Gold Silver price: गिरे सोने-चांदी के दाम, क्या भारत में त्योहारी मौसम में सोने की मांग को मिलेगा सहारा!

Gold Silver price: जानकारों का मानना ​​है कि भारतीय सोने की कीमतों में गिरावट की मुख्य वजह स्पॉट मार्केट में कम मांग है। बाजार में हिस्सेदारों द्वारा अपनी पोजीशन कम करने से चांदी की कीमतों पर भी दबाव पड़ा।

अपडेटेड Aug 18, 2026 पर 4:19 PM
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Gold-Silver Rate Today In India: रुपया US डॉलर के मुकाबले ₹95.68 के आसपास था, जबकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने भारतीय मुद्रा पर दबाव डाला।

Gold Silver price: घरेलू वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई। इसकी वजह ग्लोबल कीमतों में कमी और US फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों के नजरिए पर नए संकेतों से पहले निवेशकों का सतर्क होना था। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, अक्टूबर डिलीवरी के लिए सोने के वायदा भाव ₹544 या 0.35% गिरकर ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम हो गए। इन कॉन्ट्रैक्ट्स में 9,895 लॉट का कारोबार हुआ।

दिसंबर डिलीवरी के लिए चांदी के वायदा भाव ₹2,535 या 1.04% गिरकर ₹2.41 लाख प्रति किलोग्राम हो गए, जिसमें 4,317 लॉट का कारोबार हुआ।

घरेलू कीमतों में यह गिरावट ग्लोबल बुलियन कीमतों में कमी के कारण आई। न्यूयॉर्क में सोने के वायदा भाव 0.36% गिरकर $4,457.60 प्रति औंस हो गए, जबकि चांदी 1.78% गिरकर $65.01 प्रति औंस पर आ गई।


कीमतों में गिरावट  क्यों?

जानकारों का मानना ​​है कि भारतीय सोने की कीमतों में गिरावट की मुख्य वजह स्पॉट मार्केट में कम मांग है। बाजार में हिस्सेदारों द्वारा अपनी पोजीशन कम करने से चांदी की कीमतों पर भी दबाव पड़ा।

लेमन (Lemonn) में रिसर्च हेड गौरव गर्ग के अनुसार, सोने और चांदी में गिरावट इसलिए आई क्योंकि US ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और तेल की बढ़ती कीमतों से जुड़ी महंगाई की नई चिंताओं ने बिना यील्ड (ब्याज) वाली कीमती धातुओं की मांग कम कर दी।

रुपया US डॉलर के मुकाबले ₹95.68 के आसपास था, जबकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने भारतीय मुद्रा पर दबाव डाला।

सोने के लिए आगे का क्या नजरिया है?

रिद्धि-सिद्धि बुलियंस के मैनेजिंग डायरेक्टर और इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट पृथ्वीराज कोठारी ने कहा कि सितंबर में US में ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदें कम होने से सोने और चांदी की कीमतों में नरमी आई, जबकि बाजार आगे के पॉलिसी संकेतों के लिए फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक के मिनट्स का इंतजार कर रहा था।

कोठारी ने कहा कि हालिया US जॉब्स, महंगाई और रिटेल-सेल्स डेटा ने बाजार की ब्याज दरें स्थिर रखने (रेट होल्ड) की उम्मीद बढ़ा दी है। ब्याज दरों को लेकर कमजोर नजरिया सोने को सहारा दे सकता है, क्योंकि इससे ऊंची यील्ड की चिंताएं कम होती हैं और बिना यील्ड वाली संपत्ति (जैसे सोना) का आकर्षण बढ़ता है।

क्या भारत में त्योहारों के दौरान सोने की मांग को सहारा मिलेगा? एस्पेक्ट बुलियन एंड रिफाइनरी के CEO दर्शन देसाई के अनुसार, कीमतें ज़्यादा होने के बावजूद कीमती धातुओं की फिजिकल डिमांड मजबूत बनी हुई है।

देसाई ने कहा कि आने वाला त्योहारों और शादियों का सीज़न भारत में सोने की फिजिकल डिमांड को और बढ़ावा दे सकता है, क्योंकि सोने का इस्तेमाल निवेश, तोहफ़े देने और संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता रहेगा।

हालांकि, उन्होंने कहा कि ऊंची कीमतों की वजह से ग्राहक हल्की ज्वेलरी, सिक्के और कम कीमत वाली चीज़ें खरीदने का विकल्प चुन सकते हैं।

देसाई को हालिया बढ़त के बाद कुछ कंसोलिडेशन और प्रॉफ़िट-बुकिंग की उम्मीद है, लेकिन उन्होंने कहा कि कीमती धातुओं के लिए व्यापक नज़रिया सकारात्मक बना हुआ है।

चांदी का क्या?

चांदी में सोने के मुकाबले ज़्यादा उतार-चढ़ाव रहा है और यह निवेश की धारणा और औद्योगिक मांग की उम्मीदों, दोनों के दबाव का सामना कर रही है।

देसाई को उम्मीद है कि चांदी निवेश एसेट और औद्योगिक कमोडिटी, दोनों के तौर पर अपनी दोहरी भूमिका के कारण ज़्यादा दिलचस्पी पैदा करेगी। हालांकि, भारतीय ग्राहकों के लिए, निकट भविष्य में कीमतें ग्लोबल बुलियन की कीमतों, रुपये-डॉलर एक्सचेंज रेट और घरेलू फिजिकल डिमांड पर निर्भर करती रहेंगी।

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