EPFO की ज्यादा पेंशन स्कीम में अप्लाई करने वाले लोगों के लिए अच्छी खबर है। ईपीएफओ ने ज्यादा पेंशन स्कीम में कंट्रिब्यूशन से जुड़े सब्सक्राइबर्स की उलझन दूर करने के लिए कई बातें स्पष्ट करने की कोशिश की है। उसने 1.16 फीसदी एडिशनल कंट्रिब्यूशन के बारे में सफाई दी है। यह कंट्रिब्यूशन ज्यादा पेंशन के लिए अप्लाई करने वाले ऐसे मेंबर्स पर लागू होता है, जिनकी बेसिक सैलरी (Basic Salary) 15,000 रुपये से ज्यादा है। इसे एप्लॉयर के कंट्रिब्यूशन में जोड़ दिया जाएगा, जिससे वह बढ़कर 9.49 फीसदी हो जाएगा। इससे एप्लॉयीज को अपने अतिरिक्त कंट्रिब्यूशन का अंदाजा लगाने में मदद मिलेगी। वे अपने रिटर्न का भी अंदाजा लगा सकेंगे।
1.6 फीसदी कंट्रिब्यूशन के नियम
ईपीएफओ के स्पष्टीकरण के बाद यह साफ हो गया है कि एंप्लॉयीज को बेसिक सैलरी 15,000 रुपये से ज्यादा होने पर अब ज्यादा पेंशन के लिए अतिरिक्त 1.6 फीसदी कंट्रिब्यूशन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह एंप्लॉयर के कुल 12 फीसदी कंट्रिब्यूशन में से आएगा। इसकी वजह यह है कि ईपीएस में एंप्लॉयर के कंट्रिब्यूशन को 8.33 फीसदी रखा गया है। लेकिन, बेसिक सैलरी 15,000 रुपये से ज्यााद होने पर एंप्लयॉयर के ईपीएस कंट्रिब्यूशन को 8.33 से बढ़ाकर 9.49 फीसदी कर दिया गया है।
1 सितंबर, 2014 से पहले के पीरियड के लिए भी कंट्रिब्यूशन
उपर्युक्त नियम न सिर्फ भविष्य में होने वाले कंट्रिब्यूशन पर लागू होगा बल्कि यह 1 सितंबर, 2014 से कंट्रिब्यूशन में कुल कमी (Shortfall) की भरपाई पर भी लागू होगा। ज्यादा पेंशन के लिए अप्लाई करने वाले सब्सक्राइबर को बेसिक सैलरी 15,000 रुपये होने पर 8.33 फीसदी के ज्यादा रेट से बकाया कंट्रिब्यूशन करना होगा। बेसिक सैलरी 15,000 रुपये से ज्यादा होने पर उसे 9.49 फीसदी के रेट से बकाया कंट्रिब्यूशन करना होगा। साथ ही दोनों तरह के एंप्लॉयीज को उस पर इंटरेस्ट का पेमेंट भी करना होगा।
पहले की अवधि के बकाया कंट्रिब्यूशन के कैलकुलेशन के लिए 1 सितंबर, 2014 से पहले के पीरियड के लिए एंप्लॉयर का रिवाइज्ड मैक्सिमम एंप्लॉयर कंट्रिब्यूशन एक्चुअल सैलरी के 8.33 फीसदी के हिसाब से होगा। ईपीएस के बकाया कंट्रिब्यूशन को ईपीएफ अकाउंट में पर्याप्त बैलेंस होने पर उससे ट्रांसफर किया जा सकता है। अगर बैलेंस पर्याप्त नहीं है तो उसे मेंबर के बैंक अकाउंट से डिपॉजिट करना होगा।
पेंशन किन बातों पर निर्भर करेगा?
ईपीएफओ के स्पष्टीकरण के बाद यह साफ हो गया है कि EPS 95 के तहत पेंशन अमाउंट सर्विस के पीरियड और पिछले पांच साल की औसत सैलरी पर निर्भर करेगा। अगर पूरे सर्विस पीरियड के दौरान कंट्रिब्यूशन एक समान रहता है तो इस बात से फर्क नहीं पड़ेगा कि आपने कब नौकरी शुरू की और कब रिटायर हुए। लेकिन, 1 सितंबरस 2014 से कंट्रिब्यूशन रेट बढ़ जाने से मेंबर्स को उतने ही पेंशन के लिए ज्यादा रेट से कंट्रिब्यूशन करना होगा।