ज्यादा पेंशन के लिए EPFO में अप्लाई करने जा रहे हैं? पहले इस सर्कुलर के बारे में ठीक से जान लीजिए

EPFO ने पिछले महीने अपनी वेबसाइट पर ज्यादा पेंशन के लिए अप्लाई करने के वास्ते एक लिंक एक्टिवेट किया था। इसके बाद कई अप्लिकेंट्स ने शिकायत की थी कि ईपीएफओ ऐसी जानकारियां मांग रहा है, जिसे देना मुश्किल है। ऐसे में उन्हें अपने अप्लिकेशन रिजेक्ट होने का डर सता रहा था

अपडेटेड Apr 25, 2023 पर 1:32 PM
EPFO ने आवेदकों की शिकायतों को ध्यान में रख नया सर्कुलर 23 अप्रैल को जारी किया है।

क्या आपने EPFO में ज्यादा पेंशन के लिए अप्लाई कर दिया है? अगर नहीं किया है तो आपको EPFO के नए सर्कुलर के बारे में जान लेना जरूरी है। दरअसल, EPFO ने पिछले महीने अपनी वेबसाइट पर ज्यादा पेंशन के लिए अप्लाई करने के वास्ते एक लिंक एक्टिवेट किया था। इस लिंक को लेकर कई तरह की शिकायतें मिली थीं। कहा गया था कि इसमें ऐसे सवाल पूछे गए हैं जिसका जवाब देने में अप्लिकेंट्स को मुश्किल आ रही है। इस बारे में कोर्ट में भी शिकायत पहुंची थी। उसके बाद EPFO ने इन मसलों को ध्यान में रख एक सर्कुलर जारी किया। इससे पहले यह जान लेना जरूरी है कि ज्यादा पेंशन के लिए अप्लाई करने की अंतिम तारीख 23 मई है। यह सर्कुलर 23 अप्रैल को जारी किया गया है। आइए जानते हैं इस सर्कुलर में क्या कहा गया है।

सर्कुलर में क्या कहा गया है?

ईपीएफओ के सर्कुलर में तीन अहम मसलों के बारे में बताया गया है। इनमें पहला है, ज्वाइंट अप्लिकेशन फॉर्म सब्मिट करने के बाद क्या होगा? दूसरा है, ज्वाइंट अप्लिकेशन फॉर्म में कोई गलती रह जाती है तो क्या होगा? तीसरा, अगर एंप्लॉयर ज्वाइंट अप्लिकेशन फॉर्म एप्रूव नहीं करता है तो क्या होगा? आइए समझने की कोशिश करते हैं कि इन तीन स्थितियों को लेकर EPFO की तरफ से क्या बताया गया है।


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अप्लिकेशन सब्मिट होने के बाद क्या होगा?

सर्कुलर में कहा गया है कि ज्वाइंट अप्लिकेशन फॉर्म सब्मिट होने के बाद ईपीएफओ का फील्ड अफसर इसकी जांच करेगा। उसमें भरी गई सभी जानकारियां पूरी पाई जाती हैं तो उसे ईपीएफओ के पास उपलब्ध डेटा से मैच कराया जाएगा। डेटा को वेरिफाय करने के बाद ईपीएफओ ड्यू अमाउंट का कैलकुलेशन करेगा। उसके बाद ड्यू अमाउंट ट्रांसफर या डिपॉजिट करने के लिए ऑर्डर दिया जाएगा।

अप्लिकेशन में गलती होने पर क्या होगा?

कुछ मामलों में अप्लिकेशन फॉर्म की जांच के दौरान एंप्लायर और एंप्लॉयी की तरफ से दी गई जानकारी और ईपीएफओ के डेटा में अंतर हो सकता है। इसका मतलब है कि एप्लिकेशन फॉर्म की जानकारी और ईपीएफओ के डेटा में मिसमैच हो सकता है। सर्कुलर में बताया गया है कि ऐसी स्थिति में एंप्लॉयी और एंप्लॉयरल को इसके बारे में जानकारी दी जाएगी। उन्हें सही जानकारी देने के लिए एक महीना का समय दिया जाएगा।

एंप्लॉयल के अप्लिकेशन एप्रूव नहीं करने पर क्या होगा?

यह भी हो सकता है कि ज्वाइंट अप्लिकेशन फॉर्म को किसी वजह से एंप्लॉयर की तरफ से एप्रूव नहीं किया जाए। ऐसी स्थिति के बारे में सर्कुलर में कहा गया है कि तुरंत अप्लिकेशन फॉर्म को रिजेक्ट नहीं किया जाएगा। इससे पहले एप्लॉयर को अतिरिक्त प्रूफ देने या किसी तरह की गलती को ठीक करने का मौका दिया जाएगा। इसके बारे में एंप्लॉयीज और पेंशनर्स को जानकारी दी जाएगी। एप्लॉयर को सही जानकारी देने या गलती को ठीक करने के लिए एक महीना का समय दिया जाएगा।

ईपीएफओ के सर्कुलर से अप्लिकेंट्स के मन का डर दूर हो गया है। उन्हें इस बात का डर था कि अगर अप्लिकेशन फॉर्म में किसी तरह की गलती पाई जाती है या कोई जानकारी अधूरी रह जाती है तो उनके अप्लिकेशन फॉर्म को रिजेक्ट कर दिया जाएगा। ईपीएफओ ने यह साफ कर दिया है कि अप्लिकेशन फॉर्म में किसी तरह की कमी जांच के दौरान पाए जाने पर उसे दूर करने का मौका अप्लिकेंट को दिया जाएगा।

एप्लिकेंट के पास शिकायत करने का मौका होगा

अगर एंप्लॉयी या पेंशनर की किसी तरह की शिकायत है तो वह उसे EPFiGMS पर रजिस्टर कर सकता है। अपने ड्यू कंट्रिब्यूशन के पेमेंट के बाद ही शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। ईपीएफओ की तरफ से ऐसी सभी शिकायतों का निपटारा किया जाएगा। इसे नॉमिनेटेड ऑफिसर के लेवल पर किया जाएगा। ऐसी शिकायतों के निपटारे पर ईपीएफओ के रीजनल और जोनल ऑफिसर की नजर रहेगी।

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