Juice Jacking Scam: स्मार्टफोन को चार्जिंग में लगाते ही बैंक अकाउंट हो जाएगा साफ, RBI ने जारी किया अलर्ट

Juice Jacking Scam: इन दिनों साइबर क्राइम का खतरा काफी बढ़ गया है। कई लोग जूस जैकिंग' स्कैम का शिकार बन रहे हैं। इस स्कैम को लेकर RBI ने भी अलर्ट जारी किया है। स्कैमर्स Juice Jacking स्कैम के साथ यूजर्स की बैंकिंग जानकारियां चुराने का काम कर रहे हैं। यह काम पब्लिक चार्जिंग स्टेशन पर किया जा रहा है

अपडेटेड Jul 26, 2023 पर 12:57 PM
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Juice Jacking Scam: साइबर अपराधी पब्लिक चार्जिंग स्टेशन पर मैलवेयर इंस्टॉल कर रहे हैं। जिसमें स्मार्टफोन को चार्जिंग में लगाने पर अकाउंट से पैसे निकाल लिए जाते हैं

Juice Jacking Scam: अगर आप भी घर से बाहर निकलते ही पब्लिक प्लेस पर अपना मोबाइल चार्जिंग में लगाते हैं तो सावधान हो जाइये। कभी भी आपको आर्थिक चपत लग सकती है। इस मामले में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने भी लोगों को चेतावनी जारी कर दी है। दरअसल, इन दिनों कुछ स्कैमर्स 'जूस जैकिंग' स्कैम के जरिए लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। इस स्कैम को लेकर RBI ने भी अलर्ट जारी किया है। फाइनेंस फील्ड में फाइनेंस से जुड़े फ्रॉड पर RBI की एक नोटबुक के मुताबिक, जूस जैकिंग का इस्तेमाल कर लोगों को ठगा जा रहा है।

RBI के मुताबिक, जूस जैकिंग स्कैम एक तरह का घोटाला है। इसके जरिए साइबर क्रिमिनल्स मोबाइल से महत्वपूर्ण डेटा चुरा लेते हैं। जिससे लोगों का वित्तीय नुकसान हो सकता है।

जानिए क्या है Juice Jacking Scam


जूस जैकिंग स्कैम एक ऐसा तरीका है, जिसमें साइबर क्रिमिनल्स मोबाइल और लैपटॉप जैसे डिवाइस में से महत्वपूर्ण डेटा चुराने के उपाय अपनाते हैं। इस तरह के स्कैम को अंजाम देने के लिए साइबर अपराधी पब्लिक चार्जिंग स्टेशन पर मैलवेयर वाले सॉफ्टवेयर या हार्डवेयर को इंस्टॉल करते हैं। ये साइबर क्रिमिनल्स सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन, जैसे USB पोर्ट या चार्जिंग कियोस्क के जरिए लोगों को अपना शिकार बनाते हैं। आपको ध्यान रखना चाहिए कि मोबाइल के चार्जिंग पोर्ट का उपयोग फाइल/डेटा ट्रांसफर के लिए भी किया जा सकता है। साइबर बदमाश सार्वजनिक चार्जिंग पोर्ट का उपयोग वहां से जुड़े फोन में मैलवेयर ट्रांसफर करने के लिए करते हैं। किसी व्यक्ति के मोबाइल से ईमेल, SMS और पासवर्ड का कंट्रोल हासिल कर लेते हैं। इसके बाद डेटा चोरी हो जाता है।

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कैसे काम करता है Juice Jacking scam?

पहले बिछाया जाता है जाल

स्कैमर्स सबसे पहले पब्लिक चार्जिंग स्टेशन पर मालवेयर वाला सॉफ्टवेयर या हार्डवेयर सेट करते हैं। इसके लिए आमतौर पर वो एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन या भीड़भाड़ वाले इलाकों का चयन करते हैं। इसके बाद स्कैमर्स चार्जिंग स्टेशन को "फ्री चार्जिंग" स्टेशन के रूप में लेबल कर सकता है। फ्री का लेबल देखकर ज्यादा से ज्यादा यूजर्स को लुभाया जा सकता है।

फिर स्कैमर्स अपनी साजिश को अंजाम देते हैं। जैसे ही यूजर यूएसबी केबल के जरिए चार्जिंग स्टेशन से डिवाइस को चार्ज करने के लिए जोड़ता है, इंस्टॉल किया गया मालवेयर यूजर का डेटा चुरा लेता है। स्कैमर कनेक्टेड डिवाइस से प्राइवेट डेटा जैसे पासवर्ड, फोटो और बैंकिग जानकारियों को चुरा लेता है।

Juice Jacking Scam से कैसे करें बचाव

यूजर को पब्लिक प्लेस पर फोन चार्ज करने से बचना चाहिए। घर से बाहर निकलने पर किसी भी भीड़भाड़ वाली जगह पर मौजूद फ्री चार्जिंग स्टेशन विजिट करने से बचना होगा। डिवाइस में बैटरी जल्दी खत्म हो जाती है तो इसके लिए खुद का पावरबैंक रख सकते हैं। इतना ही नहीं पब्लिक वाईफाई के इस्तेमाल से भी बचना चाहिए। अपने डिवाइस को अप टू डेट रखें। कोशिश करें कि फोन लेटेस्ट ऑपरेटिंग सिस्टम पर ही काम कर रहा हो। इसके साथ ही फोन में मालवेयर डिटेक्ट करने वाला ऐप इंस्टॉल करें।

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