तलाक के जरिए दो लोग कानूनी तौर पर अपनी शादी को खत्म कर सकते हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं होता कि किसी बैंक या फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन के साथ किया गया आपका जॉइंट फाइनेंशियल कॉन्ट्रैक्ट भी खुद ब खुद खत्म नहीं हो जाता। अक्सर पति-पत्नी मिलकर जॉइंट होम लोन लेते हैं। जब शादी टूटती है तो ज्यादातर लोगों को लगता है कि संपत्ति का बंटवारा होते ही लोन की जिम्मेदारी भी खत्म हो गई जबकि हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। बैंक के साथ साइन किए गए लोन एग्रीमेंट की शर्तें तब तक लागू रहती हैं जब तक कि बकाया कर्ज पूरी तरह चुकता न हो जाए या बैंक औपचारिक रूप से बदलाव के लिए सहमत न हो जाए। सिर्फ तलाक की डिग्री लोन कॉन्ट्रैक्ट को नहीं बदलती है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी बॉरोअर्स को सलाह देता है कि वे अपने होम लोन के नियमों और शर्तों को ध्यानपूर्वक समझें और उन्हें लिखित रूप में अपने पास रखें
