दिल्ली जैसे महंगे शहर में घर खरीदना मिडिल क्लास परिवारों के लिए एक बड़ा फैसला होता है। किराया का दो रूम का घर 25,000 से 30,000 रुपये प्रति महीने के रेट से मिल जाता है। लेकिन, घर खरीदने के लिए लंबी अवधि का लोन लेना पड़ता है। सवाल है कि क्या किराए के बजाय घर खरीदना फायदेमंद है?
किराया देने से बेहतर है EMI भरना?
एक्सपर्ट आकाश जिंदल के मुताबिक, "अगर किसी व्यक्ति की इनकम स्टेबल है और वह हर महीने आसानी से होम लोन की EMI दे सकता है, तो उसे अपना घर खरीदने के बारे में सोचना चाहिए। हालांकि किराए पर रहने से EMI चुकाने का बोझ नहीं रहता है। लेकिन, घर खरीदने का फैसला सिर्फ किराए और EMI के आधार पर नहीं करना चाहिए। डाउन पेमेंट, इंटरेस्ट, प्रॉपर्टी की कीमत, मेंटेनेंस और दूसरे खर्चों को भी ध्यान में रखना ज़रूरी है।"
जिंदल का कहना है कि दिल्ली में प्रॉपर्टी की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में घर खरीदना लंबे समय में संपत्ति बनाने का एक तरीका हो सकता है। अगर कोई व्यक्ति ₹50 लाख में घर खरीदता है और भविष्य में उसकी कीमत बढ़ती है, तो उसे फायदा होता है। हालांकि, इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि प्रॉपर्टी की कीमत कितनी बढ़ेगी या कितने समय में बढ़ेगी। यह लोकेशन, हालत और मार्केट के ट्रेंड्स पर निर्भर करता है।
50 लाख का घर खरीदने के लिए कितनी होनी चाहिए सैलरी?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बैंक होम लोन देते समय कई बातों पर ध्यान देते हैं, जिसमें एप्लीकेंट की महीने की सैलरी, मौजूदा कर्ज़, क्रेडिट प्रोफ़ाइल और EMI चुकाने की क्षमता शामिल है। लोन एलिजिबिलिटी आम तौर पर महीने की इनकम के आधार पर तय की जाती है। अगर किसी व्यक्ति की सैलरी ₹1 लाख प्रति माह है, तो उसे ₹50 लाख तक का होम लोन मिल सकता है। लोन की रकम बैंक की शर्तों और एप्लीकेंट की फाइनेंशियल हालत के आधार पर अलग हो सकती है। डाउन पेमेंट के अलावा, घर खरीदने के लिए रजिस्ट्रेशन, स्टाम्प ड्यूटी और दूसरे खर्चों के लिए भी पैसे अलग रखने चाहिए।
घर खरीदने से पहले लीगल डॉक्युमेंट्स की जांच कितनी जरूरी?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, होम लोन के लिए अप्लाई करते समय, बैंक प्रॉपर्टी के लीगल डॉक्यूमेंट्स को वेरिफाई करता है। इससे खरीदार को घर की लीगैलिटी और ओनरशिप के बारे में जानकारी मिल जाती है। हालांकि, बैंक के वेरिफिकेशन के बावजूद, खरीदार को प्रॉपर्टी के डॉक्यूमेंट्स का इंडिपेंडेंट लीगल वेरिफिकेशन भी करवाना चाहिए।
(दिल्ली से शुभांगी तिवारी की रिपोर्ट)