दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने कोविड की महामारी के समय इंटरेस्ट रेट काफी घटा दिए थे। अमेरिका में Federal Reserve ने इंटरेस्ट रेट को जीरो कर दिया था। यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) का डिपॉजिट फैसिलिटी रेट निगेटिव हो गया था। RBI ने भी इंटरेस्ट रेट्स घटाए थे। लेकिन, उसने इसे घटाकर सिर्फ 4 फीसदी पर लाया था। इससे इंटरेस्ट रेट स्ट्रक्चर को झटका नहीं लगा। दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने फाइनेंशियल सिस्टम में पैसे डाले थे। इस पैसे को हेलीकॉप्टर मनी नाम दिया गया। यह बिल्कुल वैसा ही था जब प्राकृतिक आपदा की स्थिति में हेलीकॉप्टर आसमान से प्रभावित लोगों को राहत देते हैं।
दुुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने बढ़ाएं इंटरेस्ट रेट्स
कोरोना की महामारी खत्म होने पर जब हालात सामान्य हो गए तो इनफ्लेशन ने सिर उठाना शुरू कर दिया। इसे काबू में करने के लिए केंद्रीय बैंकों ने इंटरेस्ट रेट बढ़ाने शुरू किए। अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़कर 4.5-4.75 फीसदी तक पहुंच गया। यूरोपीय सेंट्रल बैंक की डिपॉजिट फैसिलिटी 3 फीसदी तक पहुंच गई है। RBI का रेपो रेट 4 फीसदी से बढ़कर 6.5 फीसदी पहुंच गया है। इंडिया में रेपो के 4 से बढ़कर 6.5 फीसदी तक जाने से कोई बड़ी दिक्कत देखने को नहीं मिली।
अमेरिका और यूरोप में यील्ड बढ़ने से दिक्कत
लेकिन, अमेरिका और यूरोप में स्थिति बहुत अलग है। इंटरेस्ट रेट बढ़ने से बॉन्ड यील्ड बढ़नी शुरू हो गई, जिससे बैंकों को बॉन्ड में निवेश पर लॉस होना शुरू हो गया। इससे इंटरेस्ट रेट में और इजाफे की संभावना पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। अब मुश्किल यह है कि इनफ्लेशन अब भी हाई लेवल पर है तो क्या केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ाने के सिलसिले पर ब्रेक लगाएंगे? दरअसल, इनफ्लेशन को काबू में करना केंद्रीय बैंकों की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक है।
इनफ्लेशन का सही अंदाजा नहीं लगा सका Federal Reserve
अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve को दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों का अगुआ माना जाता है। सभी देशों के केंद्रीय बैंक की निगाहें फेडरल रिजर्व पर लगी रहती हैं। 2021 में जब इनफ्लेशन बढ़ना शुरू हुआ तो फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने कहा था कि यह थोड़े समय के लिए है। जब तक फेडरल रिजर्व यह समझ पाता कि इनफ्लेशन की समस्या जल्द खत्म होने वाली नहीं है तब तक यह काफी ऊपर चला गया था। उसके बाद मार्च 2022 से फेड ने इंटरेस्ट रेट बढ़ाना शुरू किया। तब से इसमें वृद्धि का सिलसिला जारी है।
22 मार्च को फेड लेगा इंटरेस्ट रेट पर फैसला
22 मार्च को फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (FOMC) के नतीजे आएंगे। इंडिया में देर रात इसके बारे में पता चलेगा। Silicon Valley Bank के डूबने से पहले यह माना जा रहा था कि फेडरल रिजर्व 22 मार्च को इंटरेस्ट रेट 50 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ाने का फैसला ले सकता है। लेकिन, अब मार्केट इंटरेस्ट रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स या किसी तरह की वद्धि नहीं होने का अनुमान लगा रहा है। फेडरल बैंक फ्यूचर के लिए किस तरह का अनुमान जताता है, उस पर भी निगाहें लगी रहेंगी।
इंडिया में इनवेस्टर्स को क्या करना चाहिए?
इधर, इंडिया में RBI की मॉनेटरी पॉलिसी 6 अप्रैल को आने वाली है। MPC की बैठक 3 अप्रैल को शुरू होगी। इसके नतीजें 6 अप्रैल को आएंगे। बताया जाता है कि इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का RBI का फैसला इंडियन इकोनॉमी से जुड़े डेटा पर निर्भर करेगा। लेकिन, यह तय है कि उसके फैसले पर Federal Reserve के 22 मार्च के फैसले का भी असर पड़ेगा। शेयर मार्केट के निवेशकों को कोई बड़ा फैसला लेने से पहले RBI की मॉनेटरी पॉलिसी का इंतजार करना चाहिए। उससे बाद आगे की तस्वीर कुछ हद तक साफ हो जाएगी।