Gold Price Today: अमेरिकी महंगाई के अहम आंकड़े जारी होने से पहले निवेशकों की मुनाफावसूली बढ़ गई है। इसका असर सोने की कीमतों पर भी दिखा। बुधवार, 10 जून को घरेलू बाजार में सोना 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से नीचे फिसल गया।

Gold Price Today: अमेरिकी महंगाई के अहम आंकड़े जारी होने से पहले निवेशकों की मुनाफावसूली बढ़ गई है। इसका असर सोने की कीमतों पर भी दिखा। बुधवार, 10 जून को घरेलू बाजार में सोना 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से नीचे फिसल गया।
MCX पर 24 कैरेट सोना 1,47,489 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा। यह एक ही कारोबारी सत्र में 3,500 रुपये से ज्यादा की गिरावट है। 13 मई को सोना 1,64,500 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। उस स्तर से अब तक कीमतों में करीब 9% की गिरावट आ चुकी है।
सोना में गिरावट की वजह?
LKP Securities के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, 13 मई को आयात शुल्क बढ़ने के बाद सोने में जो तेजी आई थी, वह मुख्य रूप से घरेलू लागत बढ़ने की वजह से थी। इसे सोने में किसी नए लॉन्ग टर्म तेजी के संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
अब बाजार का ध्यान फिर से वैश्विक आर्थिक संकेतकों और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर लौट आया है। इसी वजह से निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी है और सोने पर दबाव बढ़ा है। जानकारों का कहना है कि आयात शुल्क बढ़ने के बाद सोना बहुत तेजी से 1.65 लाख रुपये के लक्ष्य तक पहुंच गया था। लेकिन यह तेजी नीतिगत फैसले की वजह से थी। इसके बाद कई निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर मुनाफा वसूला।
किन बातों पर बाजार की नजर?
इस समय निवेशकों की नजर अमेरिका के महंगाई आंकड़ों पर है। बाजार को चिंता है कि अगर महंगाई उम्मीद से ज्यादा रहती है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है।
यही वजह है कि सोने में नई खरीदारी फिलहाल सीमित दिख रही है और निवेशक सतर्क बने हुए हैं।
आगे सोने का स्तर क्या हो सकता है?
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोने के लिए अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट 1,45,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास है। अगर कीमतें और कमजोर होती हैं, तो यह स्तर अहम साबित हो सकता है।
वहीं दूसरी ओर 1,55,000 रुपये प्रति 10 ग्राम एक मजबूत रेजिस्टेंस माना जा रहा है। जब तक सोना इस स्तर के ऊपर नहीं निकलता, तब तक बाजार का रुख कमजोर बना रह सकता है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
Geojit Investments के कमोडिटी रिसर्च प्रमुख हरीश वी का कहना है कि अमेरिकी डॉलर की मजबूती और लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों की आशंका ने सोने पर दबाव बनाया है। इसके अलावा बढ़ती बॉन्ड यील्ड की वजह से भी सोने जैसे बिना ब्याज वाले निवेश की आकर्षण क्षमता कम हुई है।
हालांकि उनके मुताबिक, मौजूदा गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर भी बन सकती है। जो निवेशक सोने में निवेश करना चाहते हैं, वे एकमुश्त बड़ी रकम लगाने के बजाय SIP के जरिए या गिरावट आने पर धीरे-धीरे खरीदारी करने की रणनीति अपना सकते हैं।
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