Gold Silver price: MCX पर सोना ₹4,300 हुआ सस्ता, चांदी ₹8000 गिरी, अब क्या करें निवेशक!
Gold Silver price: MCX पर, दिसंबर डिलीवरी वाले सोने के कॉन्ट्रैक्ट्स ₹3,171 या 2.07% गिरकर ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गए, जबकि दिसंबर डिलीवरी वाले चांदी के कॉन्ट्रैक्ट्स ₹6,477 या 2.76% गिरकर ₹2.28 लाख प्रति किलोग्राम पर आ गए
बोनान्ज़ा के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निरपेंद्र यादव के अनुसार, सोने का $4,200 प्रति औंस के स्तर से नीचे आना निकट अवधि के मैक्रो-इकोनॉमिक माहौल में बदलाव को दर्शाता है।
Gold Silver price: सोमवार (28 सितंबर) को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट आई। स्पॉट मार्केट में कम मांग और कीमती धातुओं में बड़े पैमाने पर बिकवाली के कारण सोनेमें 2.5% से ज़्यादा और चांदी में 3.5% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
MCX पर, दिसंबर डिलीवरी वाले सोने के कॉन्ट्रैक्ट्स ₹4,321 या 2.86% गिरकर 1,46,789 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गए, जबकि दिसंबर डिलीवरी वाले चांदी के कॉन्ट्रैक्ट्स ₹8437 या 3.59% गिरकर ₹2.26 लाख प्रति किलोग्राम पर आ गए।
यह गिरावट महंगाई को लेकर बढ़ती चिंताओं और इस उम्मीद के बीच आई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व सख्त मौद्रिक नीति (monetary stance) बनाए रख सकता है। ऊंची ब्याज दरें और बॉन्ड यील्ड आमतौर पर सोना जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स (जिनसे कोई निश्चित रिटर्न नहीं मिलता) पर दबाव डालती हैं।
ग्लोबल स्तर पर, गोल्ड फ्यूचर्स 2.37% गिरकर $4,183.18 प्रति औंस पर आ गए, जबकि चांदी 4.09% गिरकर $61.66 प्रति औंस पर ट्रेड कर रही थी।
सोने की कीमतें क्यों गिर रही हैं?
बोनान्ज़ा के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निरपेंद्र यादव के अनुसार, सोने का $4,200 प्रति औंस के स्तर से नीचे आना निकट अवधि के मैक्रो-इकोनॉमिक माहौल में बदलाव को दर्शाता है। तेल की ऊंची कीमतें महंगाई की चिंताओं को बढ़ा रही हैं, जिससे अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर ऊपर जा रहे हैं और यह उम्मीद मजबूत हो रही है कि फेड को मौद्रिक नीति सख्त रखनी पड़ सकती है।
यादव ने कहा कि निवेशकों को अमेरिकी डॉलर, ट्रेजरी यील्ड, तेल की कीमतों और आने वाले अमेरिकी महंगाई और रोजगार के आंकड़ों पर नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि ये फेड के अगले कदमों के बारे में उम्मीदों को प्रभावित कर सकते हैं।
आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स की कमोडिटीज और करेंसीज़ की रिसर्च एनालिस्ट वेदिका नार्वेकर ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास लगातार बनी अनिश्चितता के कारण तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं और महंगाई की चिंताएं भी बरकरार हैं।
उन्होंने बताया कि अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर लगभग 5.20% हो गई है, जिससे सोने के लिए मुश्किल हालात पैदा हो गए हैं। नार्वेकर ने कहा कि जब तक ईरान की स्थिति पर अधिक स्पष्टता नहीं आती या यील्ड में कमी नहीं आती, तब तक सोने पर दबाव बना रह सकता है। गोल्ड इन्वेस्टर्स को किन लेवल्स पर नज़र रखनी चाहिए?
ग्लोबल मार्केट में, नार्वेकर ने $4,110 प्रति औंस को अगला अहम सपोर्ट लेवल बताया, जबकि $4,300 प्रति औंस के आसपास मज़बूत रेजिस्टेंस दिख रहा है।
इन लेवल्स पर रखें नजर
घरेलू इन्वेस्टर्स के लिए, उन्होंने MCX गोल्ड का अगला अहम सपोर्ट लेवल ₹1.45 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास बताया।यादव ने कहा कि $4,100-$4,070 प्रति औंस का ज़ोन नजर रखने के लिए अहम है। उन्होंने $3,980 प्रति औंस के आसपास एक अहम सपोर्ट लेवल भी बताया, जिसके नीचे जाने पर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।
PL कैपिटल में कमोडिटीज़ के हेड आशीष राजोदिया ने MCX गोल्ड के लिए सपोर्ट लेवल ₹1.48 लाख और ₹1.46 लाख प्रति 10 ग्राम, और रेजिस्टेंस लेवल ₹1.52 लाख और ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम बताया।
चांदी का क्या हाल है?
चांदी पर भी दबाव है, MCX दिसंबर कॉन्ट्रैक्ट 3.46% गिरकर ₹2.26 लाख प्रति किलोग्राम पर आ गया है। लेमन में रिसर्च हेड गौरव गर्ग के मुताबिक, ग्लोबल मार्केट में चांदी $62.63 प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रही थी। उन्होंने कहा कि US यील्ड में बढ़ोतरी और मज़बूत डॉलर का असर दोनों कीमती धातुओं पर पड़ रहा है।
हालांकि, जियोटस के CEO विक्रम सुब्बुराज ने बताया कि चांदी ने सेशन की शुरुआत में कुछ रिकवरी दिखाई, जो सोने की तुलना में इसकी ज़्यादा अस्थिरता को दिखाता है। उन्होंने इन्वेस्टर्स को सलाह दी कि वे सिर्फ़ एक ट्रेडिंग सेशन के आधार पर कोई नतीजा न निकालें।
इन्वेस्टर्स को अब कहां रखनी चाहिए नजर
बुलियन के लिए तुरंत असर डालने वाली चीज़ें US में महंगाई और जॉब्स डेटा, ट्रेज़री यील्ड, डॉलर, तेल की कीमतें और US-ईरान हालात से जुड़ी घटनाएँ हो सकती हैं।
भारतीय इन्वेस्टर्स के लिए रुपया भी मायने रखता है। सुब्बुराज ने कहा कि कमज़ोर रुपया इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमतों में गिरावट के असर को कम कर सकता है, साथ ही घरेलू बाज़ार में बुलियन की कीमतों को अपेक्षाकृत महंगा बनाए रख सकता है।
फिजिकल मार्केट के नजरिए से, आस्पेक्ट बुलियन एंड रिफाइनरी के CEO दर्शन देसाई ने कहा कि अस्थिरता के बीच ज्वैलर्स और ट्रेडर्स इन्वेंट्री को लेकर सतर्क रह सकते हैं। उन्होंने कहा कि कीमतों में सही-खासी गिरावट से कुछ खरीदार वापस आ सकते हैं, जबकि आने वाले त्योहारों और शादी-ब्याह के मौसम से घरेलू मांग को सहारा मिल सकता है।
निवेशकों के लिए सुब्बुराज ने सलाह दी कि वे शॉर्ट-टर्म उतार-चढ़ाव के पीछे न भागें और कहा कि लॉन्ग-टर्म खरीदार टुकड़ों में खरीदारी करने पर विचार कर सकते हैं, जबकि लेवरेज का इस्तेमाल करने वाले ट्रेडर्स को अपनी पोजीशन छोटी रखनी चाहिए और सख्त स्टॉप-लॉस का इस्तेमाल करना चाहिए।
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