नवीन कुकरेजा

कोरनावायरस (Coronavirus) ने पूरी दुनिया में उथलपुथल मचा दी है। कई देशों में लॉकडाउन, बॉर्डर सील, Quarantine, बाज़ार में अस्थिरता इस संक्रमण का ही नतीजा है। इस दौरान आपको इस संक्रमण से ना सिर्फ खुद को बचाना है बल्कि अपनी जेब को भी इससे सुरक्षित रखना है। ऐसा करने से किसी भी मुश्किल परिस्थिति को संभालने के लिए आप तैयार रहेंगे। जैसा कि आप वर्तमान स्तिथि से लड़ रहे हैं, यहां आपकी व्यक्तिगत आर्थिक स्थिति के लिए कुछ सुझाव दिए गए हैं।
 
इमरजेंसी फंड बनाएं
 
वित्तीय नज़रिए से इमरजेंसी फंड बनाना एक अच्छी आदत है। इससे EMI, बीमा प्रीमियम और मंथली SIP सहित आपके सभी जरूरी मंथली खर्च कम से कम 6 महीने तक चल सके। आपात स्थिति जैसे कि नौकरी छूटना, बीमारी, वेतन में देरी के लिए यह फंड बहुत जरूरी है। इस पैसे को आप ज़्यादा ब्याज़ देने वाले बचत खातों और छोटी अवधि के निवेश विकल्पों में रख सकते हैं। ऐसा करने से आपको सामान्य बचत खातों की तुलना में अधिक ब्याज़ मिलेगा और साथ ही आप आसानी से जब चाहे अपने पैसे को निकाल सकते हैं। आय में अनिश्चितता और आर्थिक तनाव बढ़ने के साथ, यदि आप अपने इमरजेंसी फंड को बढ़ाते हैं तो यह समझदारी ही होगी। ऐसा करने से आपातकाल के दौरान कर्ज़ पर आपकी निर्भरता कम होगी।
 
डिजिटल भुगतान का उपयोग 
 
इस मुश्किल वक्त में आप अपने बीमा प्रीमियम, EMI, SIP जैसे भुगतान डिजिटली करें। भुगतान के लिए नकद या चेक का उपयोग करने के बजाय ऑनलाइन बैंकिंग UPI और ई-वॉलेट जैसे डिजिटल तरीकों को अपनाएं। इससे न केवल सोशल डिस्टेंस बना रहेगा बल्कि यह आपको भुगतान में देरी या चूक से भी बचाएगा।
 
अपने इंश्योरेंस का मूल्यांकन करें

किसी भी मेडिकल इमरजेंसी में हेल्थ बीमा सबसे ज्यादा जरूरी है। Coronavirus का संक्रमण भी ऐसी ही इमरजेंसी है। RDAI ने 4 मार्च 2020 को सभी बीमा कंपनियों को
कोरोनोवायरस मामलों को कवर करने और बीमारी के लिए किए गए बीमा क्लेम को जल्दी सेटल करने का निर्देश दिया।

आपकी बीमा कंपनी के आधार पर, स्वास्थ्य बीमा के लिए आपके कवरेज में पोस्ट- या प्री-हॉस्पिटलाइज़ेशन खर्च, एंबुलेंस खर्च, अस्पताल में भर्ती होने पर टेस्ट का खर्च, कोरेन्टीन खर्च इत्यादि शामिल होना चाहिए। इसलिए, अपने और अपने परिवार की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए पर्याप्त कवर के साथ हेल्थ पॉलिसी खरीदना जरूरी है। लेकिन ये याद रखें कि नए सिरे से ली गई हेल्थ बीमा स्कीम में 30 दिनों का वेटिंग पीरियड हो सकता है। यानी बीमा योजना खरीदने के 30 दिनों के बाद ही अस्पताल में भर्ती से संबंधित खर्च योजना द्वारा कवर किये जाएंगे।
 
लोन और क्रेडिट कार्ड का भुगतान जारी रखें
 
RBI के 3 महीनों का लोन मोराटोरियम पीरियड घोषित करने के बावजूद, मौजूदा
कर्ज़दारों को अपना लोन भुगतान जारी रखने के लिए अपनी पूरी कोशिश करनी चाहिए।
केवल उन ही लोगों को मोराटोरियम चुनना चाहिए जिनकी आर्थिक स्तिथि पर लॉकडाउन का गहरा प्रभाव पड़ा है और वो लोन भुगतान में असमर्थ हैं। क्योंकि मोराटोरियम पीरियड के दौरान आपकी लोन EMI केवल तीन महीनों के लिए टाली/ आस्थगित की जा रही है
और इस दौरान आपकी बकाया लोन राशि पर ब्याज़ लगता रहेगा जिसे आपको मोराटोरियम पीरियड ख़त्म हो जाने के बाद चुकाना होगा। इस से कुल ब्याज़ भुगतान बढ़ जाएगा।
 
क्रेडिट कार्ड धारकों को अपने बिल पर उच्च ब्याज दर के कारण मोराटोरियम पीरियड को
नहीं चुनना चाहिए। ये ब्याज़ दरें क्रेडिट कार्ड अनुसार, 23% से 49.36% प्रतिवर्ष हो सकती हैं। मोराटोरियम चुनने के बजाए अपने अपने बकाया बिल को EMI में बदलकर उसका छोटी किश्तों में भुगतान करें। बकाया बिल को EMI में कराने का शुल्क बिल पर लगने वाले ब्याज़ से बहुत कम है और इसकी भुगतान अवधि 5 वर्षों तक बढ़ाई जा सकती है।  
 
निवेश जारी रखें
 
वर्तमान इक्विटी मार्केट इंडेक्स में गिरावट के कारण, कई निवेशकों को अपने म्यूचुअल फंड निवेश से नुकसान हुआ है। ऐसी स्तिथि में, निवेशकों को इक्विटी बाज़ार में उथलपुथल के कारण अपने मौजूदा म्यूचुअल फंड को रिडीम करने/ बेचने से बचना चाहिए। इसके
बजाय, एक लम्बे समय में अच्छे रिटर्न को ध्यान में रखते हुए, निवेशकों को इस अवसर का
उपयोग करते हुए नीति बनाकर मिश्रित रूप से निवेश करना चाहिए।

निवेशकों को फिक्स्ड इनकम विकल्पों से अपना पैसा निकालकर इक्विटी में निवेश करने पर विचार करना चाहिए। ऐसा करने से आप कम NAV पर अधिक यूनिट खरीद सकते हैं और उनकी औसत निवेश लागत को कम कर सकते हैं। जब भी बाज़ार में फिर से तेज़ी आएगी तो अपने किये हुए निवेश से आप अपने कई आर्थिक लक्ष्यों को पूरा कर सकेंगे।
 
हालांकि, एकमुश्त निवेश के मामले में, धीरे-धीरे निवेश की नीति को अपनाएं क्योंकि बाज़ार को लेकर ये भविष्यवाणी करना मुश्किल है कि बाज़ार में कितनी गिरावट आएगी। इसलिए इक्विटी में बड़ा निवेश के लिए अपने इमरजेंसी फंड का इस्तेमाल ना करें। ऐसा करने से आर्थिक इमरजेंसी में आपको अपने इक्विटी फंड को नुकसान में बेचना पड़ सकता है या उच्च ब्याज दरों पर लोन लेना पड़ सकता है।

CEO और को-फाउंडर, पैसाबाज़ार.कॉम
 

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