अमेरिकी केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। अगर फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट बढ़ाता है तो यह जुलाई 2023 के बाद रेट में पहली वृद्धि होगी। रायटर्स के पोल में शामिल ज्यादातर इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि फेडरल रिजर्व मार्च तक कम से कम एक बार या ज्यादा बार इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। सवाल है कि अगर फेड इंटरेस्ट रेट बढ़ाता है तो इसका भारतीय शेयर बाजारों पर क्या असर पड़ेगा?
आज रात 12 बजे तक आएगा फेड का फैसला
फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट को लेकर फैसले का पता आज यानी 16 सितंबर को भारतीय समय के मुताबिक रात 11:30-12 बजे तक चल जाएगा। अगर फेड ने इंटरेस्ट रेट बढ़ाया तो डॉलर में मजबूती आएगी। इससे रुपये पर दबाव बढ़ेगा। बॉन्ड यील्ड बढ़ेगी और शेयर बाजारों में ज्यादा उतार-चढ़ाव दिखेगा। शेयर बाजारों पर पहले से काफी उतार-चढ़ाव दिख रहा है। बाजार का सेंटिमेंट पहले से कमजोर है।
इंटरेस्ट रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ने की पूरी संभावना
एनरिच मनी के फाउंडर और सीईओ पोनमुदी आर ने कहा कि आज इंटरेस्ट रेट बढ़ने की संभावना काफी ज्यादा है। ऐसे में यह देखना काफी अहम होगा कि फेड आगे किस तरह का गाइडेंस देता है। उन्होंने कहा कि भारतीय शेयर बाजार फेड के रेट बढ़ाने के फैसले को बर्दाश्त कर सकते हैं। लेकिन, इस बात को लेकर काफी अनिश्चितता है कि इंटरेस्ट रेट को लेकर फेड का रुख आगे कैसा रहेगा।
फेडरल रिजर्व के आगे के गाइडेंस पर होगी नजरें
उन्होंने कहा, "इंटरेस्ट रेट में 25 बीपीएस की वृद्धि को लेकर ज्यादा चिंता नहीं है। इसका असर बाजार पर पहले से पड़ता दिख रहा है। भारतीय बाजार के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण फेड का आगे का गाइडेंस है। इसके बाद यह देखना अहम होगा कि फेड के ऐलान के बाद अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड की दिशा कैसी रहती है।"
विदेशी फंडों के निवेश पर पड़ सकता है असर
उन्होंने कहा, "अगर फेड यह संकेत देता है कि इनफ्लेशन आगे हाई लेवल पर बना रहेगा और आगे भी इंटरेस्ट रेट बढ़ने के आसार हैं तो बॉन्ड यील्ड में उछाल और डॉलर में मजबूती का असर विदेशी फंडों के निवेश पर पड़ेगा। इसका मतलब है कि भारतीय बाजारों को लेकर विदेशी निवेशकों की बेरुखी जारी रह सकती है।" उन्होंने कहा कि इसका ज्यादा असर हाई-बीटा और रेट सेंसेटिव सेक्टर्स पर दिखेगा।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल से बढ़ेगा दबाव
भारत की इकोनॉमी मजबूत बनी हुई है। लेकिन विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। क्रूड ऑयल की कीमतें हाई लेवल पर बनी हुई हैं। रुपया भी फिर से दबाव में दिख रहा है। अगर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड नीचे नहीं आती है तो इससे भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड 5 फीसदी पर पहुंच गई है। यील्ड और बढ़ती है तो इससे भारतीय बाजारों पर दबाव बढ़ेगा।