Nestle Cerelac: क्या आप भी अपने 6 महीने के छोटे से बच्चे को नेस्ले का सेरेलैक खिला रहे हैं? हर एक मां को लगता है कि वह बच्चे को सेरेलैक के खिलाकर प्रोटीन, विटामिन और मिनरल से भरा खाना खिला रहे हैं, लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। क्या आपको पता है कि सेरेलैक में कितना शुगर लेवल होता है? वह आपके नन्हे बच्चे के लिए कितना सेफ है? दुनिया की सबसे बड़ी कंज्यूमर प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी Nestle बेबी फूड बनाती है। उसका सेरेलैक भारत में काफी फेमस है। Nestle भारत, अन्य एशियाई, अफ्रीकी देशों में बेचे जाने वाले शिशु दूध (Infant Milk) और सेरेलैक में चीनी मिलाती है। हालांकि, कंपनी का दावा कि उसने पिछले पांच सालों में अपने इन प्रोडक्ट में शुगर को कम किया है।
नेस्ले के बेबी फूड में मिली ज्यादा चीनी
स्विस जांच संगठन पब्लिक आई की एक चौंका देने वाली रिपोर्ट सामने आई है। जिसमें पता चलता है कि नेस्ले ने निडो (Baby Powder Milk) जो एक साल या उससे अधिक के बच्चों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सेरेलैक के नमूनों में सुक्रोज या शहद के रूप में चीनी मिली। ये प्रोडक्ट छह महीने से दो साल की उम्र के बच्चों के लिए अनाज के रूप में दिए जाते हैं।
चीनी की मिली ज्यादा मात्रा
यह खुलासा तब हुआ जब संगठन ने एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में बेचे जाने वाले स्विस बहुराष्ट्रीय कंपनी के बेबी फूड प्रोडक्ट के सैंपल को टेस्ट किया। ये सैंपल बेल्जियम की लैब में भेजे। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में जहां 2022 में बिक्री 250 मिलियन डॉलर से अधिक हो गई, सभी सेरेलैक बेबी अनाज में औसतन प्रति सर्विंग लगभग 3 ग्राम अतिरिक्त चीनी होती है।
हर सर्विंग पर इतनी खिलाते हैं चीनी
अफ्रीका में बेबी फूड मार्केट सबसे बड़ा दक्षिण अफ्रीका में है, जहां सभी सेरेलैक बेबी प्रोडक्ट में प्रति सर्विंग 4 ग्राम से ज्यादा चीनी मिलती है। ब्राजील दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। यहां 2022 में लगभग 150 मिलियन डॉलर की बिक्री के साथ, तीन-चौथाई सेरेलैक बेबी फूड में प्रति सर्विंग औसतन 3 ग्राम अतिरिक्त चीनी होती है। नाइजीरिया में एक प्रोडक्ट की मात्रा 6.8 ग्राम तक थी।
नेस्ले इंडिया ने दावा किया है कि उसने पिछले पांच सालों में भारत में बेबी फूड प्रोडक्ट पर चीनी में 30 प्रतिशत से अधिक की कमी की है। कंपनी पर आरोप लग रहे थे कि वह कम विकसित देशों में अधिक चीनी वाले प्रोडक्ट बेच रही है। नेस्ले ने यूरोप के अपने बाजारों की तुलना में भारत सहित कम विकसित दक्षिण एशियाई देशों, अफ्रीकी तथा लैटिन अमेरिकी देशों में अधिक चीनी वाले बेबी प्रोडक्ट बेचे हैं। इस पर कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि चीनी में कमी करना नेस्ले इंडिया की प्राथमिकता है। पिछले पांच सालों में हमने प्रोडक्ट के आधार पर चीनी में 30 प्रतिशत तक की कमी की