एक समय था जब बच्चों के लिए रिश्ता ढूंढने की जिम्मेदारी रिश्तेदारों, पड़ोसियों और पारिवारिक दोस्तों की होती थी। फिर अखबारों में मैट्रिमोनियल विज्ञापनों का दौर आया और उसके बाद मैट्रिमोनियल वेबसाइट्स और डेटिंग ऐप्स ने इस तलाश को और बदल दिया। लेकिन दिल्ली में रिश्ता तलाशने का एक ऐसा तरीका सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच लिया। यहां संभावित दूल्हा-दुल्हन का बायोडाटा बांटने के बजाय उसे माइक पर सार्वजनिक तौर पर सुनाया जा रहा था।
