क्रेडिट कार्ड से बैंकों और एनबीएफसी को होती है मोटी कमाई, जानिए कैसे

करीब सभी बड़े सरकारी और प्राइवेट बैंक क्रेडिट कार्ड्स ऑफर करते हैं। कई एनबीएफसी भी क्रेडिट कार्ड की सुविधा देती हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि यह बैंकों के लिए कमाई का बड़ा जरिया है

अपडेटेड Feb 10, 2024 पर 4:52 PM
कस्टमर्स कई बार क्रेडिट कार्ड का मिनिमम बिल नहीं चुका पाते हैं। ऐसा होने पर क्रेडिट कार्ड कंपनियां लेट फीस लगाती हैं।

क्रेडिट कार्ड (Credit Card) के इस्तेमाल में पिछले कुछ सालों में जबर्दस्त वृद्धि देखने को मिली है। इसकी खास वजह है। कंज्यूमर बैंक सेविंग्स अकाउंट में पैसे खत्म हो जाने के बाद भी क्रेडिट कार्ड के जरिए खरीदारी कर सकते हैं, रेल-हवाई टिकट बुक कर सकते हैं। इंश्योरेंस का प्रीमियम चुका सकते हैं, कार में पेट्रोल भरवा सकते हैं और बाहर खाना खा सकते हैं। उधर, क्रेडिट कार्ड जारी करने वाले बैंकों और एनबीएफसी के लिए यह कमाई का अच्छा जरिया है। यही वजह है कि करीब सभी बड़े सरकारी और प्राइवेट बैंक क्रेडिट कार्ड्स ऑफर करते हैं। कई एनबीएफसी भी क्रेडिट कार्ड की सुविधा देती हैं। सवाल है कि क्रेडिट कार्ड इश्यू करने वाले बैंक-एनबीएफसी को इससे किस तरह कमाई होती है?

सालाना फीस

कई बैंक अपने क्रेडिट कार्ड पर सालाना फीस वसूलते हैं। कुछ बैंक पहले साल वे ग्राहक से सालाना फीस वसूलते हैं। उसके बाद वे खर्च की एक लिमिट तय करत हैं। उस लिमिट से ज्यादा खर्च क्रेडिट कार्ड के जरिए करने पर सालाना फीस माफ कर देते हैं। ग्राहक सालाना फीस से बचने के लिए क्रेडिट कार्ड का ज्यादा इस्तेमाल करता है। यह क्रेडिट कार्ड जारी करने वाले बैंक के हित में होता है।

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कैश एडवान्स फीस

जब कस्टमर क्रेडिट कार्ड के जरिए बैंक के एटीएम से कैश निकालता है तो क्रेडिट कार्ड कंपनियां कैश एडवान्स फीस चार्ज करती हैं। यह एटीएम से निकाले गए पैसे का 2 से 5 फीसदी तक होता है। ज्यादा चार्ज होने की वजह से ज्यादातर ग्राहक क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कैश विड्रॉ करने के लिए नहीं करते हैं।

बैलेंस ट्रांसफर फीस

जब कस्टमर एक क्रेडिट कार्ड के आउटस्टैंडिंग अमाउंट को दूसरे क्रेडिट कार्ड पर ट्रासफर करता है तो क्रेडिट कार्ड कंपनियां यह फीस वसूलती हैं। इसकी फीस आम तौर पर 3 से 5 फीसदी होती है। कई बार क्रेडिट कार्ड कंपनियां कस्टमर का बैलेंस ट्रांसफर फीस माफ कर देती हैं।

लेट फीस

कस्टमर्स कई बार क्रेडिट कार्ड का मिनिमम बिल नहीं चुका पाते हैं। ऐसा होने पर क्रेडिट कार्ड कंपनियां लेट फीस लगाती हैं। लेट फीस लगने पर कस्टमर के क्रेडिट स्कोर पर खराब असर पड़ता है। इसलिए कस्टमर को तय समयसीमा के अंदर मिनिमम चार्ज चुकाने की कोशिश करनी चाहिए।

फाइनेंस चार्ज

कस्टमर के मिनिमम चार्च चुकाने की स्थिति में क्रेडिट कार्ड कंपनियां बाकी अमाउंट पर इंटरेस्ट वसूलती हैं। इसे फाइनेंस चार्ज कहा जाता है। इसलिए अगर आपने क्रेडिट कार्ड से कोई खरीदारी की है तो आपको उसका पूरा बिल तय समयसीमा के अंदर चुकाने की कोशिश करनी चाहिए।

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