Kotak Institutional Equities के एमडी और को-हेड संजीव प्रसाद ने 16 फरवरी कहा कि 2 कैलेंडर ईयर के डबल डिजिट रिटर्न के बाद अब भारतीय इक्विटी मार्केट के निवेशकों को अगले कुछ महीनों के दौरान सपाट से मध्यम रिटर्न की ही उम्मीद करनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि 2022 में भारतीय इक्विटी बाजार की चाल अब तक सपाट रही है। निवेशक अमेरिका और दूसरे बड़े देशों के केंद्रीय बैंकों की तरफ से ब्याज दरों में बढ़ोतरी, पूर्वी यूरोप में जियोपॉलिटिकल तनाव और महंगे वैल्यूएशन जैसी चुनौतियों से जुझ रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि ग्लोबल जियोपॉलिटिकल स्थिति में कोई भी निगेटिव डेवलपमेंट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है जिससे महंगाई बढ़ने के साथ-साथ घरेलू बॉन्ड यील्ड में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इस तरह की स्थिति में बाजार में 10-15 फीसदी के करेक्शन से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
बता दें कि पिछले ढ़ाई महीनों में बॉन्ड यील्ड में 33 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसकी वजह महंगाई में बढ़ोतरी और सरकार की कर्ज लेने की बड़ी योजना रही है। Kotak Equities का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़त, मैक्रो इकोनॉमिक स्थितियों से जुड़ी चिंताओं और सरकारी बॉन्डों की यील्ड में बढ़ोतरी के चलते भारतीय इक्विटी मार्केट की रिस्क रिवॉर्ड रेश्यों स्थिति बिगड़ती नजर आई है।
Kotak Equities का यह भी मानना है कि भारतीय बाजार में इक्विटी वैल्यूएशन अक्टूबर 2021 के रिकॉर्ड हाई से 7 फीसदी की गिरावट के बावजूद अभी भी काफी महंगा है। Kotak Equities का यह अनुमान है कि वर्तमान वित्त वर्ष में निफ्टी के नेट प्रॉफिट में 36 फीसदी और अगले वित्त वर्ष में 19 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। संजीव प्रसाद का कहना है कि भारत में बॉन्ड यील्ड और अर्निंग यील़्ड के बीच का निगेटिव गैप बढ़ता नजर आ रहा है। यह अपने में चिंता का विषय है।