Jewellery Stocks: हॉलमार्किंग फीस 67% बढ़ी, PC Jeweller समेत ज्वेलरी स्टॉक्स 5% तक गिरे
Jewellery Stocks: हॉलमार्किंग फीस बढ़ने के बाद ज्वेलरी शेयरों में दबाव दिखा। Kalyan Jewellers और PC Jeweller करीब 5% तक गिरे। Lalithaa Jewellery Mart में लोअर सर्किट लगा। जानिए फीस बढ़ने का छोटे और हल्के गहनों पर कितना असर पड़ सकता है।
हॉलमार्किंग से ज्वेलरी में इस्तेमाल होने वाली कीमती धातु की शुद्धता का सर्टिफिकेट दिया जाता है।
Jewellery Stocks: ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों पर 16 सितंबर को दबाव दिखा। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्स (BIS) ने सोने की ज्वेलरी की हॉलमार्किंग फीस ₹45 से बढ़ाकर ₹75 कर दी है। यानी करीब 67% की बढ़ोतरी। इस खबर के बाद Kalyan Jewellers India और PC Jeweller के शेयर करीब 5% तक गिर गए। वहीं, हाल ही में लिस्ट हुई Lalithaa Jewellery Mart में 5% का लोअर सर्किट लगा।
नया शुल्क 14 सितंबर 2026 को जारी BIS (Hallmarking) Amendment Regulations, 2026 के तहत लागू हुआ है। इसमें सोने के लिए एक कंसाइनमेंट पर न्यूनतम शुल्क ₹200 और चांदी के लिए ₹150 तय किया गया है। चांदी की ज्वेलरी के लिए फीस में बदलाव नहीं किया गया है। यह ₹35 प्रति आर्टिकल ही रहेगी।
Kalyan Jewellers का शेयर 3.86% गिरा
Kalyan Jewellers India का शेयर 16 सितंबर को 4.10% गिरकर ₹579.40 पर बंद हुआ। PC Jeweller के शेयर में भी करीब 5% तक की गिरावट देखने को मिली। हालांकि, यह बाद में रिकवर हुआ। और 1.94% की गिरावट के साथ 12.64 पर बंद हुआ। वहीं, हाल ही में शेयर बाजार में लिस्ट हुई Lalithaa Jewellery Mart में 5% का लोअर सर्किट लग गया। बाकी ज्यादातर ज्वेलरी स्टॉक्स भी लाल निशान में ही रहे।
हॉलमार्किंग क्यों जरूरी है?
हॉलमार्किंग से ज्वेलरी में इस्तेमाल होने वाली कीमती धातु की शुद्धता का सर्टिफिकेट दिया जाता है। BIS के मुताबिक हॉलमार्क वाले आर्टिकल पर तीन प्रमुख निशान होते हैं।
इनमें BIS का लोगो, कैरेट या मिलेसिमल फाइननेस और छह अंकों का HUID नंबर शामिल है। HUID यानी Hallmark Unique Identification Number किसी हॉलमार्क वाले आर्टिकल की पहचान के लिए इस्तेमाल होता है।
छोटे और हल्के गहनों पर ज्यादा असर
AIJGF के राष्ट्रीय महासचिव नितिन केडिया ने कहा कि सोने की कीमत पहले ही आम ग्राहकों के बजट पर दबाव डाल रही है। ऐसे में ज्वेलर्स कम वजन और किफायती गहनों के जरिए मांग बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रति वस्तु हॉलमार्किंग फीस बढ़ने का असर हल्के गहनों पर ज्यादा पड़ेगा। वजह यह है कि आधा ग्राम और पांच ग्राम के गहने, दोनों पर ₹75 की फीस समान होगी। इसलिए कम वजन और कम मार्जिन वाले गहनों की लागत पर इसका प्रतिशत असर ज्यादा होगा।
केडिया के मुताबिक, इससे छोटे ज्वेलर्स की प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। साथ ही, बड़े और संगठित कारोबारियों के मुकाबले छोटे कारोबारियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
हॉलमार्किंग फीस बढ़ाने के फैसले पर All India Gem and Jewellery Domestic Council (GJC) ने चिंता जताई है। संगठन ने सरकार और BIS से फैसले की समीक्षा करने की मांग की है। साथ ही, हितधारकों से बातचीत होने तक पुरानी फीस बनाए रखने की अपील की है।
GJC के चेयरमैन राजेश रोकड़े ने कहा कि ज्वेलरी इंडस्ट्री हॉलमार्किंग का समर्थन करती है। इससे ज्वेलरी की शुद्धता को लेकर ग्राहकों का भरोसा बढ़ता है। हालांकि, उनका कहना है कि अनिवार्य अनुपालन की लागत में करीब 67% की बढ़ोतरी की समीक्षा होनी चाहिए।
रोकड़े ने कहा कि हॉलमार्किंग का वॉल्यूम काफी बढ़ चुका है। ऐसे में इंडस्ट्री यह समझना चाहती है कि इस समय प्रति आर्टिकल फीस ₹45 से बढ़ाकर ₹75 करने की जरूरत क्यों पड़ी।
Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।