EPF Pension: केंद्रीय कैबिनेट ने EPF और EPS की अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब यह सीमा ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000 हो जाएगी। सरकार के मुताबिक, इस फैसले से करीब 51 लाख कर्मचारियों को फायदा होगा।
EPF Pension: केंद्रीय कैबिनेट ने EPF और EPS की अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब यह सीमा ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000 हो जाएगी। सरकार के मुताबिक, इस फैसले से करीब 51 लाख कर्मचारियों को फायदा होगा।
अभी तक ₹15,000 तक के वेतन पर EPF और EPS की अनिवार्य कवरेज लागू होती थी। यह सीमा 1 सितंबर 2014 से नहीं बदली थी। नई सीमा लागू होने पर ज्यादा कर्मचारी इस दायरे में आ सकते हैं।
पेंशन में 66.7% तक बढ़ोतरी
इस फैसले का सीधा असर EPS यानी कर्मचारी पेंशन योजना पर भी पड़ने की उम्मीद है। वजह है कि पेंशन की कैलकुलेशन के लिए इस्तेमाल होने वाली वेतन सीमा भी ₹25,000 हो सकती है।
EPS में पेंशन का फॉर्मूला इस तरह है:
पेंशन = पेंशन योग्य वेतन × पेंशन योग्य सेवा ÷ 70
अभी अधिकतम पेंशन योग्य वेतन ₹15,000 माना जाता है। ऐसे में 35 साल की पेंशन योग्य सेवा वाले कर्मचारी की फॉर्मूला आधारित पेंशन करीब ₹7,500 बनती है।
अगर यही सीमा ₹25,000 हो जाती है, तो 35 साल की सेवा पर पेंशन ₹12,500 हो सकती है। यानी फॉर्मूला के हिसाब से पेंशन में 66.7% की बढ़ोतरी हो सकती है।
| पेंशन योग्य सेवा | ₹15,000 वेतन सीमा पर पेंशन | ₹25,000 वेतन सीमा पर पेंशन | संभावित बढ़ोतरी |
| 10 साल | ₹2,143 | ₹3,571 | 66.70% |
| 20 साल | ₹4,286 | ₹7,143 | 66.70% |
| 25 साल | ₹5,357 | ₹8,929 | 66.70% |
| 30 साल | ₹6,429 | ₹10,714 | 66.70% |
| 35 साल | ₹7,500 | ₹12,500 | 66.70% |
Zaggle की CHRO लता अय्यर ने कहा, 'अगर बढ़ी लिमिट को EPS की कैलकुलेशन में लागू किया जाता है, तो पेंशन में अच्छी बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, वास्तविक बढ़ोतरी पेंशन योग्य सेवा और सरकार की ओर से जारी होने वाले अंतिम नियमों पर निर्भर करेगी।'
EPF में ज्यादा पैसा कट सकता है
अब बात EPF की। यहां तस्वीर थोड़ी अलग है। वेतन सीमा बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि हर कर्मचारी की सैलरी से EPF की कटौती तुरंत बढ़ जाएगी। फिलहाल कुछ कंपनियां ₹15,000 की सीमा पर EPF योगदान तय करती हैं। वहीं, कुछ कंपनियां कर्मचारी के वास्तविक बेसिक पे पर योगदान करती हैं। इसलिए नई व्यवस्था का असर कर्मचारी की मौजूदा पॉलिसी पर भी निर्भर करेगा।
मान लीजिए अभी किसी कर्मचारी का EPF योगदान ₹15,000 की सीमा पर हो रहा है। 12% के हिसाब से हर महीने कर्मचारी के हिस्से से ₹1,800 कटते हैं। अगर नई ₹25,000 की सीमा पर 12% योगदान लागू होता है, तो यह रकम बढ़कर ₹3,000 हो जाएगी। यानी हर महीने ₹1,200 ज्यादा EPF में जाएगा।
इसका सीधा असर टेक-होम सैलरी पर पड़ेगा। हाथ में आने वाली सैलरी ₹1,200 तक कम हो सकती है। हालांकि, यह पैसा कर्मचारी की रिटायरमेंट सेविंग में ही जाएगा।
हर कर्मचारी की सैलरी पर असर नहीं पड़ेगा
जिन कर्मचारियों का EPF योगदान पहले से ही उनके वास्तविक बेसिक पे पर होता है, उन पर नई सीमा का तुरंत कोई खास असर नहीं पड़ सकता।
मसलन, अगर किसी कर्मचारी की कंपनी पहले से ही ₹25,000 या उससे ज्यादा के बेसिक पे पर 12% EPF काट रही है, तो केवल वेतन सीमा बढ़ने से उसकी कटौती में जरूरी नहीं कि कोई बदलाव हो।
Choice International की CHRO नेहा जैन ने कहा, 'अगर बढ़ी हुई सीमा पर EPF योगदान अनिवार्य होता है, तो फिलहाल ₹15,000 की सीमा पर 12% योगदान करने वाला कर्मचारी हर महीने ₹1,800 की जगह ₹3,000 योगदान करेगा। इससे टेक-होम सैलरी में हर महीने ₹1,200 तक की कमी हो सकती है।'
उन्होंने कहा, 'अगर योगदान अभी की तरह मौजूदा सीमा पर ही कैप रहता है, तो टेक-होम सैलरी पर तुरंत कोई असर नहीं पड़ेगा। इसलिए अंतिम नोटिफिकेशन और योगदान का नया ढांचा काफी अहम होगा।'
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