अब गैर सरकारी संस्थाएं भी आधार वेरिफिकेशन डेटा का इस्तेमाल कर पाएंगी। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सरकारी मंत्रालयों और विभागों के अलावा अन्य संस्थाओं द्वारा आधार वेरिफिकेशन के डाटा को इस्तेमाल करने के लिए नियमों में बदलाव का प्रस्ताव दिया है। यह कदम आधार को लोगों के अनुकूल बनाने और नागरिकों के लिए आधार से जुड़ी सर्विस को आसनी से पहुंचाने के लिए उठाया गया है।
साल 2019 में किया गया था संशोधन
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इस बारे में एक बयान जारी करते हुए कहा कि साल 2019 में आधार अधिनियम 2016 में अधिनियमित किए गए एक संशोधन के जरिए संस्थाओं को वेरिफिकेशन करने की मंजूरी दी गई थी। इसकी वजह यह थी कि अगर भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) नियमों के आधार पर तय की गई गोपनीयता और सुरक्षा के मानकों में उनके द्वारा पालन किए जा रहे रेगुलेशन से संतुष्ट होता है या फिर कानून की तरफ से वेरिफिकेशन सर्विस की पेशकश किए जाने की मंजूरी है या फिर किसी खास उद्देश्य के लिए वेरिफिकेशन किया जाना है।
बता दें कि आधार वेरिफिकेशन एक खास तरह की प्रक्रिया है जिसके जरिए किसी व्यक्ति कि डेमोग्राफी डिटेल्स जैसे कि जनसांख्यिकीय जानकारी मसलन नाम, डेट ऑफ बर्थ और जेडर इस तरह की जानकारियों या फिर बायोमेट्रिक से जुड़ी जानकारी जैसे कि फिंगरप्रिंट या आईरिस की जानकारी के साथ आधार नंबर को UIDAI की केंद्रीय पहचान डेटा रिपोजिटरी (CIDR) में जमा की जाती है। इसी बेसिस पर UIDAI के द्वारा आधार के डिटेल की वेरिफिकेशन की जाती है।
फिलहाल किसे दी गई है आधार वेरिफिकेशन की मंजूरी
मौजूदा समय में सरकार के मंत्रालयों और विभागों को गुड गवर्नेंस के लिए आधार वेरिफिकेशन (सोशल वेलफेयर, इनोवेशन और नॉलेज) निंयन 2020 के तहत आधार वेरिफिकेशन की अनुमति दी गई है। हालांकि अब नियमों के बदलाव के बाद कोई भी संस्था लोगों के लिए आधार सर्विसेज को आसानी से उपलब्ध कराने के लिए आधार वेरिफिकेशन कर पाएगी। हालांकि इसके लिए संस्था को यह बताना होगा कि किया गया आधार वेरिफिकेशन लोगों और सरकार के हित में किस तरह से है।