सोने के भाव में आया बड़ा ट्विस्ट! अमेरिका-ईरान तनाव और फेड रेट के फेर में फंसा गोल्ड, आगे की चाल पर एक्सपर्ट्स ने ये कहा
Gold Price Targets: बीते दिन डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए शांति समझौते को 'खत्म' घोषित कर दिया, जिससे तनाव चरम पर पहुंच गया। इसके बाद ईरान ने भी बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले का दावा किया। इन घटनाक्रमों के कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 5% से ज्यादा उछल गईं, जिससे ग्लोबल लेवल पर महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। सोने के भाव पर भी इसका बड़ा असर देखने को मिल रहा है
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मौजूदा गिरावट निवेशकों के लिए खरीदारी का एक शानदार मौका साबित हो सकती है
Gold Prices Outlook: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच जारी युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण सोने की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। एक तरफ जहां वैश्विक अनिश्चितता के समय सोने को हमेशा 'सुरक्षित निवेश' माना जाता है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की आशंका ने इसकी रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।
टाटा म्यूचुअल फंड और Augmont के एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मौजूदा गिरावट निवेशकों के लिए खरीदारी का एक शानदार मौका साबित हो सकती है। आइए समझते हैं कि सोने की कीमतों में गिरावट की असली वजह क्या है और आगे इसकी चाल कैसी रहेगी।
क्यों दबाव में हैं सोने की कीमतें? समझें बड़ी वजहें
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए शांति समझौते (MOU) को 'खत्म' घोषित कर दिया, जिससे तनाव चरम पर पहुंच गया। इसके बाद ईरान ने भी बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले का दावा किया। इन घटनाक्रमों के कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 5% से ज्यादा उछल गईं, जिससे ग्लोबल लेवल पर महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
ब्याज दरों का सोने पर सीधा असर
जब महंगाई बढ़ती है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को ऊंचा रखने या उन्हें और बढ़ाने की संभावना बढ़ जाती है। चूंकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता, इसलिए ब्याज दरें बढ़ने पर निवेशक सोने के बजाय बॉन्ड्स जैसे ब्याज देने वाले एसेट्स में पैसा लगाना पसंद करते हैं। यही वजह है कि डॉलर की मजबूती और हाई बॉन्ड यील्ड के कारण सोने की कीमतें फिलहाल दबाव में हैं।
US Fed का अगला कदम रहेगा सबसे बड़ा ट्रिगर
ऑगमोंट की रिसर्च हेड डॉ. रेनिशा चैनानी के मुताबिक, अमेरिकी फेड की मीटिंग के मिनट्स से साफ है कि समिति के सदस्य आर्थिक दृष्टिकोण को लेकर बंटे हुए हैं। हालांकि फिलहाल दरों को स्थिर रखने पर सहमति है, लेकिन कुछ सदस्य दरें बढ़ाने के पक्ष में हैं।
CME फेडवॉच टूल के अनुसार, बाजार अब सितंबर में ब्याज दर बढ़ोतरी की 68% संभावना और जनवरी 2027 तक बढ़ोतरी की 87% संभावना मानकर चल रहा है। इन उम्मीदों से डॉलर मजबूत हो रहा है, जो शॉर्ट-टर्म में सोने के लिए नकारात्मक है।
क्या हैं सोने के नए टार्गेट?
डॉ. रेनिशा चैनानी के अनुसार, सोने ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना $4,080 का टार्गेट हासिल कर लिया है। अब आगे की चाल मिडिल ईस्ट के हालातों पर निर्भर करेगी:
तेजी का परिदृश्य: अगर सोना $4,090, भारतीय बाजार में लगभग ₹144000 के ऊपर टिका रहता है, तो यह $4,160 यानी ₹147000 की तरफ बढ़ सकता है।
मंदी का परिदृश्य: अगर कीमतें फिसलकर $4,040 (₹1,43,000) के नीचे आती हैं, तो गिरावट बढ़कर $3,950 (₹1,41,000) के स्तर तक जा सकती है।
भारतीय निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?
भारतीय निवेशकों के लिए एक राहत की बात यह है कि डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी घरेलू बाजार में सोने की गिरावट को रोकने में मदद करेगी। रुपया कमजोर होने से आयातित सोना महंगा हो जाता है, जिससे स्थानीय कीमतों को सपोर्ट मिलता है।
टाटा म्यूचुअल फंड की रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही शॉर्ट-टर्म में उतार-चढ़ाव बना रहे, लेकिन लंबी अवधि के लिए सोनेका आउटलुक बेहद पॉजिटिव है। फंड हाउस ने सलाह दी है कि 'निवेशकों को हर गिरावट पर सोना खरीदना चाहिए।' शॉर्ट-टर्म के उतार-चढ़ाव से पैनिक होने के बजाय, इस करेक्शन को धीरे-धीरे अपने पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाने के मौके के रूप में देखना चाहिए।
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