (Pulses) और गेहूं (Wheat) की बढ़ती कीमतों को रोकने के उपायों पर विचार कर सकती है। इस मामले से जुड़े एक आधिकारी ने ये जानकारी दी है। उन्होंने कहा, "कीमतें मजबूत हो गई हैं, इसलिए नीतिगत उपायों पर गौर करना बहुत जरूरी है। मेज पर मौजूद विकल्पों में इंपोर्ट और कस्टम ड्यूटी में बदलाव, इन वस्तुओं की कुछ किस्मों के लिए निर्यात-संबंधी कदम, साथ ही डिमांड-सप्लाई परिदृश्य को सुचारू बनाने के लिए दूसरे कदम उठाए जाएं।"

कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए कुछ उपाय पहले से ही मौजूद हैं। सरकार ने पिछले साल मई से गेहूं निर्यात पर लगे प्रतिबंध को अभी तक नहीं हटाया है, और दालों के लिए तुअर और उड़द पर 10 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी को वित्त वर्ष 2023-24 के आखिर तक जीरो रखा है।

विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के एक नोटिफिकेशन के अनुसार, घरेलू कीमतों में बढ़ोतरी को रोकने के लिए सरकार ने 20 जुलाई को गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर रोक लगी दी। चावल में साल-दर-साल 12.97 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है।

हालांकि, अधिकारी ने कहा कि हस्तक्षेप की जरूरत है या नहीं और गेहूं और दालों की कीमतों में बढ़ोतरी से निपटने के लिए किस तरह के नीतिगत कदम उठाने की जरूरत है, इस पर अंतिम फैसला मंत्रालय की एक इंटरनल कमेटी के विचार-विमर्श पर निर्भर करेगा।

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