Passenger Rights in case of flight cancellation : दिसंबर के आखिरी सप्ताह में खराब मौसम और कम विजिबिलिटी के कारण उत्तर भारत में फ्लाइट रद्द होने और देरी की घटनाओं ने पैसेंजर्स को डरा दिया है। ऐसी स्थिति में क्या होता है और पैसेंजर के रूप में आपके क्या अधिकार हैं? मिनिस्ट्री ऑफ सिविल एविएशन ने अगस्त, 2019 में देश के भीतर उड़ान भरने वाले पैसेंजर्स से जुड़ा एक चार्टर जारी किया था। आइए जानते हैं कि कस्टमर्स के क्या अधिकार हैं और कैसे वे कम्पंसेशन के लिए दावा कर सकते हैं।
डीजीसीए के मुताबिक, यदि फ्लाइट में छह घंटे से ज्यादा की देरी है तो एयरलाइन के डिपार्चर टाइम से 24 घंटे पहले रिशिड्यूल टाइम बताना होता है और कंज्यूमर्स को फुल रिफंड या एक वैकल्पिक फ्लाइट की पेशकश करनी होती है। अगर 6 घंटे से ज्यादा देरी और रात 8 बजे और सुबह 3 बजे के बीच फ्लाइट के रवाना होने की स्थिति कस्टमर्स को मुफ्त स्टे की पेशकश करनी चाहिए। एक निश्चित अवधि से ज्यादा की देरी होने पर एयरलाइन को खाना और रिफ्रेंशमेंट देना होता है।
यदि एक फ्लाइट का ब्लॉक टाइम ढाई घंटा है तो दो घंटे से ज्यादा देरी पर कस्मटर्स को रिफ्रेशमेंट मिलना चाहिए।
यदि फ्लाइट का ब्लॉक टाइम ढाई और पांच घंटे के बीच है तो तीन घंटे से ज्यादा की देरी पर रिफ्रेंशमेंट मिलना चाहिए।
यदि फ्लाइट रद्द हो जाती है, तो यात्रियों को डिपार्चर की निर्धारित तारीख से कम से कम दो सप्ताह के भीतर, लेकिन कम से कम 24 घंटे पहले वापसी या वैकल्पिक फ्लाइट का विकल्प उन्हें पेश किया जाना चाहिए। लेकिन अगर एयरलाइन ऑपरेटर यात्रियों को सूचित नहीं करती है तो उन्हें हवाई टिकट की कीमत की वापसी प्राप्त करने के अलावा मुआवजा दिया जाना चाहिए। यह मुआवजा 5,000 रुपये से 10,000 रुपये हो सकता है।
यदि आपने कैश पेमेंट किया है तो एयरलाइन को तुलंत इसका रिफंड करना होगा। यदि आपने क्रेडिट कार्ड से पेमेंट किया तो 7 दिन के भीतर रिफंड करना होता है।
सभी एयरलाइन्स को इस बात का डर रहता है कि उनकी सीटें टिकट कैंसिल होने के कारण खाली रह सकतीं हैं इसलिए ये कंपनियां ओवरबुकिंग करतीं हैं। किसी खास फ्लाइट में ओवरबुकिंग के कारण यात्रियों की संख्या उपलब्ध सीटों से ज्यादा हो सकती है। इस स्थिति में एयरलाइन कन्फर्म बुकिंग के बावजूद फ्लाइट पर बोर्ड करने से यात्री को रोक सकती हैं। लेकिन DGCA ने इसके लिए यह नियम बनाया है कि अब अगर किसी यात्री को ओवरबुकिंग के चलते बोर्डिंग से मना किया जाता है तो एयरलाइन्स का यह कर्तव्य है कि यात्री को किसी अन्य वैकल्पिक फ्लाइट की व्यवस्था करे।
DGCA ने स्पष्ट किया, अगर एक घंटे के भीतर वैकल्पिक फ्लाइट की व्यवस्था नहीं की जाती है तो एक पैसेंजर को कम्पंसेशन देना होगा। यदि 24 घंटे के भीतर फ्लाइट की व्यवस्था की जाती है तो एयरलाइन को 10,000 रुपये तक कम्पंसेशन देना होगा। यदि 24 घंटे के बाद वैकल्पिक फ्लाइट की व्यवस्था की जाती है तो 20,000 रुपये तक मुआवजा देना होगा।
लोअर क्लास में डाउनग्रेड करने पर
DGCA ने 23 दिसंबर को ऐलान किया कि वह जल्द ही गाइडलाइन जारी करेगा, जिसमें पैसेंजर को लोअर क्लास में डाउनग्रेड करने पर पैसेंजर्स को पूरा रिफंड देने की बात कही जाएगी। इस प्रस्ताव पर फिलहाल स्टेकहोल्डर्स से परामर्श किया जा रहा है। यह 30 दिन के लिए पब्लिक कंसल्टेंशन के उद्देश्य से उपलब्ध है। डीजीसीए के प्रस्ताव के मुताबिक, एयरलाइन को पैसेंजर को डाउनग्रेड करने की स्थिति में उपलब्ध क्लास में फ्री में यात्रा करानी होगी।
ये नियम भारत को और भारत से चलने वाली सभी एयरलाइंस पर लागू होंगे।