Gold Price: सोने की कीमतों में आगे बड़ी तेजी आ सकती है। Jefferies के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी स्ट्रैटेजी क्रिस वुड (Chris Wood) के मुताबिक, सोने का भाव बढ़कर 10,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। मौजूदा स्तर से देखें तो यह करीब 130% की तेजी होगी।

Gold Price: सोने की कीमतों में आगे बड़ी तेजी आ सकती है। Jefferies के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी स्ट्रैटेजी क्रिस वुड (Chris Wood) के मुताबिक, सोने का भाव बढ़कर 10,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। मौजूदा स्तर से देखें तो यह करीब 130% की तेजी होगी।
Wood ने गुरुवार, 17 सितंबर को Jefferies India Forum 2026 के मौके पर CNBC-TV18 से बातचीत में यह बात कही। उन्होंने कहा कि 10,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर संभव है। उनके मुताबिक, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को नियंत्रित करने की कोशिश से डॉलर कमजोर हो सकता है। इसका फायदा सोने को मिल सकता है।
सोने की कीमत इस साल जनवरी में 5,589 डॉलर प्रति औंस के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई थी। इसके बाद इसमें नरमी आई है। गुरुवार को अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से बेंचमार्क ब्याज दर में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी के बाद शुरुआती कारोबार में सोना 0.88% गिरकर 4,348.90 डॉलर प्रति औंस पर आ गया।
$10,000 हुआ तो कितना उछलेगा?
मौजूदा करीब 4,349 डॉलर प्रति औंस के भाव से अगर सोना 10,000 डॉलर तक पहुंचता है, तो इसमें करीब 130% का उछाल आएगा। यानी सोने की कीमत मौजूदा स्तर के मुकाबले करीब 2.3 गुना हो जाएगी।
भारत में MCX पर सोना फिलहाल करीब ₹1.51 लाख प्रति 10 ग्राम है। अगर भारत में भी सोने की कीमत में डॉलर वाले सोने के बराबर करीब 130% की तेजी आती है, तो MCX पर भाव करीब ₹3.47 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है।
अमेरिका के बॉन्ड यील्ड पर क्या कहा?
वुड का कहना है कि बाजार को देर-सबेर यह समझना होगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के पास ब्याज दरों को बहुत ज्यादा बढ़ाने की क्षमता नहीं है। उनके मुताबिक, अमेरिका का राजकोषीय घाटा इतना ज्यादा है कि देश के लिए ऊंची बॉन्ड यील्ड को संभालना मुश्किल होगा।
उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास सरकारी खर्च से जुड़े अधिकारों और लाभों में कटौती करने की ‘राजनीतिक इच्छा’ नहीं है। ऐसे में अमेरिकी अधिकारियों को बॉन्ड यील्ड को दबाने की कोशिश करनी पड़ सकती है।
डॉलर कमजोर हुआ तो सोने को फायदा
Wood के मुताबिक, अगर अमेरिका बॉन्ड यील्ड को नियंत्रित करता है, तो इससे डॉलर में लंबे समय तक कमजोरी का रुख आ सकता है। उनका मानना है कि यह उभरते बाजारों के शेयरों और सोने के लिए अच्छी खबर होगी।
उनके मुताबिक, डॉलर में लंबे समय तक कमजोरी आने से भारत को खास फायदा हो सकता है। इसकी वजह भारत के परिवारों के पास मौजूद बड़ी मात्रा में सोना है।
भारतीय परिवारों की संपत्ति पर असर
Wood ने कहा कि भारत में गोल्ड लेंडिंग मार्केट तेजी से बढ़ रहा है। इससे घरों में रखा सोना धीरे-धीरे बाजार में इस्तेमाल होने लगा है।
उनके मुताबिक, अगर सोने की कीमत 10,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचती है, तो भारतीय परिवारों की बैलेंस शीट में मौजूद सोने की संपत्ति बड़े स्तर पर मॉनेटाइज हो सकती है। यानी घरों में रखा सोना ज्यादा आर्थिक गतिविधियों और कर्ज के लिए इस्तेमाल हो सकता है।
फेड की पॉलिसी बदली तो तस्वीर अलग होगी
वुड ने कहा कि अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयर Kevin Warsh मौद्रिक नीति को वास्तव में सख्त करते हैं और लंबे समय तक रेट हाइक का चक्र चलाते हैं। साथ ही फेड की बैलेंस शीट को बड़े स्तर पर घटाते हैं, तो उनका अनुमान गलत साबित हो सकता है।
उनके मुताबिक, ऐसी सख्त नीति से डॉलर मजबूत होगा। इससे बॉन्ड मार्केट में बड़ी तेजी आ सकती है। इसके उलट सोने की कीमतों पर दबाव पड़ेगा और अमेरिकी शेयर बाजार पर भी कई तरह के नकारात्मक असर हो सकते हैं।
हालांकि, Wood ने कहा कि उन्हें ऐसा होने पर तब तक भरोसा नहीं होगा, जब तक वह इसे होते हुए देख न लें। उनका मानना है कि ऐसी नीति अमेरिका में कई शक्तिशाली हितों को नुकसान पहुंचा सकती है।
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