RBI: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मंगलवार को जारी अपने मासिक बुलेटिन में कहा कि बैंकों के बीच डिपॉजिट बेस बढ़ाने के लिए बैंक एक बार फिर ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं। बैंकों के बीच भी ब्याज दरें बढ़ाने का कंपिटिशन भी बढ़ा है। मई 2022 में केंद्रीय बैंक आरबीआई के रेपो दर में 250 आधार अंकों (BPS) की बढ़ोतरी के बाद बैंकों के बीच ब्याज दरें बढ़ाने की होड़ सी लग गई है।
अप्रैल में एक बार फिर बढ़ सकती हैं ब्याज दरें
अमेरिकी बैंकिंग सिस्टम में महंगाई कम होने के बाद भी विश्लेषकों का मानना है कि आरबीआई अप्रैल में 25 बीपीएस यानी रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है। अगले महीने रेपो रेट 6.75% फीसदी हो सकती है। 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी के बाद ये 2.75 फीसदी हो सकती है।
RBI ने अपने बुलेटिन में कहा है कि एफडी के रिटर्न में सुधार हुआ है। इसके कारण बैंकों में जमा बढ़ी है। सालाना Year on Year आधार पर एफडी में जमा में 13.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। जबकि, करेंट और सेविंग अकाउंट में क्रमशः 4.6 प्रतिशत और 7.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, ये भी कहा गया कि मंहगाई बढ़ने के कारण इन्पुट कॉस्ट भी बढ़ी है।
आरबीआई के रेपो रेट में लगातार छह बार बढ़ोतरी किए जाने के बाद बैंकों ने सभी निवेश यानी एफडी पर ब्याज दरें बढ़ा दी हैं। पब्लिक सेक्टर बैंकों की तुलना में छोटे फाइनेंस बैंक आकर्षक ब्याज दर दे रहे हैं। BankBazaar के डेटा के मुताबिक टॉप 10 बैंकों की औसत ब्याज दर 3 साल में मैच्योर होने वाली एफडी पर 7.5% है।