PM Vishwakarma Scheme: 3 साल में 30 लाख कारीगरों को मिला संबल, जानें बिना गारंटी 3 लाख का लोन और 15 हजार की टूलकिट पाने का तरीका

PM Vishwakarma Scheme: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'पीएम विश्वकर्मा योजना' के 3 साल पूरे होने पर 30 लाख लाभार्थियों का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। योजना के तहत 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगरों को बिना किसी गारंटी के मात्र 5% ब्याज पर ₹3 लाख तक का लोन, ₹15,000 का टूलकिट वाउचर और प्रतिदिन ₹500 का स्टाइपेंड दिया जा रहा है। जानिए आप इस योजना के लिए पात्रता और सीएससी से रजिस्ट्रेशन का पूरा प्रोसेस

अपडेटेड Sep 16, 2026 पर 5:08 PM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
वित्त वर्ष 2023-24 से 2027-28 के लिए इस केंद्रीय योजना के लिए ₹13,000 करोड़ का बजट रखा है

PM Vishwakarma Scheme: प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना को शुरू हुए 17 सितंबर 2026 को तीन साल पूरे हो जाएंगे। पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से 17 सितंबर 2023 को शुरू की गई इस योजना ने अपने 30 लाख लाभार्थियों के रजिस्ट्रेशन का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है।

'सम्मान, सामर्थ्य और समृद्धि' के सिद्धांत पर आधारित इस योजना के तहत देश के 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगरों को ट्रेनिंग, स्टाइपेंड, आधुनिक टूलकिट और बिना किसी गारंटी के रियायती दरों पर ₹3 लाख तक का लोन दिया जा रहा है।

आइए आपको बताते हैं कि पिछले 3 सालों में इस योजना ने क्या प्रगति की है और आम कारीगर इसका लाभ कैसे उठा सकते हैं।


पहले जानिए प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के बारे में?

सरकार ने वित्त वर्ष 2023-24 से 2027-28 के लिए इस केंद्रीय योजना के लिए ₹13,000 करोड़ का बजट रखा है। इसके तहत लाभार्थियों को ये सुविधाएं मिलती हैं:

आधिकारिक पहचान: रजिस्ट्रेशन और वेरीफिकेशन के बाद पीएम विश्वकर्मा प्रमाण पत्र और पहचान पत्र दिया जाता है।

फ्री ट्रेनिंग और स्टाइपेंड: 5-7 दिनों की बेसिक ट्रेनिंग और 15 दिनों या उससे अधिक की एडवांस्ड ट्रेनिंग दी जाती है। ट्रेनिंग के दौरान रोजाना ₹500 का स्टाइपेंड मिलता है।

₹15,000 का टूलकिट वाउचर: स्किल ट्रेनिंग पूरी करने वाले कारीगरों को आधुनिक औजार खरीदने के लिए ₹15,000 की सहायता राशि दी जाती है।

बिना गारंटी ₹3 लाख तक का लोन

पहली किश्त: बेसिक ट्रेनिंग के बाद ₹1 लाख तक का लोन (18 महीने की अवधि के लिए)।

दूसरी किश्त: पहला लोन चुकाने और डिजिटल लेनदेन अपनाने के बाद ₹2 लाख का अतिरिक्त लोन (30 महीने की अवधि के लिए)।

ब्याज दर: यह लोन मात्र 5% रियायती ब्याज दर पर मिलता है, जबकि बाकी 8% ब्याज सब्सिडी सरकार खुद वहन करती है।

डिजिटल और मार्केटिंग इंसेंटिव: हर डिजिटल ट्रांजेक्शन पर ₹1 का कैशबैंक (महीने में अधिकतम 100 ट्रांजेक्शन तक)। साथ ही उत्पादों की बिक्री के लिए Amazon, ONDC, GeM और दिल्ली हाट जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स से जोड़ा जाता है।

कौन उठा सकता है इसका लाभ?

आवेदक की उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए और वह 18 अधिसूचित पारंपरिक व्यवसायों (जैसे- सुथार/बढ़ई, लोहार, कुम्हार, मोची, राजमिस्त्री, नाई, दर्जी, अस्त्रकार आदि) में से किसी एक में हाथों और औजारों से काम करता हो। आवेदक का असंगठित क्षेत्र में स्व-रोजगार आधारित होना जरूरी है।

योजना का लाभ परिवार के केवल एक सदस्य (पति, पत्नी और अविवाहित बच्चे) को ही मिलेगा। सरकारी कर्मचारी या उनके परिवार के लोग इसके पात्र नहीं हैं। साथ ही पिछले 5 वर्षों में केंद्र की अन्य क्रेडिट योजनाओं (जैसे- मुद्रा/स्वनिधि) का लाभ लेने वाले तब तक पात्र नहीं होंगे, जब तक कि उन्होंने अपना पिछला लोन पूरी तरह चुका न दिया हो।

रजिस्ट्रेशन और चयन की प्रक्रिया

इस योजना में सीधा ऑनलाइन आवेदन व्यक्तिगत रूप से नहीं होता। आवेदक को केवल निकटतम कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से आवेदन करना होता है। इसमें तीन-स्तरीय वेरीफिकेशन की प्रक्रिया है:

स्तर 1: ग्राम पंचायत या शहरी स्थानीय निकाय (ULB) स्तर पर सत्यापन।

स्तर 2: जिला कार्यान्वयन समिति द्वारा सिफारिश।

स्तर 3: स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा अंतिम स्वीकृति।

स्वीकृति के बाद कारीगरों को उद्यम रजिस्ट्रेशन नंबर और प्रमाण पत्र देकर औपचारिक MSME इकोसिस्टम में शामिल किया जाता है।

पिछले 3 वर्षों का रिपोर्ट कार्ड

ट्रेनिंग व टूलकिट: 24.37 लाख से अधिक कारीगरों ने बेसिक स्किल ट्रेनिंग पूरी कर ली है और 18.16 लाख से अधिक कारीगरों को टूलकिट मिल चुकी है।

लोन वितरण: योजना के तहत अब तक ₹5,316 करोड़ के 6.19 लाख से अधिक लोन मंजूर किए जा चुके हैं।

बाजार और ई-कॉमर्स सपोर्ट: 30,000 से अधिक विश्वकर्मा लाभार्थियों को Amazon, Meesho, ONDC और GeM जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। दिल्ली हाट में आयोजित राष्ट्रीय प्रदर्शनी में कारीगरों ने रिकॉर्ड ₹2 करोड़ से अधिक की बिक्री की।

विशेष पहल: दिव्यांग विश्वकर्मा कारीगरों के लिए 'वन स्टेशन वन प्रोडक्ट' (OSOP) के तहत 14 राज्यों के रेलवे स्टेशनों पर स्टॉल दिए गए हैं। साथ ही भोपाल और चंडीगढ़ एयरपोर्ट्स और ताज/रेडिसन जैसे 5-स्टार होटलों में भी इनके उत्पादों के स्टॉल लगाए गए हैं।

अगर आप या आपके परिचय में कोई भी कारीगर इन 18 पारंपरिक दस्तकारी ट्रेडों से जुड़ा है, तो यह योजना बिना किसी बिचौलिए या गारंटी के अपने हुनर को बड़ा बिजनेस बनाने का बेहतरीन जरिया है। नजदीकी जन सेवा केंद्र (CSC) में जाकर आज ही इसके लिए पंजीकरण कराएं।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।