AI vs Human Resources: हम ऐसे युग में रह रहे हैं जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) लगातार तेजी से बढ़ रही है। AI का विकास हमारे जीवन को बहुत आसान बना सकता है लेकिन क्या यह मानव श्रम (Human Labour) के लिए खतरा है? कुछ कंपनियों के अनुसार जिन्होंने मानव संसाधनों (Human Resources) के बजाय AI को चुना है, उनका मानना है कि AI मानव कर्मचारियों की तुलना में कम लागत वाली और बेहद कुशल तरीके से काम करती है।
डुकन नामक एक बिजनेस स्टार्टअप ने 2022 में अपने 90 प्रतिशत कर्मचारियों को चैटबॉट से बदल दिया। पेमेंट एग्रीगेटर पेटीएम ने भी पिछले साल के अंत में 1000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। कारोबारियों का दावा है कि AI के परिणाम उनकी अपेक्षाओं से अधिक बेहतर रहे हैं। पेटीएम का दावा है कि वह AI का इस्तेमाल कर कर्मचारियों की लागत में 10% से 15% तक की कटौती कर सकता है। कुछ खबरों के अनुसार Google ने AI के पक्ष में लगभग 30,000 कर्मचारियों की छंटनी की भी योजना बनाई है।
इस बात पर बहस बढ़ रही है कि क्या AI एक दिन पूरी तरह से मानव संसाधनों (Human Resource) की जगह ले लेगा, और हालांकि कई उद्योगपतियों ने कहा है कि AI कोई खतरा पैदा नहीं करता है। सच कहा जाए तो मानव संसाधनों की अभी भी जरूरत है। उदाहरण के लिए यह सत्य है कि जब औद्योगिक संगठनों ने ऑटोमेशन का इस्तेमाल करना शुरू किया तो कई लोगों ने अपना रोजगार खो दिया। हालांकि, यह भी सच है कि उन ऑटोमेशन मशीनों को चलाने के लिए मनुष्यों की आवश्यकता थी। अंतर यह है कि जो काम पहले पांच व्यक्ति पूरा करते थे, वह काम अब एक व्यक्ति पूरा कर रहा है।
भर्ती और स्टाफिंग के लिए AI का उपयोग करनी वाली कंपनी ब्रिजएनटेक और हायर++ टेक्नोलॉजी के मैनेजिंग पार्टनर पीयूष राज का कहना है कि AI से नौकरियां जाएंगी लेकिन साथ ही, यह नौकरी के नए अवसर भी पैदा करेगा। अखौरी के मुताबिक लोगों को AI के लिए खुद को कुशल बनाना होगा और जो लोग ऐसा कर पाएंगे, वे खुद को पहले से बेहतर स्थिति में पाएंगे।
पीयूष का कहना है कि AI मुख्य रूप से उन कामों में मानवीय हस्तक्षेप को खत्म कर देगा जो बहुत दोहराने वाले होंगे। उदाहरण के लिए सुरक्षा जांच या इसी तरह की डिजाइनिंग आदि । उनका कहना है कि इससे उन लोगों को ज्यादा फायदा होगा जो अपने काम में कम आशाजनक हैं लेकिन AI पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है।