आप उतार-चढ़ाव की वजह से शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में निवेश नहीं करना चाहते हैं तो आप बैंक एफडी या डेट म्यूचुअल फंड में इनवेस्ट कर सकते हैं। डेट म्यूचुअल फंड्स फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज में अपना पैसा लगाते हैं। हालांकि, डेट फंड्स रिटर्न की गारंटी नहीं देते हैं लेकिन इनका रिटर्न आम तौर पर सालाना 6 से लेकर 8.5 फीसदी तक रहता है।
डेट फंड्स सरकार के बॉन्ड, कंपनियों के बॉन्ड में इनवेस्ट करते हैं
डेट फंड्स सरकार के बॉन्ड्स, कॉर्पोरेट बॉन्ड्स और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं। इन एसेट्स के रिटर्न में शेयरों जैसा उतार-चढ़ाव नहीं होता है। यह उन निवेशकों के लिए अच्छा है जो फिक्स्ड रिटर्न सिक्योरिटीज में निवेश करना चाहते हैं। इनवेस्टर्स का पैसा डेट फंड मैनेजर अपने विवेक के आधार पर अलग-अलग डेट सिक्योरिटीज में लगाता है।
डेट फंड का रिटर्न आम तौर पर 6 से 8.5 फीसदी के बीच रहता है
सवाल है कि अगर 10 लाख रुपये का एकमुश्त निवेश डेट फंड में किया जाए तो 10 साल बाद कितना पैसा मिलेगा? एक्सपर्ट्स का कहना है कि चूंकि डेट फंड का सालाना रिटर्न 6 से 8.5 फीसदी के बीच रहता है तो हम 6 से लेकर 9 फीसदी सालाना रिटर्न के आधार पर 10 लाख पर 10 साल बाद मिलने वाले पैसे का अंदाजा लगा सकते हैं।
6 फीसदी रिटर्न से 10 लाख 10 साल में बढ़कर करीब 18 लाख होगा
अगर सालाना रिटर्न 6 फीसदी मान लिया जाए तो 10 लाख रुपये का निवेश डेट फंड में करने पर 10 बाद आपका पैसा बढ़कर 17.91 लाख रुपये हो जाएगा। इसका मतलब है कि आपको पैसे पर 7.91 लाख रुपये का रिटर्न मिलेगा। इसे फिक्स्ड रिटर्न वाले इंस्ट्रूमेंट्स के लिहाज से अच्छा रिटर्न कहा जाएगा।
रिटर्न 8 फीसदी रहने पर आपका पैसा बढ़कर 21 लाख से ज्यादा हो जाएगा
डेट फंड का सालाना रिटर्न अगर 7 फीसदी रहता है तो आपका 10 लाख का निवेश 10 साल में बढ़कर 19.76 लाख रुपये हो जाएगा। इसका मतलब है कि आपको अपने पैसे पर कुल 9.67 लाख रुपये का रिटर्न मिलेगा। सालाना रिटर्न 8 फीसदी रहने पर आपका पैसा बढ़कर 21.59 लाख रुपये हो जाएगा। इसका मतलब आपका कुल रिटर्न 11.59 लाख रुपये होगा। अगर सालाना रिटर्न हम 9 फीसदी मानते हैं तो 10 साल में पैसा बढ़कर 23.67 लाख हो जाएगा। यह 13.67 लाख का रिटर्न है।
डेट फंड के रिटर्न पर इनवेस्टर के स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है
यह ध्यान में रखना जरूरी है कि डेट फंड के रिटर्न पर टैक्स लगता है। डेट फंड से हुए मुनाफे को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस माना जाता है। इस पर इनवेस्टर के टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। इसका मतलब है कि ज्यादा टैक्स स्लैब में आने वाले इनवेस्टर्स को रिटर्न पर ज्यादा टैक्स चुकाना पड़ेगा।
डेट फंड से आप जरूरत पड़ने पर बगैर पेनाल्टी पैसा निकाल सकते हैं
डेट फंड में लिक्विडिटी की समस्या नहीं होती। इसका मतलब है कि कुछ साल निवेश के बाद आप जरूरत के हिसाब से अपना पैसा निकाल सकते हैं। आपको किसी तरह की पेनाल्टी नहीं चुकानी होगी। दूसरा, आप डेट फंड के एनएवी को ट्रैक कर सकते हैं। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि किसी तारीख को आप पैसा निकालते हैं तो आपको कुल कितना रिटर्न मिलेगा। पैसा सीधे आपके बैंक अकाउंट में आ जाता है।