Personal Loan: बैंकों के पास पैसा बढ़ा, क्या अब आसानी से मिलेगा पर्सनल लोन? जानिए ब्याज दर पर क्या असर होगा
Personal Loan: बैंकों में बढ़ी नकदी से आने वाले महीनों में पर्सनल लोन की उपलब्धता बढ़ सकती है। UBS के मुताबिक, बैंक इस अतिरिक्त पैसे को लोन में लगा सकते हैं। लेकिन क्या लोन सस्ता होगा? समझिए पूरी तस्वीर।
बैंकों के पास अतिरिक्त पैसा होने से लोन बांटने की क्षमता जरूर बढ़ सकती है।
Personal Loan: अगर आप आने वाले त्योहारी महीनों में पर्सनल लोन लेने का मन बना रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर हो सकती है। ब्रोकरेज फर्म UBS के मुताबिक, भारत में पर्सनल लोन की ग्रोथ फिर तेज हो सकती है। बैंकों के पास पर्याप्त लिक्विडिटी यानी नकदी है और वे आने वाले महीनों में इस पैसे को लोन के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं।
पर्सनल लोन की ग्रोथ बढ़ने के संकेत
UBS के मुताबिक, भारत में अनसिक्योर्ड क्रेडिट का एक मजबूत दौर शुरू हो सकता है। इसमें पर्सनल लोन बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। सितंबर की CIRF रिपोर्ट के मुताबिक, पर्सनल लोन का कुल बकाया पोर्टफोलियो करीब ₹17 लाख करोड़ है। इसमें सालाना आधार पर 13.8% की बढ़ोतरी हुई है।
देश के पांच बड़े बैंकों में पर्सनल लोन पोर्टफोलियो की ग्रोथ वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में औसतन 10% रही। SBI की ग्रोथ 15%, ICICI Bank की 12.9%, Axis Bank की 6% और Kotak Mahindra Bank की 5% रही।
क्या अब पर्सनल लोन मिलना आसान होगा?
बैंकों के पास अतिरिक्त पैसा होने से लोन बांटने की क्षमता जरूर बढ़ सकती है। UBS का मानना है कि आने वाले महीनों में बैंक इस अतिरिक्त रकम को खास तौर पर पर्सनल लोन जैसे सेगमेंट में लगा सकते हैं।
इसका फायदा उन ग्राहकों को मिल सकता है जिनकी प्रोफाइल मजबूत है। यानी अच्छा क्रेडिट स्कोर, स्थिर आय और पहले से कम कर्ज वाले लोगों के लिए लोन अप्रूवल का माहौल बेहतर हो सकता है।
क्या पर्सनल लोन सस्ता भी होगा?
यहां तस्वीर थोड़ी अलग है। UBS की रिपोर्ट बैंकों में बढ़ी नकदी और पर्सनल लोन की संभावित ग्रोथ की बात करती है। ज्यादा पैसा उपलब्ध होने से बैंक ज्यादा लोन देने के लिए तैयार हो सकते हैं। मगर इसका सीधा मतलब ब्याज दर में कटौती नहीं है।
अगर बैंक ग्राहकों को लुभाने के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ाते हैं, तो कुछ ग्राहकों को बेहतर ब्याज दर या ऑफर मिल सकते हैं। लेकिन यह बैंक और ग्राहक की प्रोफाइल पर निर्भर करेगा।
FCNR-B से बैंकों के पास आया ज्यादा पैसा
पर्सनल लोन की संभावित ग्रोथ के पीछे एक बड़ी वजह FCNR-B डिपॉजिट स्कीम से आई लिक्विडिटी है। 31 अगस्त को स्कीम बंद होने तक इस रास्ते से करीब $133 अरब का इनफ्लो आया। FCNR-B (Foreign Currency Non-Resident Bank Deposit) NRI लोगों के लिए बैंक में विदेशी मुद्रा में पैसा जमा करने की सुविधा है। इसमें जमा रकम और ब्याज उसी विदेशी मुद्रा में होता है, इसलिए रुपये की कीमत में बदलाव का असर सीधे नहीं पड़ता।
UBS के मुताबिक, इससे बैंकिंग सिस्टम में करीब ₹12-13 लाख करोड़ की अतिरिक्त लिक्विडिटी बन सकती है। बैंक इस पैसे का इस्तेमाल आने वाले महीनों में लोन देने के लिए कर सकते हैं। हालांकि, बैंकिंग अधिकारियों के मुताबिक अतिरिक्त पैसे को लोन में बदलने में 3-4 महीने लग सकते हैं।
आपके लिए क्या मतलब?
अगर आपका क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत है, तो आने वाले महीनों में पर्सनल लोन के विकल्प बढ़ सकते हैं। बैंक ज्यादा आक्रामक तरीके से लोन ऑफर कर सकते हैं और कुछ ग्राहकों को बेहतर ब्याज दर भी मिल सकती है।
लेकिन ‘लोन आसानी से मिलेगा’ और ‘लोन सस्ता होगा’ दोनों एक ही बात नहीं हैं। फिलहाल संकेत पर्सनल लोन की उपलब्धता और ग्रोथ बढ़ने के हैं। ब्याज दर में कमी इस बात पर निर्भर करेगी कि RBI की पॉलिसी, बैंकों की फंडिंग कॉस्ट और ग्राहकों के क्रेडिट रिस्क में क्या बदलाव आता है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।