Retiring at 45: जल्दी रिटायर होना काफी आकर्षक लग सकता है लेकिन ऐसा फंड तैयार करना जो 30-40 वर्षों तक या उससे अधिक समय तक खर्चों को पूरा कर सके, इसके लिए सावधानीपूर्वक प्लानिंग की जरूरत होती है। मान लीजिए कि 34 साल की उम्र में आपकी हर महीने की सैलरी ₹1.5 लाख है और आप 45 साल की उम्र तक रिटायर होना चाहते हैं। ऐसे में आपके सामने पहली बड़ी चुनौती यह अनुमान लगाने की है कि भविष्य में आपके खर्च कितने होंगे, रिटायरमेंट के लिए कितने बड़े फंड की जरूरत पड़ेगी और इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर महीने कितना निवेश करना होगा।
Retiring at 45: ये है पूरा कैलकुलेशन
बजाज कैपिटल के ज्वाइंट चेयरमैन और एमडी संजीव बजाज का का कहना है कि 45 साल की उम्र में रिटायर होना एक बड़ा लक्ष्य है, लेकिन इसकी शुरुआत निवेश के विकल्प चुनने से नहीं, बल्कि यह समझने से होनी चाहिए कि 45 साल की उम्र में आपका खर्च कितना होगा। चूंकि आपकी उम्र 34 साल है तो आपके पास 11 साल हैं इस प्लानिंग के लिए और इन्हीं 11 साल में जिंदगी भर के लिए खर्चों का इंतजाम करना है। संजीव के मुताबिक इसमें दो चीजों का हल खोजना है- एक तो कम समय में पर्याप्त बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार करना और दूसरा यह सुनिश्चित करना कि वह फंड लंबे समय तक आपके खर्चों को पूरा कर सके।
एक आसान उदाहरण से समझिए इसे। मान लीजिए कि आपका हर महीने का खर्च अभी ₹60 हजार है और अगर महंगाई सालाना 6% की रफ्तार से बढ़े तो जब आप 45 साल के होंगे, तब यही खर्च बढ़कर लगभग ₹1.14 लाख प्रति माह हो सकता है। अब अगर आप रिटायरमेंट के दौरान हर साल अपने फंड का 3.5% निकालने का टारगेट रखते हैं, और महंगाई के हिसाब से निकाली जाने वाले पैसे को हर साल बढ़ाते हैं, तो 40 साल से अधिक के रिटायरमेंट के लिए आपको लगभग ₹3.9 करोड़ के फंड की जरूरत हो सकती है।
अब आता है असली गणित। 11 साल में इस ₹3.9 करोड़ के फंड को तैयार करने के लिए अगर मान लेते हैं कि निवेश की गई पूंजी पर सालाना 10% की रफ्तार से रिटर्न मिल रहा है तो आपको हर महीने लगभग ₹1.7 लाख निवेश करना होगा जोकि ₹1.5 लाख की मौजूदा इनकम से कम है। ऐसे में मौजूदा जीवनशैली और इनकम के हिसाब से 45 साल की उम्र में पूरी तरह रिटायर होना मुश्किल होगा। हालांकि इस कैलकुलेशन से आपको पता चल गया कि कहां क्या बदलाव करना है।
अगर अर्ली-रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाकर 45 साल से 50 वर्ष कर दी जाए तो हर महीने ₹1.15 लाख के निवेश में काम हो जाएगा। इसके अलावा कुछ और तरीके भी अपना सकते हैं जैसे कि रिटायरमेंट के बाद अनुमानित खर्चों को कम करना, सैलरी बढ़ने पर निवेश की रकम बढ़ाना और 45 साल की उम्र के बाद पूरी तरह काम छोड़ने के बजाय पार्ट-टाइम काम या कंसल्टिंग से कुछ कमाई जारी रखना।
कुछ सावधानी और रिस्क समझना भी जरूरी
जल्दी रिटायरमेंट की योजना बनाते समय स्वास्थ्य से जुड़े खर्चों पर खास ध्यान देना चाहिए क्योंकि आमतौर पर नौकरी छोड़ने के बाद कंपनी की तरफ से मिलने वाला हेल्थ इंश्योरेंस भी समाप्त हो जाता है। ऐसे में आपको अपनी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी और भविष्य में मेडिकल खर्चों के लिए अलग से योजना बनानी होगी।
एक और अहम रिस्क मार्केट में बिकवाली का दबाव है। अगर रिटायरमेंट के तुरंत बाद शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आ जाती है और आपको अपने खर्चों के लिए गिरते हुए निवेश से पैसा निकालना पड़ता है, तो आपके रिटायरमेंट फंड पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए कुछ वर्षों के खर्च के बराबर पैसे कम रिस्क वाले एसेट्स में रखने चाहिए। इससे जब शेयर मार्केट में हाहाकार मचा हो, तब जल्दबाजी में पैसे निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
अर्ली-रिटायरमेंट के लिए तीन काम सबसे पहले करना चाहिए-
तीन महीने तक के अपने वास्तविक खर्चों का रिकॉर्ड रखें। इससे आपको पता चलेगा कि हर महीने आपकी जरूरतों पर वास्तव में कितना पैसा खर्च होता है।
म्यूचुअल फंड, शेयर, पीपीएफ और ईपीएफ समेत अपने सभी मौजूदा निवेशों की पूरी लिस्ट बनाएं।
अपने मौजूदा फंड और लक्ष्य के बीच का अंतर निकालें। इससे पता चलेगा कि आपको कितना अतिरिक्त निवेश करना होगा और अपने लक्ष्य के लिए क्या बदलाव जरूरी हैं।
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।