EPF Wage Ceiling Hike: केंद्रीय कैबिनेट का बड़ा फैसला! ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000 हुई सैलरी लिमिट, 51 लाख कर्मचारियों को सीधा फायदा

EPF Wage Ceiling Hike: मोदी कैबिनेट ने नौकरीपेशा वर्ग के लिए बड़ा ऐलान कर दिया है। ईपीएफओ के तहत अनिवार्य पीएफ की सैलरी लिमिट को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया गया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इससे करीब 51 लाख कर्मचारियों को सीधा फायदा मिलेगा

अपडेटेड Sep 16, 2026 पर 3:23 PM
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इसके लिए सरकार ₹11,339 करोड़ का खर्च उठाएगी

EPF Wage Ceiling Raised: नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार की कैबिनेट बैठक से बेहद बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एंप्लाइज प्रॉविडेंट फंड (EPF) के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 करने की ऐतिहासिक मंजूरी दे दी है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट प्रेस ब्रीफिंग में इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि इस कदम से देश के करीब 51 लाख कर्मचारियों को सीधा सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा। सरकार इस योजना पर ₹11,339 करोड़ का खर्च वहन करेगी। 12 साल के लंबे इंतजार के बाद हुए इस संशोधन से संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों की पेंशन और भविष्य निधि (PF) की बचत में बड़ा इजाफा होने वाला है।

कैबिनेट फैसले के 3 मुख्य बिंदु


लिमिट में बड़ा इजाफा: ईपीएफओ के तहत अनिवार्य पीएफ और पेंशन कवरेज के लिए बेसिक सैलरी + डीए (Basic Pay + DA) की सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया गया है।

51 लाख कर्मचारियों को फायदा: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, जो कर्मचारी ₹15,000 से अधिक वेतन होने के कारण अब तक अनिवार्य पीएफ दायरे से बाहर थे, उनमें से लगभग 51 लाख नए कर्मचारी अब सीधे इसके दायरे में आ जाएंगे।

सरकारी खजाने पर ₹11,339 करोड़ का बोझ: केंद्र सरकार कर्मचारियों के पेंशन फंड (EPS) में अपना अंशदान बढ़ाएगी, जिस पर सरकार का कुल खर्च ₹11,339 करोड़ आएगा।

क्या होती है वेज सीलिंग ?

वेज सीलिंग का आसान भाषा में मतलब 'अनिवार्य सरकारी नियम के लिए तय की गई अधिकतम सैलरी की सीमा' होता है। पीएफ के संदर्भ में यह वह दायरा है जो यह तय करता है कि कंपनी को किस सैलरी लिमिट तक के कर्मचारियों का पीएफ काटना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। जैसे अब तक यह सीमा ₹15,000 थी, जिसे बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया गया है। यानी अब ₹25,000 तक बेसिक सैलरी पाने वाले सभी कर्मचारी अनिवार्य रूप से पीएफ और पेंशन के दायरे में आएंगे और उनकी आधिकारिक कटौतियां इसी अधिकतम सीमा पर आंकी जाएंगी।

सैलरी और बचत पर क्या पड़ेगा असर?

इस फैसले का नौकरीपेशा कर्मचारियों की जेब और रिटायरमेंट फंड दोनों पर मिला-जुला असर पड़ेगा:

टेक-होम सैलरी में मामूली कमी: ₹15,000 से ₹25,000 के बीच बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों का पीएफ कटौतियां (12% की दर से) बढ़ेंगी। इससे हर महीने हाथ में आने वाली सैलरी थोड़ी कम हो सकती है।

रिटायरमेंट फंड और पेंशन होगी मजबूत: पीएफ खाते में कर्मचारी और कंपनी दोनों का अंशदान बढ़ने से लंबे समय में रिटायरमेंट कॉर्पस काफी बड़ा बनेगा। साथ ही पेंशन (EPS) की गणना के लिए अधिकतम सीमा बढ़ने से मासिक पेंशन में भी 67% तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

कंपनियों पर बढ़ेगा वित्तीय बोझ

पीएफ सीमा बढ़ने का असर कंपनियों के पेरोल बजट पर भी पड़ेगा। अब तक कंपनियां केवल ₹15,000 तक की बेसिक सैलरी पर 12% पीएफ अंशदान देने के लिए बाध्य थीं। नए नियम के बाद ₹25,000 तक की सैलरी वाले वर्कफोर्स के लिए कंपनियों को अपनी जेब से ज्यादा अंशदान देना होगा।

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