स्मार्टफोन का चलन इन दिनों तेजी से बढ़ा है। देश भर में डिजिटाइटेशन के इस युग में फोन लैपटॉप जैसी चीजों की जरूरतें बढ़ जाती हैं। स्कूल से लेकर ऑफिस हर जगह मोबाइल के बिना कोई भी काम नहीं सकता है। छोटे से लेकर बड़े से बड़ा काम फोन की मदद से आसानी से हो जाता है। हम सभी जब फोन नया-नया खरीदते हैं तो वह काफी स्मूथली चलता है। लेकिन धीरे-धीरे जब यह पुराना होने लगता है तो इसमें तमाम तरह की दिक्कत होने लगती है। कई बार तो फोन चलते-चलते फ्रीज हो जाता है। ऐसी स्थिति में कुछ लोग रिस्टार्ट करते हैं या फिर स्विचऑफ करके ऑन करते हैं।
क्या आपने कभी सोचा है कि मोबाइल बनाने वाली कंपनियां फोन को शट डाउन करने के लिए पावर ऑफ करने के साथ-साथ रिस्टार्ट का ऑप्शन क्यों देते हैं? फोन को रिस्टार्ट करेंगे तो भी फोन पहले स्विच ऑफ होगा और फिर दोबारा अपने ऑप ऑन हो जाएगा। वहीं फोन को मैनुअली स्विच ऑफ करने के बाद फोन दोबारा ऑन नहीं होता है। यूजर्स को पावर बटन प्रेस करके ऑन करना पड़ता है।
फोन को रिस्टार्ट करें या मैनुअली स्विच ऑफ
दरअसल, फोन को समय-समय पर रिस्टार्ट करने पर ऐप के जरिए इस्तेमाल की जाने वाली मेमोरी लीक नहीं होती है। इसकी वजह से डिवाइस में सेंध लगाने का खतरा टल जाता है। वहीं, फोन को पावर ऑफ करने पर डिवाइस में मौजूद कैशे डेटा साफ हो जाता है। इसकी वजह से फोन को और बेहतर तरीके से ऑपरेट किया जा सकता है। जब केवल नेटवर्क संबंधी दिक्कत को ठीक करना हो तो फोन को रिस्टार्ट कर सकते हैं।- वहीं, अगर आपको फोन स्लो होने या फिर हैंग होने दिखाई दे तो फोन को मैनुअली स्विच ऑफ करना बेहतर विकल्प साबिहत होगा।
फोन शट डाउन होने या फिर रिस्टार्ट करने से डिवाइस के बैकग्राउंड में चलने वाले ऐप्स बंद हो जाते हैं। इसकी वजह से फोन की बैटरी के लिए भी फायदेमंद है। बैकग्राउंड ऐप्स फोन की बैटरी की खपत करते रहते हैं और यूजर्स को इसके बारे में भनक तक नहीं लगती है। फोन को समय-समय पर रिस्टार्ट करते रहना या फिर स्विच ऑफ करके ऑन करना बेहतर माना जाता है। इससे फोन के सॉफ्टवेयर या किसी ऐप में आ रही गड़बड़ी दूर हो जाती है और फोन स्मूथ चलने लगता है।