Hallmarking Fees Hike: त्योहारी सीजन से पहले सोने की हॉलमार्किंग फीस बढ़ी, जानिए ग्राहकों पर क्या होगा असर
Hallmarking Fees Hike: त्योहारी सीजन से पहले सोने की हॉलमार्किंग फीस ₹45 से बढ़कर ₹75 हो गई है। यानी 66.67% की बढ़ोतरी। कम वजन वाले गहनों पर इसका असर ज्यादा पड़ सकता है। जानिए नई फीस, ज्वेलर्स की लागत और ग्राहकों पर इसके संभावित असर की पूरी जानकारी।
हॉलमार्किंग फीस में बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब ज्वेलरी कारोबार में त्योहारी खरीदारी की तैयारी शुरू हो रही है।
Hallmarking Fees Hike: देश में त्योहारी खरीदारी का सीजन शुरू होने वाला है। इससे पहले ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स यानी BIS ने सोने और चांदी के गहनों की हॉलमार्किंग फीस में बदलाव किया है। नए नियम 14 सितंबर 2026 को जारी नोटिफिकेशन के साथ लागू हो गए हैं।
हॉलमार्किंग किसी कीमती धातु से बने गहने की शुद्धता पहचानने का मुख्य तरीका है। इससे पता चलता है कि गहना कितने कैरेट का है। जैसे 22 कैरेट या 24 कैरेट। हॉलमार्क ये भी प्रमाणित करता है कि गहना BIS के मानकों के मुताबिक है।
सोने की हॉलमार्किंग फीस ₹75 हुई
BIS (Hallmarking) Regulations, 2026 में बदलाव किया गया है। इसके बाद मान्यता प्राप्त Assaying and Hallmarking Centres यानी AHCs में सोने के गहने जमा कराने वाले ज्वेलर्स को ₹75 प्रति गहना हॉलमार्किंग फीस देनी होगी। पहले ये फीस ₹45 थी यानी इसमें 66.67% का इजाफा किया गया है।
एक कंसाइनमेंट पर न्यूनतम फीस ₹200 होगी। यानी गहनों की संख्या कम होने पर भी कम से कम ₹200 फीस देनी होगी। चांदी के गहनों के लिए फीस ₹35 प्रति गहना तय की गई है। एक कंसाइनमेंट पर न्यूनतम फीस ₹150 होगी।
हॉलमार्किंग सेंटर की फीस भी तय
नए नियमों में AHCs की ओर से BIS के लिए ली जाने वाली फीस भी तय की गई है। सोने के गहनों पर यह फीस ₹7.50 प्रति गहना होगी। एक कंसाइनमेंट पर न्यूनतम फीस ₹20 रहेगी।
चांदी के गहनों के लिए यह फीस ₹3.50 प्रति गहना होगी। इसकी न्यूनतम सीमा ₹15 प्रति कंसाइनमेंट तय की गई है। इन सभी फीस पर लागू टैक्स अलग से लिया जाएगा।
छोटे और हल्के गहनों पर ज्यादा असर
AIJGF के राष्ट्रीय महासचिव नितिन केडिया ने कहा कि हॉलमार्किंग फीस बढ़ने का असर कम वजन वाले गहनों पर ज्यादा पड़ेगा। वजह साफ है। आप चाहे आधा ग्राम का गहना बनवाएं या और पांच ग्राम का, दोनों पर ₹75 की फीस समान होगी। इसलिए कम वजन वाले गहनों की कीमत में इस फीस का प्रतिशत असर ज्यादा होगा।
केडिया के मुताबिक, इससे कम मार्जिन वाले गहनों की लागत भी बढ़ेगी। इसका असर छोटे ज्वेलर्स पर ज्यादा पड़ सकता है। बड़े और संगठित कारोबारियों के मुकाबले छोटे ज्वेलर्स के लिए प्रतिस्पर्धा करना और मुश्किल हो सकता है।
त्योहारी सीजन से पहले बदलाव क्यों अहम?
हॉलमार्किंग फीस में बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब ज्वेलरी कारोबार में त्योहारी खरीदारी की तैयारी शुरू हो रही है। सितंबर को आमतौर पर फेस्टिव सीजन से पहले खरीदारी वाला महीना माना जाता है। इसके बाद नवरात्रि और दशहरा आते हैं। फिर दिवाली का सीजन आता है। इसके बाद शादी का सीजन भी शुरू होता है।
ऐसे में ज्वेलर्स के लिए नई हॉलमार्किंग फीस एक अतिरिक्त लागत बन सकती है। उन्हें त्योहारी सीजन के लिए ज्वेलरी का स्टॉक तैयार करते समय इसका भी हिसाब रखना होगा।
ग्राहकों के लिए क्या मतलब?
ग्राहकों के लिए भी हॉलमार्किंग फीस में बदलाव को समझना जरूरी है। क्योंकि इसकी लागत का बोझ ज्वेलर्स उन्हीं पर डाल सकते हैं।
अंतिम बिल में मेकिंग चार्ज और दूसरी लागतें भी जुड़ती हैं। ऐसे में ग्राहक को सोने की कीमत के साथ इन सभी चार्ज को देखकर ही गहने की कुल कीमत समझनी चाहिए।
Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।