EPF vs Mutual Funds: PF का पैसा निकालकर म्यूचुअल फंड में लगाना सही या गलत? जानें रिटायरमेंट के लिए क्या है बेस्ट
EPF vs Mutual Fund: EPFO का कहना है कि म्यूचुअल फंड में निवेश करना गलत नहीं है, लेकिन इसे EPF के विकल्प के रूप में देखना गलत है। ईपीएफ आपके रिटायरमेंट प्लानिंग की नींव होना चाहिए, जिससे आपको बुढ़ापे में एक निश्चित आय और सुरक्षा मिले
जानें EPFO ने क्यों दी पीएफ का पैसा न निकालने की सलाह?
EPFO Advice on EPF vs Mutual Fund: क्या आप भी अपने पीएफ का पैसा निकालकर म्यूचुअल फंड में लगाने की सोच रहे हैं? अगर हां, तो कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की इस सलाह को ध्यान से पढ़ना आपके लिए बेहद जरूरी है। हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए EPFO ने नौकरीपेशा कर्मचारियों को सख्त हिदायत दी है कि वे अपने रिटायरमेंट फंड को निकालकर म्यूचुअल फंड में न ट्रांसफर करें।
EPFO ने साफ किया कि 'समझदार को EPF काफी है' और दोनों वित्तीय विकल्पों का मकसद एक-दूसरे से पूरी तरह अलग है। आइए समझते हैं कि EPFO ने ऐसा क्यों कहा और पीएफ व म्यूचुअल फंड के बीच क्या मुख्य अंतर हैं।
EPFO ने क्यों दी पीएफ का पैसा न निकालने की सलाह?
EPFO के अनुसार, ईपीएफ और म्यूचुअल फंड दोनों दो अलग-अलग वित्तीय उद्देश्यों के लिए बने हैं:
EPF (सामाजिक सुरक्षा): यह एक वैधानिक सामाजिक सुरक्षा योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य रिटायरमेंट के बाद जीवन को आर्थिक रूप से सुरक्षित और स्थिर बनाना है।
म्यूचुअल फंड (वेल्थ क्रिएशन): यह एक स्वैच्छिक और बाजार से जुड़ा निवेश माध्यम है, जिसका उपयोग लंबी अवधि में संपत्ति बढ़ाने के लिए किया जाता है।
म्यूचुअल फंड में जहां बाजार के उतार-चढ़ाव का जोखिम होता है, वहीं ईपीएफ में सरकार द्वारा तय किया जाने वाला ब्याज मिलता है जो फिलहाल 8.25% है। यह सुरक्षित और निश्चित रिटर्न की गारंटी देता है।
केवल रिटायरमेंट फंड नहीं, EPF में मिलते हैं ये 3 बड़े फायदे
EPFO ने बताया कि पीएफ खाता सिर्फ बचत का जरिया नहीं है, बल्कि यह तीन स्तर की सुरक्षा देता है जो किसी भी म्यूचुअल फंड में नहीं मिलती:
एंप्लॉयर का योगदान: म्यूचुअल फंड में सिर्फ आपका पैसा लगता है, जबकि ईपीएफ में कर्मचारी और कंपनी दोनों 12-12% का योगदान करते हैं।
पेंशन का लाभ: रिटायरमेंट के बाद पात्र कर्मचारियों को आजीवन कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत मासिक पेंशन मिलती है।
मुफ्त इंश्योरेंस: कर्मचारी जमा लिंक बीमा योजना (EDLI) के तहत सदस्य की असामयिक मृत्यु होने पर परिवार को ₹7 लाख तक का जीवन बीमा कवर बिल्कुल मुफ्त दिया जाता है।
EPF vs Mutual Funds: ये है मुख्य अंतर
म्यूचुअल फंड को विकल्प नहीं, 'पूरक' बनाएं
EPFO का कहना है कि म्यूचुअल फंड में निवेश करना गलत नहीं है, लेकिन इसे EPF के विकल्प के रूप में देखना गलत है। ईपीएफ आपके रिटायरमेंट प्लानिंग की नींव होना चाहिए, जिससे आपको बुढ़ापे में एक निश्चित आय और सुरक्षा मिले।
अगर आपके पास अतिरिक्त बचत है और आप थोड़ा जोखिम ले सकते हैं, तो आप अलग से म्यूचुअल फंड में एसआईपी (SIP) शुरू कर सकते हैं। लेकिन पीएफ के सुरक्षित पैसे को जोखिम में डालना समझदारी नहीं है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।