EPFO: नियोक्ता को हर महीने कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) के लिए सैलरी से काटे गए पैसों को कर्मचारी के पीएफ खाते में जमा करना होता है। मौजूदा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के नियमों के आधार पर कर्मचारी और नियोक्ता हर महीने पीएफ खाते में बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते का 12 प्रतिशत योगदान करते हैं। नियोक्ता के हिस्से में से 8.33 प्रतिशत कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जाता है और बाकी 3.67 प्रतिशत पीएफ खाते में जमा किया जाता है। ईपीएफओ नियमित रूप से ग्राहकों को एसएमएस अलर्ट के माध्यम से उनके पीएफ खातों में हर महीने जमा होने वाले पैसे के बारे में अपडेट करता रहता है। अगर कंपनी आपके पीएफ खाते में पैसा जमा नहीं करती तो क्या होता है।
15 दिन में कंपनी को जमा करना होता है पीएफ अंशदान
कर्मचारी ईपीएफओ पोर्टल पर लॉग इन करके हर महीने पीएफ खाते में जमा पैसे को चेक कर सकते हैं। नियोक्ता को पिछले महीने के वेतन देने के 15 दिनों के अंदर ईपीएफ अंशदान जमा करना होता है। हालांकि, कई नियोक्ता कई बार पीएफ राशि जमा करने में फेल हो जाते हैं तो उन्हें चार्ज देना होता है।
कर्मचारी कर सकते हैं शिकायत
ऐसे मामलों में कर्मचारी अपने वेतन से पीएफ योगदान के लिए पैसा काटने और फिर जमा न करने पर कई कदम उठा सकते हैं। कर्मचारी पीएफ अंशदान जमा न करने पर नियोक्ता के खिलाफ ईपीएफओ में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
शिकायत दर्ज होने के बाद नियामक संस्था नियोक्ता के खिलाफ पूछताछ करती है। यदि जांच में यह पाया गया कि ईपीएफ का पैसा काट लिया गया है लेकिन जमा नहीं किया गया है तो तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ईपीएफओ अधिकारी ईपीएफ कटौती को देर से जमा करने पर ब्याज भी लगा सकते हैं और वसूली कार्रवाई शुरू कर सकते हैं।
पीएफ जमा नहीं करने पर कंपनी को देना होता है चार्ज
अगर कोई कंपनी दो महीने तक कर्मचारियों का PF का पैसा जमा नहीं करती है तो उसे सालाना 5 फीसदी की दर से एरियर देना होगा। अगर कोई कंपनी दो महीने से ज्यादा लेकिन 4 महीने से कम समय तक के लिए कर्मचारियों के PF का पैसा जमा नहीं करती है तो उसे सालाना 10 फीसदी के हिसाब से एरियर देना होगा। वहीं अगर कोई कंपनी चार महीने से लेकर 6 महीने तक PF पेमेंट पर डिफॉल्ट करती है तो उसे सालाना 15 फीसदी की दर से एरियर देना होगा। जबकि 6 महीने से ज्यादा लंबे समय तक PF ना जमा करने वाली कंपनियों को एनुअली 25 फीसदी तक चार्ज देना होगा।