Edelweiss Financial Services ने NCD (Non-Convertible Debentures) इश्यू लॉन्च किया है। वह इस इश्यू से 400 करोड़ रुपये जुटाएगी। कंपनी NCD रेगुजर जारी करती है। मार्च 2022 तक कंपनी का 15,500 करोड़ रुपये का आउटस्टैंडिंग डेब्ट लाइबिलिटी के तौर पर है। अगर आप भी बैंक एफडी से ज्यादा रिटर्न कमाना चाहते हैं तो इस इश्यू में निवेश कर सकते हैं।
NCD का इंटरेस्ट रेट सालाना 9 फीसदी से लेकर 10.45 फीसदी तक है। इस एनसीडी का मैच्योरिटी पीरियड 24 महीने से लेकर 120 महीने तक है। यानी, आप 2 साल से लेकर 10 साल तक के लिए NCD में निवेश कर सकते हैं। एनसीडी में निवेश करके आप बैंक एफडी से ज्यादा पैसा कमा सकते हैं। हालांकि, ये याद रहे कि इसके अपने फायदे और नुकसान होते हैं। एनसीडी में मिलने वाला ब्याज टेन्योर पर निर्भर करता है। अभी 2 साल पर 9 फीसदी का ब्याज मिल रहा है। और 10 साल के एनसीडी पर 10.45 फीसदी का ब्याज मिल रहा है।
टैक्स के बाद सिर्फ इतना मिलेगा फायदा
डिबेंचर पर मिलने वाले रिटर्न पर टैक्स लगता है। एक्सपर्ट के मुताबिक अगर टैक्स के बाद इंटरेस्ट देखा जाए तो आपको 8.1 फीसदी का ब्याज मिलेगा। आप अपने निवेश का 5 से 10 फीसदी डिबेंटर में निवेश कर सकते हैं। पहले ये जरूरी है कि आप इसके साथ जुड़े जोखिम को समझ लें। वरना, अगर आप इसमें न निवेश करना चाहें तो छोड़ भी सकते हैं।
CFA आदित्य शाह के मुताबिक इस पर मिलने वाला ब्याज एफडी की तुलना में बेहतर है लेकिन इसमें जोखिम एफडी की तुलना में अधिक होता है। सबसे ज्यादा ब्याज 10.45 फीसदी 10 साल के डिबेंचर्स पर मिल रहा है। इसमें लिक्विडिटी ऑप्शन कम है। उन्होंने कहा कि वह यही सलाह देना चाहेंगे कि AAA रेटिंग वाले बॉन्ड में ही क्लाइंट निवेश करें जिसमें जोखिम कम होता है। इस इश्यू को AAA रेटिंग नहीं मिली है। इससे इस इश्यू को लेकर रिस्क है। रेटिंग एजेंसियों CRISIL और Acuite ने निगेटिव आउटलुक के साथ इसे AA- रेटिंग दी है।
यह एनसीडी उन लोगों के लिए अट्रैक्टिव है, जो अपने पैसे की सुरक्षा के साथ रेगुलर इनकम चाहते हैं। यह स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होंगे। इसका मतलब है कि जरूरत पड़ने पर आपके पास तय समय से पहले अपने पैसे निकालने का ऑप्शन होगा। NCD 1,000 रुपये की फेस वैल्यू के साथ आते हैं और आप इसमें न्यूनतम 10,000 रुपये लगा सकते हैं। आप इन्हें अपने डीमैट अकाउंट से खरीद सकते हैं। NCD का रिटर्न फिक्स्ड होता है, लेकिन इसकी गारंटी नहीं होती है। यह इश्यू जारी करने वाली कंपनी की वित्तीय सेहत पर निर्भर करता है।