जिस गधे को पाकिस्तान के गांवों में आज भी मेहनतकश साथी के तौर पर देखा जाता है, वही अब एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय कारोबार का हिस्सा बन गया है, जिसकी डोर चीन से जुड़ी है। बलूचिस्तान के ग्वादर में शुरू हुआ यह कारोबार धीरे-धीरे इतना बड़ा रूप ले रहा है कि आने वाले समय में यहां रोजाना सैकड़ों गधों की प्रोसेसिंग की जा सकती है। दिलचस्प बात यह है कि इस कहानी का सबसे अहम किरदार गधे का मांस नहीं, बल्कि उसकी खाल है। चीन में इसकी मांग ने एक ऐसे बाजार को जन्म दिया है, जिसने पाकिस्तान के गधों की कीमत और भूमिका दोनों बदल दी है।
