Explainer| Dhani फर्जी लोन प्रकरण से कैसे उजागर हुईं डिजिटल लेंडिंग की खामियां

डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स या फिनटेक प्लेटफॉर्म्स को हमेशा ही फ्रॉड्स से पैदा चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, Dhani इस कड़ी में एक नया मामला है

अपडेटेड Feb 18, 2022 पर 8:46 AM
डिजिटल फ्रॉड के मामलों ने पॉलिसीमेकर्स की चिंताएं बढ़ा दी हैं

Dhani fake loan episode : कुछ समय पहले ऐप बेस्ड डिजिटल लेंडर्स (digital lenders) के उत्पीड़न के चलते आत्महत्या के मामले सुर्खियों में आने से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को कदम उठाने पड़े और उसने नए नियम बनाए थे। लेकिन, अब डिजिटल लेंडर्स से जुड़े धोखाधड़ी मामले पॉलिसीमेकर्स के लिए चिंता का सबब बन गए हैं। ज्यादातर मामलों में पीड़ित सामान्य कंज्यूमर थे, ऐप बेस्ड लेंडर्स के शिकार बने थे।

खबरों से पता चलता है कि ये फ्रॉड मुख्य रूप से अहम पर्सनल अकाउंट से जुड़ी जानकारी के लीकेज से जुड़े थे। इंडियाबुल्स के स्वामित्व वाली धानी लोन्स एंड सर्विसेज ऐप (Dhani Loans and Services app) से जुड़े इस ताजा मामले ने समस्या को और बढ़ा दिया है और डिजिटल लेंडिंग की दुनिया की खामियों को उजागर कर दिया है।

जानिए, क्या है मामला?


बीते कुछ दिनों में कई यूजर्स ने प्लेटफॉर्म पर अनजान लोगों द्वारा लोन लेने के लिए अपने पैन कार्ड (PAN card) की डिटेल्स के दुरुपयोग की शिकायतें की हैं, कुछ ने कलेक्शन एजेंट्स द्वारा उन लोन के लिए शोकॉज नोटिस भेजने की शिकायत की है जो उन्होंने कभी लिए ही नहीं। यूजर्स द्वारा क्रेडिट स्कोर पर असर पड़ने की भी शिकायत की गई है।

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कितना चिंताजनक है मुद्दा

इससे डाटा चोरी और फाइनेंशियल फ्रॉड के संकेत मिलते हैं। निश्चित रूप से, यहां फर्जी लोन लिए जाने का मामला है जो बेहद गंभीर आरोप है। लोन नहीं चुकाने पर, कलेक्शन एजेंट पैन कार्ड के वास्तविक ओनर्स को परेशान करने लगते हैं। प्रभावित लोगों में एक्ट्रेस सनी लियोनी (Sunny leone) भी शामिल हैं, जिन्होंने फर्जी लोन लेने के लिए आइडेंटिटी चोरी होने का आरोप लगाया है।

धानी (Dhani) की यह है प्रतिक्रिया

Dhani के स्पोक्सपर्सन ने कहा, “अनजान लोगों ने ऐप पर फिनटेक ऑपरेशन के जरिये कर्ज लेने के लिए किसी अन्य के पैन कार्ड और पहचान के इस्तेमाल के कुछ मामले हमारी जानकारी में आए हैं।”

स्पोक्सपर्सन ने बताया, “हमने इन मामलों में जरूरी कदम उठाए हैं और सभी शिकायतकर्ताओं से बात कर रहे हैं। हम क्रेडिट ब्यूरो में उनके रिकॉर्ड को भी ठीक कर रहे हैं।”

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धानी ने एक बयान में कहा, “आइडेंटिटी चोरी के मामले बढ़ रहे हैं। हमारी रिस्क मैनेजमेंट और टेक टीम काम कर रही है। ज्यादा मजबूत सिस्टम विकसित कर रही हैं, जिससे ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।”

लेकिन, सवाल उठता है कि धानी के ग्लोबल सिक्योरिटी प्लेटफॉर्म जी-डिफेंस से जुड़े होने के बाद डाटा लीकेज कैसे हुई।

वास्तव में यह अकेला मामला नहीं है। आरबीआई (RBI) ने हाल में माना था कि उसने सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी लॉन्च करने की तैयारी के दौरान डिजिटल फ्रॉड की दो बड़ी चुनौतियों में से एक के रूप में पहचान की है, दूसरी है साइबर फ्रॉड। इसका उल्लेख 8 दिसंबर को आरबीआई के डिप्टी गवर्नर टी रबिशंकर ने किया था।

RBI के लिए नई चुनौतियां

नए दौर के बैंकिंग चैनल्स के लिए डिजिटल फ्रॉड्स से कई चुनौतियां सामने आई हैं। कंपनियों को बिजनेस के साथ इन चुनौतियों को दूर करना होगा और डाटा चोरी, दुरुपयोग को रोकने के अपने टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म में सुधार करना होगा।

आरबीआई ने इसी साल जनवरी में इस सेक्टर पर फोकस करने के लिए एक फिनटेक डिपार्टमेंट बनाया है। हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि क्या RBI के पास डिजिटल लेंडिंग क्षेत्र में तेजी से बढ़ती चुनौतियों को दूर करने के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर और मैनपावर है।

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