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गणेश चतुर्थी पर होगा 10,000 करोड़ रुपये का कारोबार, भारतीय प्रोडक्ट की मांग बढ़ी

Ganesh Chaturthi: गणेश चतुर्थी जो भारत में बड़े स्तर पर मनाया जाने वाला हिंदू त्योहार है। कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के एक अनुमान अनुसार इस त्यौहार के दौरान 25,000 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होने की उम्मीद है

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 06, 2024 पर 6:33 PM
गणेश चतुर्थी पर होगा 10,000 करोड़ रुपये का कारोबार, भारतीय प्रोडक्ट की मांग बढ़ी
गणेश चतुर्थी जो भारत में बड़े स्तर पर मनाया जाने वाला हिंदू त्योहार है।

Ganesh Chaturthi: गणेश चतुर्थी जो भारत में बड़े स्तर पर मनाया जाने वाला हिंदू त्योहार है। कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के एक अनुमान अनुसार इस त्यौहार के दौरान 25,000 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होने की उम्मीद है। भारतीयों ने चीन के प्रोडक्ट का इस बार भी बहिष्कार किया है। चांदनी चौक से सांसद और CAIT के महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि गणेश चतुर्थी महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और गोवा जैसे राज्यों में बड़े स्तर पर मनाया जाता है।

CAIT के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया ने कहा कि राज्यों में लोकल ट्रेडर्स के सर्वे के मुताबिक त्यौहार के लिए 20 लाख से अधिक गणेश पंडाल लगाए गए हैं। भरतिया ने बताया कि अकेले महाराष्ट्र में 7 लाख से अधिक पंडाल लगाए गए हैं, इसके बाद कर्नाटक में 5 लाख, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और मध्य प्रदेश में 2 लाख प्रत्येक और 2 लाख पूरे देश में हैं। यदि हर एक पंडाल पर न्यूनतम 50,000 रुपये का खर्च भी माना जाए, जिसमें सेटअप, सजावट, ध्वनि प्रणाली, गणेश प्रतिमा, फूल आदि शामिल हैं, तो यह आंकड़ा अकेले 10,000 करोड़ रुपये से अधिक हो जाता है।

खंडेलवाल ने कहा कि पंडालों पर खर्च किए गए पैसे के अलावा गणेश प्रतिमाओं का कारोबार 500 करोड़ से अधिक का है। फूल, माला, फल, नारियल, धूप और अन्य पूजन सामग्री की बड़े पैमाने पर सेल होती है, जिसका कुल पैसा भी 500 करोड़ के करीब होता है। मिठाई की दुकानों और घरेलू ट्रेडर्स की सेल में 2000 करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी देखी जाती है। इसके अलावा परिवारों को बड़े समारोहों और भोजन के आयोजन के कारण कैटरिंग का लगभग 3000 करोड़ रुपये का कारोबार होता है।

रक्षाबंधन से शुरू हुआ त्योहारों का यह सीजन, जो गणेश चतुर्थी, नवरात्र, दशहरा, करवा चौथ, दिवाली, छठ पूजा और इसके बाद के विवाह सीजन तक जारी रहेगा। भारतीय अर्थव्यवस्था को एक तेज गति वाली यात्रा पर ले जाएगा, जिसमें सनातन अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण योगदान होगा।

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