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पाकिस्तान के गधों पर चीन की नजर, ग्वादर से चल रहा करोड़ों का कारोबार; जानिए आखिर क्यों बढ़ी इतनी बड़ी मांग

जिस गधे को पाकिस्तान में अब तक मेहनत और बोझ ढोने से जोड़ा जाता था, उसकी किस्मत अब बदलती नजर आ रही है। ग्वादर से शुरू हुआ एक नया कारोबार सीधे चीन की जरूरतों से जुड़ गया है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर चीन को पाकिस्तान के गधों में इतनी दिलचस्पी क्यों है और इसके पीछे छिपी पूरी कहानी क्या है?

Edited By: Anchal Jhaअपडेटेड Sep 17, 2026 पर 4:28 PM
पाकिस्तान के गधों पर चीन की नजर, ग्वादर से चल रहा करोड़ों का कारोबार; जानिए आखिर क्यों बढ़ी इतनी बड़ी मांग
अफ्रीकी देश लंबे समय तक चीन के लिए गधे की खाल के महत्वपूर्ण स्रोत रहे।

जिस गधे को पाकिस्तान के गांवों में आज भी मेहनतकश साथी के तौर पर देखा जाता है, वही अब एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय कारोबार का हिस्सा बन गया है, जिसकी डोर चीन से जुड़ी है। बलूचिस्तान के ग्वादर में शुरू हुआ यह कारोबार धीरे-धीरे इतना बड़ा रूप ले रहा है कि आने वाले समय में यहां रोजाना सैकड़ों गधों की प्रोसेसिंग की जा सकती है। दिलचस्प बात यह है कि इस कहानी का सबसे अहम किरदार गधे का मांस नहीं, बल्कि उसकी खाल है। चीन में इसकी मांग ने एक ऐसे बाजार को जन्म दिया है, जिसने पाकिस्तान के गधों की कीमत और भूमिका दोनों बदल दी है।

अब सवाल यह है कि आखिर चीन को गधे की खाल की इतनी जरूरत क्यों पड़ रही है? इसके पीछे कौन-सा उद्योग है और पाकिस्तान इस बढ़ती मांग को अपने लिए कमाई के मौके के तौर पर कैसे देख रहा है? इस पूरी कहानी में ग्वादर से लेकर चीन तक कई दिलचस्प कड़ियां जुड़ी हैं।

गधे की खाल से बनता है ‘एजियाओ’

गधे की खाल चीन के पारंपरिक औषधीय उद्योग में बेहद अहम मानी जाती है। इससे एजियाओ (Ejiao) नाम का जिलेटिन तैयार किया जाता है। गधे की खाल को उबालकर उसमें मौजूद कोलेजन निकाला जाता है, जिसका इस्तेमाल पारंपरिक चीनी चिकित्सा के साथ-साथ कुछ ब्यूटी प्रोडक्ट में भी होता है। चीन में एजियाओ की मांग बढ़ी तो वहां गधों की संख्या पर दबाव बढ़ने लगा। घरेलू आपूर्ति घटने के बाद चीनी खरीदारों ने दूसरे देशों में गधों और उनकी खाल के स्रोत तलाशने शुरू कर दिए।

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