गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ के लिए 30 जनवरी का दिन अच्छा नहीं रहा। दोनों पर सोने और चांदी में गिरावट का असर पड़ा। गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ क्रैश कर गए। इससे पहले सोने और चांदी में रिकॉर्ड तेजी दिखी थी। इससे गोल्ड और सिल्वर ईटीफ की कीमतें भी आसमान में पहुंच गई थीं।
गोल्ड फ्यूचर्स में 9 फीसदी गिरावट
कमोडिटी एक्सचेंज MCX पर अप्रैल एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर्स करीब 9 फीसदी गिरकर 1,68,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर चल रहा था। 29 जनवरी को गोल्ड फ्यूचर्स 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था। यह गोल्ड फ्यूचर्स का अब तक का सबसे ऊंचा भाव है। 30 जनवरी को दोपहर बाद के कारोबार में फरवरी और जून एक्सपायरी वाले गोल्ड फ्यूचर्स में करीब 9 फीसदी गिरावट दिखी। मार्च एक्सपायरी वाला सिल्वर फ्यूचर्स 15 फीसदी गिरकर 3,39,910 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। मई और जुलाई फ्यूचर्स में क्रमश: 15 फीसदी और 12 फीसदी की गिरावट दिखी।
गोल्ड ईटीएफ में 12 फीसदी तक गिरावट
निप्पॉन इंडिया ईटीएफ गोल्ड बीईईएस 30 जनवरी को करीब 10 फीसदी फिसला। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल गोल्ड ईटीएफ भी करीब 10 फीसदी क्रैश कर गया। एक्सिस गोल्ड ईटीएफ में करीब 12 फीसदी गिरावट आई। UTI Gold ETF, Edelweiss Gold, ETF, HDFC Gold ETF, Quantum Gold ETF, DSP Gold ETF में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली।
एक्सिस सिल्वर ईटीएफ 24 फीसदी तक क्रैश
सिल्वर ईटीएफ में भी बड़ी गिरावट आई। एक्सिस सिल्वर ईटीएफ 24 फीसदी क्रैश कर गया। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल सिल्वर और कोटक सिल्वर ईटीएफ करीब 23 फीसदी गिर गए। एसबीआई सिल्वर ईटीएफ भी 22 फीसदी गिर गया। यह सिल्वर इटीएफ के निवेशकों के लिए बड़ा झटका है। इससे पहले सिल्वर ईटीएफ के निवेशक शानदार रिटर्न से बहुत खुश थे।
सवाल है कि क्या यह गिरावट आपके लिए खरीदारी का मौका है? इस बारे में एक्सपर्ट्स की एक राय नहीं है। आनंद राठी की एसोसिएट डायरेक्टर तनवी कंचन ने कहा कि भले ही बुलियन में बड़ी गिरावट आई है, लेकिन दोनों के फंडामेंटल्स स्ट्रॉन्ग हैं। खासकर सिल्वर की इंडस्ट्रियल डिमांड काफी स्ट्रॉन्ग है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स मैन्युफैक्चरर्स और एआई इंफ्रास्ट्र्क्चर में सिल्वर की डिमांड काफी स्ट्ऱॉन्ग है।
क्या पूरा पैसा एक बार में निवेश करें?
उन्होंने कहा कि अगर इनवेस्टर्स इस गिरावट का फायदा उठाना चाहते हैं तो उन्हें पूरा पैसा एक बार में निवेश करने की जगह उसे कुछ हफ्तों या महीनों के दौरान करना चाहिए। उन्हें हर गिरावट के मौके पर थोड़ी खरीदारी करनी चाहिए। इससे उनकी पर्चेज कॉस्ट कम रहेगी। इससे तेजी आने पर उनके पास ज्यादा मुनाफा कमाने का मौका होगा।
क्या निवेश करने में ज्यादा रिस्क है?
ऐसे इनवेस्टर्स जो ज्यादा रिस्क नहीं लेना चाहते, उन्हें पोर्टफोलियो में एसेट ऐलोकेशन पर फोकस बनाए रखना चाहिए। इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो में गोल्ड और सिल्वर की हिस्सेदारी 5-10 फीसदी तक रखी जा सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बुलियन का आउटलुक अभी भी स्ट्रॉन्ग दिखता है।
बोनांजा में सीनियर कमोडिटी रिसर्च एनालिस्ट नृपेंद्र यादव ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता, केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीदारी और मीडियम टर्म में रियल इंटरेस्ट रेट में नरमी की उम्मीद को देखते हुए पोर्टफोलियो की हेजिंग और डायवर्सिफिकेशन के लिए गोल्ड की बड़ी भूमिका बनी रहेगी।