आठवें वेतन आयोग लगातार एंप्लॉयीज संगठनों, एंप्लॉयीज यूनियंस और इंस्टीट्यूशंस के प्रतिनिधियों से मिलकर उनका राय जानने की कोशिश कर रहा है। चंडीगढ़ में आयोग की दो दिन की मीटिंग 18 सितंबर को खत्म हो गई। आयोग अब 7 और 8 अक्तूबर को बेंगलुरु में मामले से जुड़े पक्षों की राय जानने की कोशिश करेगा।
NWA और PGIMER को मांगें पूरी होने की उम्मीद
चंडीगढ़ में आयोग की बैठक के बाद नर्सेज वेल्फेयर एसोसिएशंस (NWA) और पोस्ट ग्रेचुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) ने बताया कि उन्हें भरोसा है कि आयोग उनकी मांगें मान लेगा। नर्सों की एसोसिएशंस ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लॉयीज फेडरेशंस (AINEF) से जुड़ी हैं।
मांगें माने जाने पर 3 लाख से ज्यादा नर्सों को फायदा
AINEF से जुड़े नर्सों के एसोसिएशंस का मानना है कि आयोग अगर उनकी मांगें मान लेता है तो इससे केंद्र सरकार के हॉस्पिटल्स, पीजीआई, ईएसआईसी हॉस्पिटल्स, एम्स और दूसरे हेल्थकेयर इंस्टीट्यूशंस के 3 लाख से ज्यादा नर्सों को फायदा होगा। NWA ने कहा, "8वें वेतन आयोग और नर्सेज वेल्फेयर एसोसिएशंस की प्रतिनिधियों के बीच काफी अहम और फायदेमंद बातचीत आज पूरी हो गई।"
नर्सिंग अधिकारियों के लिए लेवल-10 एंट्री-लेवल पे की डिमांड
NWA की दलील है कि नर्सिंग अधिकारियों के लिए लेवल-10 एंट्री-लेवल पे की डिमांड जीएनएम से बीएससी नर्सिंग की अपग्रेडेड एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया के मुताबिक है। यह मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेल्फेयर की उस सिफारिश के भी मुताबिक है, जिसमें नर्सिंग अधिकारियों को मिलिट्री नर्सिंग सर्विस के बराबर रखने की बात कही गई है।
नर्सिंग अधिकारियों के लिए डेडिकेटेड नाइट ड्यूटी अलाउंस की भी मांग
उनकी मांगों में सभी नर्सिंग अधिकारियों के लिए डेडिकेटेड नाइट ड्यूटी अलाउंस और R1H1 मैट्रिक्स के तहत रिस्क एंड हार्डशिप अलाउन्स की मांगें शामिल हैं। उनकी दलील है कि नर्स का काम काफी चैलेंजिंग है। उन्होंने हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए कंप्रिहेंसिव टर्म इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की भी मांग की है।
एचआरए के कैलकुलेशन के लिए चंडीगढ़ को A1 सिटी में शामिल किया जाए
एसोसिएशन ने हाउस रेंट अलाउन्स (HRA) और ट्रांसपोर्ट अलाउन्स (TA) के कैलकुलेशन के मकसद से चंडीगढ़ को A1 सिटी की कैटेगरी में शामिल करने की भी मांग की है। इसके अलावा एसोसिएशन ने नर्सिंग अलाउन्स, ड्रेस अलाउन्स और स्पेशल अलाउन्स की भी मांग की है। एसोशिएशन ओल्ड पेंशन स्कीम की भी वापसी चाहता है।
सालाना इंक्रीमेंट 3 फीसदी से बढ़ाकर 5 फीसदी करने की भी मांग
PGIMR के नर्सों ने 3.25 फिटमेंट फैक्टर की भी मांग की है। सातवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था। एसोसिएशन का कहना है कि बढ़ती लिविंग कॉस्ट, हाउसिंग, हेल्थकेयर और एजुकेशन से जुड़े खर्चों को देखते हुए ज्यादा फिटमेंट फैक्टर जरूरी है। उनकी मांग एनुअल इंक्रीमेंट को 3 फीसदी से बढ़ाकर 5 फीसदी करने की भी है। उनकी दलील है कि अभी जितनी इंक्रीमेंट होती है, उससे बढ़ते खर्च से निपटना मुश्किल है।