EPS Pension: अगर आप नौकरी करते हैं और आपकी सैलरी से EPS यानी एंप्लॉयीज पेंशन स्कीम में योगदान जाता है, तो रिटायरमेंट के बाद पेंशन मिल सकती है। लेकिन यह पेंशन आपकी आखिरी सैलरी देखकर तय नहीं होती।

EPS Pension: अगर आप नौकरी करते हैं और आपकी सैलरी से EPS यानी एंप्लॉयीज पेंशन स्कीम में योगदान जाता है, तो रिटायरमेंट के बाद पेंशन मिल सकती है। लेकिन यह पेंशन आपकी आखिरी सैलरी देखकर तय नहीं होती।
इसमें मुख्य रूप से दो चीजें देखी जाती हैं। पहली, आपकी पेंशन योग्य सैलरी और दूसरी, पेंशन योग्य सर्विस। इसके अलावा पेंशन कब शुरू करते हैं, इसका भी असर पड़ता है।
पेंशन का हिसाब कैसे होता है?
EPS की पेंशन निकालने का एक तय फॉर्मूला है।
मासिक पेंशन = (पेंशन योग्य वेतन × पेंशन योग्य सर्विस) ÷ 70
पेंशन योग्य वेतन आमतौर पर नौकरी के आखिरी 60 महीनों की औसत EPS सैलरी होती है। वहीं पेंशन योग्य सर्विस का मतलब है कि आपने कितने साल EPS में योगदान किया। मासिक पेंशन के लिए आमतौर पर कम से कम 10 साल की पेंशन योग्य सर्विस जरूरी होती है।
एक आसान उदाहरण
मान लीजिए आपकी पेंशन योग्य सैलरी ₹15,000 है। आपने 20 साल नौकरी की है। फॉर्मूले के हिसाब से:
₹15,000 × 20 ÷ 70 = करीब ₹4,286 महीने
यानी इस उदाहरण में आपकी मासिक EPS पेंशन करीब ₹4,286 बनेगी। हालांकि, 20 साल या उससे ज्यादा की पेंशन योग्य सर्विस पूरी करने पर कैलकुलेशन में अतिरिक्त 2 साल जोड़ने का नियम भी है। इसलिए वास्तविक कैलकुलेशन आपकी पात्रता और लागू EPS नियमों के हिसाब से होगी।
सैलरी ₹50,000 है तो?
कुछ लोगों को लगता है कि सैलरी ₹50,000 है तो पेंशन भी इसी पर बनेगी। यही बात सबसे ज्यादा समझना जरूरी है। अगर आपने ज्यादा पेंशन का विकल्प नहीं चुना है, तो सामान्य EPS व्यवस्था में पेंशन योग्य वेतन पर ₹15,000 महीने की सीमा लागू होती है।
मान लीजिए आपकी वास्तविक सैलरी ₹50,000 है। लेकिन EPS के लिए लागू वेतन ₹15,000 है। ऐसे में सामान्य फॉर्मूले में ₹50,000 की जगह ₹15,000 लिया जाएगा। यानी सिर्फ ज्यादा सैलरी होने से EPS पेंशन अपने आप ज्यादा नहीं हो जाती।
ज्यादा पेंशन का विकल्प चुनने पर क्या होगा?
कुछ पात्र सदस्य ज्यादा पेंशन का विकल्प चुन सकते हैं। ऐसे मामलों में नियमों के तहत वास्तविक वेतन के आधार पर पेंशन योग्य वेतन की गणना हो सकती है।
लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें पूरी करनी होती हैं। इसलिए सिर्फ यह मान लेना सही नहीं है कि ज्यादा सैलरी वाले हर कर्मचारी को वास्तविक सैलरी के आधार पर EPS पेंशन मिलेगी।
50 साल में पेंशन लेने पर क्या होगा?
EPS में पात्र कर्मचारी 50 साल की उम्र से पेंशन शुरू कर सकता है। लेकिन यहां एक नुकसान है। 58 साल सामान्य पेंशन उम्र मानी जाती है। इससे पहले पेंशन शुरू करने पर रकम कम हो जाती है। हर साल पहले पेंशन लेने पर 4% की कटौती होती है।
अब मान लीजिए 58 साल की उम्र में आपकी पेंशन ₹5,000 महीने बनती है। अगर आप 57 साल में पेंशन शुरू करते हैं, तो करीब 4% कम रकम मिलेगी। यानी पेंशन करीब ₹4,800 रह सकती है।
अगर 50 साल में शुरू करते हैं, तो कटौती कई सालों की होगी। ऐसे में मासिक पेंशन काफी कम हो सकती है। इसलिए सिर्फ यह देखकर पेंशन शुरू करना सही नहीं है कि 50 साल में पैसा मिलना शुरू हो जाएगा।
58 के बाद पेंशन लेने पर फायदा
इसका उल्टा फायदा भी मिल सकता है। अगर आप चाहें तो 58 साल के बाद पेंशन शुरू कर सकते हैं। लागू नियमों के तहत पेंशन को 60 साल की उम्र तक टाला जा सकता है। हर साल देरी करने पर पेंशन में 4% की बढ़ोतरी होती है।
मान लीजिए 58 साल की उम्र में आपकी पेंशन ₹5,000 है। अगर आप इसे एक साल टालते हैं, तो करीब 4% ज्यादा पेंशन मिल सकती है। यानी रकम करीब ₹5,200 हो सकती है। दो साल टालने पर बढ़ोतरी और हो सकती है।
20 साल की सर्विस पर एक और फायदा
अगर आपकी पेंशन योग्य सर्विस 20 साल या उससे ज्यादा है, तो EPS में कैलकुलेशन के लिए अतिरिक्त 2 साल जोड़ने का प्रावधान है।
उदाहरण के लिए, आपकी सर्विस 20 साल है। तो पेंशन की गणना में 22 साल की सर्विस मानी जा सकती है। इससे पेंशन की रकम सामान्य 20 साल के हिसाब से थोड़ी ज्यादा हो सकती है। हालांकि, यह भी लागू EPS नियमों और आपकी पात्रता पर निर्भर करता है।
पेंशन पर सबसे ज्यादा असर किन चीजों का?
अगर आसान भाषा में समझें तो EPS पेंशन में ये चीजें सबसे अहम हैं:
इसलिए EPS में सिर्फ आखिरी सैलरी देखकर अपनी रिटायरमेंट पेंशन का अंदाजा लगाना ठीक नहीं है। सैलरी, सर्विस और पेंशन शुरू करने की उम्र, तीनों मिलकर आपकी मासिक पेंशन तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।
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