Gen Z रिटायरमेंट प्लानिंग में दूसरों से काफी आगे, एक्सिस मैक्स लाइफ सर्वे के दिलचस्प नतीजे

सर्वे के नतीजे बताते हैं कि अगर आर्थिक जरूरतें पूरी हो जाएं, तो 10 में से 7 शहरी भारतीय 58-60 साल की उम्र से पहले ही रिटायर होना चाहेंगे। रिटायर होने की चाहत रखने वालों में से आधे लोग 50 साल की उम्र से पहले ही 'फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस एंड रिटायर एर्ली' (एफआईआरई) का लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं

अपडेटेड Sep 16, 2026 पर 6:45 PM
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अब युवा अपनी रिटायरमेंट की तैयारी बहुत पहले से शुरू कर रहे हैं। यह रिएक्टिव प्लानिंग से प्रोएक्टिव तैयारी की ओर बदलाव का संकेत है।

एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस लिमिटेड ने 16 सितंबर को कांतार के साथ मिलकर किए गए अपने सालाना 'भरोसा टॉक्स इंडिया रिटायरमेंट इंडेक्स स्टडी' के छठे एडिशन (आइरिस 6.0) के नतीजे जारी किए। यह स्टडी शहरी भारत में रिटायरमेंट के बारे में सोच में आए एक बड़े बदलाव को दिखाती है।

लोग रिटायरमेंट के बारे में जल्द सोचने लगे हैं

सर्वे के नतीजे बताते हैं कि अब पहले से कहीं ज्यादा भारतीय जल्दी रिटायर होना चाहते हैं और रिटायरमेंट के बारे में जल्दी सोचना भी शुरू कर रहे हैं। हालांकि स्टडी में यह भी सामने आया कि इच्छा से लेकर तैयारी तक का फाइनेंशियल सफर अभी भी काफी लंबा है।


जल्द रिटायर करने की बढ़ रही है चाहत

'भरोसा टॉक्स आइरिस' के छठे एडिशन से यह बात सामने आई है कि अगर आर्थिक जरूरतें पूरी हो जाएं, तो 10 में से 7 शहरी भारतीय 58-60 साल की उम्र से पहले ही रिटायर होना चाहेंगे। रिटायर होने की चाहत रखने वालों में से आधे लोग 50 साल की उम्र से पहले ही 'फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस एंड रिटायर एर्ली' (एफआईआरई) का लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं। हालांकि, सर्वे में शामिल लोगों ने अपने रिटायरमेंट के लिए तय किए गए अपने फंड का औसतन सिर्फ 28 प्रतिशत ही अब तक जमा किया है।

रिटायरमेंट के लिए पैसे जुटाना एक चुनौती

एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस के एमडी एवं सीईओ सुमित मदान ने कहा, "भरोसा टॉक्स आइरिस 6.0 से यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया है कि कई भारतीयों के लिए रिटायरमेंट अभी भी एक फाइनेंशियल चुनौती है। स्टडी में सामने आया है कि जेन एक्स+ के 82 प्रतिशत लोगों को लगता है कि लगातार इनकम के लिए उन्हें काम करते रहना पड़ेगा। इस डर से एक अहम सच्चाई सामने आई है: ‘रिटायरमेंट का मतलब सिर्फ एक खास उम्र तक पहुंचना नहीं होता है, बल्कि आगे क्या करना है, यह चुनने की फाइनेंशियल आजादी भी होनी चाहिए।’

मन की शांति सुरक्षित रिटायरमेंट का असल मतलब

अब युवा अपनी रिटायरमेंट की तैयारी बहुत पहले से शुरू कर रहे हैं। यह रिएक्टिव प्लानिंग से प्रोएक्टिव तैयारी की ओर बदलाव का संकेत है। असली चुनौती लोगों के इरादे को फाइनेंस, हेल्थ और इमोशनल वेलबीइंग के मामले में लगातार एक्शन में बदलने की है, क्योंकि असल में आजादी, पसंद और मन की शांति ही सुरक्षित रिटायरमेंट का असली मतलब है।

अलग-अलग पीढ़ियों में बदल रही रिटायरमेंट प्लानिंग

कांतार की साउथ एशिया की मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ क्लाइंट ऑफिसर सौम्या मोहंती ने कहा, "भरोसा टॉक्स आइरिस 6.0 से पता चलता है कि अलग-अलग पीढ़ियों और इलाकों में रिटायरमेंट प्लानिंग का तरीका बदल रहा है। युवा भारतीय अब रिटायरमेंट प्लानिंग जल्दी शुरू कर रहे हैं। रिटायरमेंट की तैयारी में सेहत का ध्यान रखना भी अहम हो गया है।

टियर-2 शहरों में भी बेहतर हुई रिटायरमेंट प्लानिंग

उन्होंने कहा कि 59 प्रतिशत लोगों का कहना है कि वे नियमित रूप से या कभी-कभी हेल्थ चेक-अप करवाते हैं। इसके अलावा, जो लोग नियमित रूप से शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं, उनमें से 44 प्रतिशत लोग रोजाना ऐसा करते हैं। टियर-2 शहरों में भी रिटायरमेंट की तैयारी बेहतर हुई है, जो शहरी भारत में रिटायरमेंट को लेकर लोगों के बीच व्यापक बातचीत का संकेत है।"

 62 फीसदी जेन जी ने शुरू की रिटायरमेंट प्लानिंग

जेन जी के 62 प्रतिशत लोगों ने रिटायरमेंट के लिए निवेश करना शुरू कर दिया है, जबकि मिलेनियल्स में यह आंकड़ा 70 प्रतिशत और जेन एक्स+ में 75 प्रतिशत है। 61 प्रतिशत लोग जानते हैं कि रिटायरमेंट के बाद के वर्षों में अपनी मौजूदा जीवनशैली बनाए रखने के लिए उन्हें कितनी रकम की जरूरत होगी, लेकिन उन्हें इस बात का पूरा भरोसा नहीं है कि यह रकम काफी होगी। सिर्फ 11 प्रतिशत लोगों को लगता है कि उनकी रिटायरमेंट की बचत जिंदगी भर चलेगी। 39 प्रतिशत लोगों को लगता है कि उनकी बचत पांच साल भी नहीं चल पाएगी।

रिटायरमेंट फंड को लेकर भी बदल रही सोच

रिटायरमेंट के लिए कितनी रकम (कॉर्पस) काफी है, इसे लेकर भी लोगों की सोच बदल रही है। आरामदायक रिटायरमेंट के लिए 1 करोड़ रुपये या उससे कुछ कम की रकम को ही काफी मानने वालों की संख्या 7 प्रतिशत कम हुई है। 2025 में ऐसा मानने वाले 77 प्रतिशत थे, जो 2026 में 70 प्रतिशत हो गए। यह सोच उन लोगों में खास तौर पर कम है जिनकी सालाना घरेलू आय 15 लाख रुपये से ज्यादा है। इस आय स्तर पर ऐसा मानने वाले 51 प्रतिशत हैं, जबकि मेट्रो शहरों में रहने वालों में ऐसा मानने वाले 63 प्रतिशत हैं।

52 फीसदी लोगों ने लिया हेल्थ इंश्योरेंस

75 प्रतिशत लोगों को उम्मीद है कि वे रिटायरमेंट के बाद के वर्षों में सेहतमंद और फिट रहेंगे। वर्तमान समय में 52 प्रतिशत लोगों का कहना है कि उन्होंने हेल्थ इंश्योरेंस लिया है और जो लोग नियमित तौर पर शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं, उनमें से 44 प्रतिशत लोग रोजाना ऐसा करते हैं। इसके अलावा, 21 प्रतिशत लोग अपनी सेहत पर नजर रखने के लिए वियरेबल डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं।

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