Gold silver Price Today: MCX पर सोने-चांदी में आई तेजी की क्या वजह मान रहें जानकार, कहीं ये महज "बबल" तो नहीं

Gold silver Price Today: घरेलू बुलियन कीमतों में यह रिकवरी ग्लोबल स्तर पर सोने और चांदी की कीमतों में सुधार के कारण हो रही है, जिसमें कमजोर US डॉलर और ट्रेजरी यील्ड में कमी कीमती धातुओं को सपोर्ट कर रही है।

अपडेटेड Sep 18, 2026 पर 2:15 PM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
गौरव गर्ग ने कहा कि हालिया बिकवाली के बाद डॉलर और US ट्रेजरी यील्ड में कमी आने से सोना और चांदी दोनों में तेजी से रिकवरी हो रही है।

Gold  Silver Price Today: US फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर फैसले के बाद आई भारी उतार-चढ़ाव के बाद 18 सितंबर को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी की कीमतों में रिकवरी जारी रही और वे ऊपर कारोबार कर रही थीं। MCX पर अक्टूबर का सोना ₹1.53 लाख प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। जबकि चांदी 1.20% की बढ़त के साथ ₹2.41 लाख प्रति किलोग्राम पर थी ।

घरेलू बुलियन कीमतों में यह रिकवरी ग्लोबल स्तर पर सोने और चांदी की कीमतों में सुधार के कारण हो रही है, जिसमें कमजोर US डॉलर और ट्रेजरी यील्ड में कमी कीमती धातुओं को सपोर्ट कर रही है। हालांकि, आगे का आउटलुक फेड की ब्याज दर की चाल, करेंसी में उतार-चढ़ाव, कच्चे तेल की कीमतों और जियोपॉलिटिकल घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा।

सोने में रिकवरी क्यों हो रही है?


आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स की कमोडिटीज और करेंसी रिसर्च एनालिस्ट वेदिका नार्वेकर ने कहा कि हालिया सपोर्ट का कारण फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने के आसपास ट्रेजरी यील्ड में हुई तेज बढ़ोतरी के बाद उनमें आई कमी और तेल की कीमतों में गिरावट को बताया, जिससे महंगाई की कुछ चिंताएं कम हुई हैं।

नार्वेकर ने पिछले दो हफ्तों में उतार-चढ़ाव के बावजूद गोल्ड ETF में लगातार निवेश आने की ओर भी इशारा किया और कहा कि यह इस धातु के लिए लंबे समय के निवेश के नजरिए को सपोर्ट करता है। साथ ही, उन्होंने कहा कि इस साल कम से कम एक और बार ब्याज दरें बढ़ाने के फेड के संकेत अभी भी एक चुनौती बने हुए हैं।

चांदी में तेजी क्यों है?

लेमन (Lemonn) के रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि हालिया बिकवाली के बाद डॉलर और US ट्रेजरी यील्ड में कमी आने से सोना और चांदी दोनों में तेजी से रिकवरी हो रही है। उन्होंने कहा कि चांदी में ज्यादा मजबूत रिकवरी देखी गई है।

चांदी सोने की तुलना में ज्यादा उतार-चढ़ाव वाली हो सकती है क्योंकि निवेश की मांग के अलावा, इसका बड़े पैमाने पर औद्योगिक इस्तेमाल भी होता है। इसका मतलब है कि मॉनेटरी पॉलिसी और डॉलर के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी उम्मीदें भी इसकी कीमत पर असर डाल सकती हैं।

MCX कीमतों के लिए रुपये का क्या है मतलब?

भारतीय बुलियन कीमतों के लिए रुपये की चाल बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत अपना ज्यादातर सोना और चांदी आयात करता है।

गर्ग ने कहा कि US डॉलर के मुकाबले रुपया ₹95.94 के आसपास था। कमजोर रुपया MCX पर इंटरनेशनल बुलियन कीमतों में गिरावट के असर को कम कर सकता है, जबकि मजबूत रुपया घरेलू बढ़त को सीमित कर सकता है। Giottus.com के CEO विक्रम सुब्बुराज ने करेंसी के असर पर भी बात की। उन्होंने कहा कि रुपये में उतार-चढ़ाव की वजह से घरेलू कीमतें अंतरराष्ट्रीय कीमतों से अलग व्यवहार कर सकती हैं।

क्या त्योहारों की मांग देगी सहारा

जैसे-जैसे भारत में त्योहारों और शादियों का सीजन आगे बढ़ रहा है, फिजिकल डिमांड (असली सोने की मांग) एक और अहम कारक बन सकती है।

Aspect Bullion & Refinery के CEO दर्शन देसाई ने कहा कि हालिया गिरावट के बाद कुछ खरीदार बाजार में वापस आए हैं, हालांकि ऊंची कीमतों के कारण ग्राहक अभी भी सोच-समझकर खरीदारी कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि जैसे-जैसे त्योहारों का सीज़न जोर पकड़ेगा, फिजिकल डिमांड धीरे-धीरे मजबूत होगी, खासकर सिक्कों, बार और कम वजन वाली ज्वेलरी के लिए।

देसाई ने कहा कि सोने की कीमतें ब्याज दरों की उम्मीदों, अमेरिकी डॉलर, कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के अनुसार बदलती रहेंगी।

इन बातों पर ध्यान दें निवेशक

भारतीय निवेशकों के लिए, MCX में हालिया रिकवरी किसी एक वजह के बजाय वैश्विक और घरेलू कारकों का मिला-जुला असर है। अंतरराष्ट्रीय कीमत के लिए फेड की गाइडेंस और अमेरिकी यील्ड अहम बने हुए हैं, जबकि भारत में रुपया इन बदलावों के असर को बढ़ा या घटा सकता है।

गर्ग ने कहा कि कच्चे तेल की नरम कीमतें और स्थिर रुपया फिलहाल भारतीय कमोडिटीज के लिए कुछ राहत दे रहे हैं, हालांकि फेड की पॉलिसी, डॉलर और भू-राजनीतिक घटनाक्रम मुख्य कारक बने हुए हैं।

सुब्बुराज ने कहा कि इस तेज उछाल को बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए उन्होंने थोड़ी-थोड़ी खरीदारी करने की सलाह दी है। जबकि लेवरेज का इस्तेमाल करने वाले ट्रेडर्स को फ्यूचर्स में शामिल ज्यादा फाइनेंशियल रिस्क का ध्यान रखना चाहिए।

Gold vs silver: फेड की ब्याज दर में बढ़ोतरी, डॉलर और जियोपॉलिटिकल रिस्क का कीमतों पर असर क्यों

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।