NPCI ने क्यों दो साल के लिए टाली UPI मार्केट कैप की डेडलाइन? ये हैं अहम वजह

UPI Market Cap Deadline : जैसी उम्मीद की जा रही थी, एनपीसीआई ने 2 दिसंबर को यूपीआई कंपनियों के लिए 30 फीसदी मार्केट कैप की डेडलाइन दो साल के लिए 31 दिसंबर, 2024 तक के लिए टाल दी है। उधर, एनपीसीआई का उद्देश्य सही है क्योंकि यूपीआई को हुईं टेक संबंधी दिक्कतें किसी से छिपी नहीं हैं।

अपडेटेड Dec 05, 2022 पर 2:22 PM
वर्तमान में तीन कंपनियों PhonePe, Google Pay और Paytm की मासिक यूपीआई वॉल्यूम में लगभग 96 फीसदी हिस्सेदारी है

NPCI extend UPI Market Cap Deadline : 1 जनवरी, 2023 को अगर यह अजीबोगरीब नियम लागू हो जाता तो लोकप्रिय यूपीआई ऐप्स (UPI apps) की ग्रोथ पर रोक लग जाती। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (National Payments Corporation of India) यानी NPCI ने मार्च, 2021 को यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (unified payments interface) यानी यूपीआई को व्यस्तता के जोखिम से बचाने के लिए नया विचार सामने रखा। इस नई गाइडलाइन में हर यूपीआई थर्ड पार्टी ऐप के लिए 31 दिसंबर, 2022 तक 30 फीसदी ट्रांजेक्शन वॉल्यूम कैप लगाने का बात कही गई थी, जिसका उद्देश्य यूपीआई वॉल्यूम पर कुछ कंपनियों के वर्चस्व पर रोक लगाना था। वर्तमान में तीन कंपनियों PhonePe, Google Pay और Paytm की मासिक यूपीआई वॉल्यूम में लगभग 96 फीसदी हिस्सेदारी है।

यूपीआई की दिक्कतें किसी से छिपी नहीं

हालांकि, जैसी उम्मीद की जा रही थी, एनपीसीआई ने 2 दिसंबर को यूपीआई कंपनियों के लिए 30 फीसदी मार्केट कैप की डेडलाइन दो साल के लिए 31 दिसंबर, 2024 तक के लिए टाल दी है। उधर, एनपीसीआई का उद्देश्य सही है क्योंकि यूपीआई को हुईं टेक संबंधी दिक्कतें किसी से छिपी नहीं हैं। 2020 में यस बैंक के मोरेटोरियम के चलते फोनपे डाउन हो गया था। तब डेली पेमेंट्स के लिए ऐप पर सभी की अत्यधिक निर्भरता का अहसास हुआ था।


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अक्टूबर में 193 फीसदी बढ़े यूपीआई ट्रांजेक्शंस

जब NPCI 2021 में इस बंदिश लगाने वाली नीति (जिसे चरणबद्ध तरीके से जनवरी, 2023 से लागू करना था) को लेकर आया था, तब UPI पर हर महीने 2.5 अरब ट्रांजेक्शन हो रहे थे। PhonePe पर 45 फीसदी और Google Pay पर 36 फीसदी ट्रांजेक्शन हो रहे थे। अक्टूबर में यूपीआई 193 फीसदी बढ़कर 7.3 अरब ट्रांजेक्शन के स्तर पर पहुंच गया। ऐप शेयर के लिहाज से कोई बदलाव नहीं आया था। वास्तव में, PhonePe ने अपना मार्केट शेयर बढ़ाकर अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है।

UPI Growth

एनपीसीआई को क्यों बढ़ानी पड़ी डेडलाइन

इंडियागोल्ड के कोफाउंडर दीपक एबट के मुताबिक, 2021 में एनपीसीआई को लगता था कि WhatsApp Pay गति पकड़ेगा और इससे ऐप शेयर में संतुलन कायम होगा। अफसोस कि ऐसा नहीं हुआ और डेढ़ साल बाद उसे मार्केट शेयर बढ़ाने के लिए जूझना पड़ रहा है।

डेडलाइन बढ़ाने की मुख्य वजह

-P2M (पेमेंट टू मर्चेंट/ शॉपकीपर्स) की हिस्सेदारी बढ़कर 55 फीसदी हो गई, जो पहले 40 फीसदी थी। अगर नियम को सख्ती से लागू किया जाता तो कंज्यूमर्स को यूपीआई ऐप्स पर ट्रांजेक्शन पूरा करने के लिए जूझना पड़ता। इससे फेल्योर्स बढ़ जाते। P2M का ऑफलाइन और ऑनलाइन में खासा महत्व है।

UPI Usage

- PhonePe और GPay ने औपचारिक रूप से इसे लागू करने की डेडलाइन को टालने का औपचारिक अनुरोध कर दिया है, क्योंकि दोनों को ही अपने ऐप पर यूजर एक्सपीरिएंस को लेकर चिंता है।

-UPI अभी भी नए यूजर्स को जोड़ रही है। जुड़ने वाले नए यूजर्स बहुत ज्यादा टेक सेवी नहीं है, इसलिए कई ऐप्स के इस्तेमाल की कोशिशों से यूपीआई की लोकप्रियता कम होगी।

-थर्ड पार्टी एप्लीकेशन प्रोवाइडर्स (TPAP) की तकनीक में सुधार से व्यवस्थित जोखिम का डर कम हो रहा है। हाल में क्रेडिट कार्ड (अभी के लिए सिर्फ RuPay) को अनुमति दी गई है और इनकी स्वीकार्यता के लिए अगले 12 महीने खासे अहम होंगे। उम्मीद है कि इससे जल्द ही वीजा और मास्टरकार्ड भी जुड़ जाएंगे। ऐसे में टीपीएपी को हतोत्साहित करना सही नहीं होगा।

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