Gold Price Today: नए शिखर पर सोना, ₹1.16 लाख तक पहुंचा भाव; जानिए गोल्ड में रिकॉर्ड तोड़ तेजी के 5 बड़े कारण
Gold Price Today: सोने की कीमत मंगलवार, 30 सितंबर को MCX पर 1,16,850 रुपये प्रति 10 ग्राम के नए रिकॉर्ड पर पहुंच गई। पिछले 12 महीनों में गोल्ड का रेट 37% बढ़ा है। वहीं, इस दौरान निफ्टी ने 4.65% का नेगेटिव रिटर्न दिया है। जानिए सोने के दाम में रिकॉर्ड तोड़ तेजी के 5 बड़े कारण।
Gold Price Today: अमेरिकी सरकार के शटडाउन की आशंका ने सोने की कीमतों को नई ऊंचाई दी है।
Gold Price Today: एक ओर जहां शेयर बाजार लगातार हिचकोले खा रहा है, वहीं गोल्ड की कीमत सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ रही है। मंगलवार, 30 सितंबर को MCX पर सोना 1.21% उछलकर 1,16,850 रुपये प्रति 10 ग्राम के नए रिकॉर्ड पर पहुंच गया। वहीं, इंटरनेशनल मार्केट में दिसंबर डिलीवरी वाले गोल्ड फ्यूचर्स 1.14% चढ़कर 3,899.15 डॉलर प्रति औंस के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गए।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की ताजा रिपोर्ट बताती है कि पिछले 12 महीनों में सोना 37% और इस साल अब तक 31% महंगा हो चुका है। अगर निफ्टी 50 इंडेक्स से तुलना करें, तो इसने पिछले 12 महीने में 4.65% का नेगेटिव रिटर्न दिया है। वहीं, इस साल निफ्टी में सिर्फ 3.66% की तेजी आई है। आइए जानते हैं कि वे कौन-से 5 बड़े कारण हैं, जो हर गोल्ड प्राइस को नई ऊंचाई पर ले जा रहे हैं।
रुपये की कमजोरी और त्योहारों का असर
भारतीय रुपये की कमजोरी ने इंपोर्टेड गोल्ड को और महंगा बना दिया है। दूसरी ओर, देश में त्योहारों और शादियों का सीजन शुरू हो गया है। दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों पर सोने की मांग हमेशा चरम पर रहती है।
ज्वैलर्स का कहना है कि हेरिटेज और हैंडक्राफ्टेड ज्वैलरी की डिमांड बढ़ रही है। रिकॉर्ड कीमतों के बावजूद सोने की सांस्कृतिक और भावनात्मक अहमियत के कारण खरीदार पीछे नहीं हट रहे।
अमेरिकी सियासत में टकराव, शटडाउन का डर
अमेरिकी सरकार के शटडाउन की आशंका ने सोने की कीमतों को नई ऊंचाई दी है। खबरों के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेट्स के बीच समझौता नहीं हो पा रहा। इससे बुधवार से ही कई सरकारी सेवाएं बंद हो सकती हैं।
अब निवेशक अमेरिकी जॉब ओपनिंग्स, प्राइवेट पेरोल्स, ISM मैन्युफैक्चरिंग PMI और शुक्रवार को आने वाली नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, ताकि अर्थव्यवस्था की सेहत पर और साफ संकेत मिल सकें।
भू-राजनीतिक तनाव से सुरक्षित निवेश का रुख
रूस-यूक्रेन युद्ध, इजरायल-हमास संघर्ष और अमेरिका से जुड़े व्यापारिक तनाव ने निवेश माहौल को अस्थिर कर दिया है। ऐसे हालात में सोना हमेशा से सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) माना जाता है। भारत में भी निवेशकों ने ऊंची कीमतों के बावजूद सोने की जमकर खरीदारी की है, क्योंकि इसे सुरक्षा और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।
अब बहुत से लोग गहने के लिए सोना कम, निवेश के तौर पर ज्यादा खरीद रहे हैं। यह चलन भारत समेत पूरी दुनिया में बढ़ा है। शेयर बाजार में सुस्ती ने भी भारतीय निवेशकों को गोल्ड की ओर धकेला है।
RBI समेत सेंट्रल बैंकों की भारी खरीदारी
सोने की रैली का बड़ा कारण है दुनियाभर के सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीद। एशिया, मिडिल ईस्ट और यूरोप के कई देश करेंसी में उतार-चढ़ाव और डॉलर की कमजोरी से बचने के लिए सोने का स्टॉक बढ़ा रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी अपने रिजर्व में सोना जोड़ रहा है।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, मई 2025 में सेंट्रल बैंकों ने 20 टन सोना खरीदा, जो पिछले महीने से ज्यादा था। पिछले तीन सालों में हर साल 1,000 टन से ज्यादा सोना खरीदा गया, जबकि पिछले दशक में यह औसतन 400-500 टन रहा करता था।
गोल्ड ETF में लगातार बढ़ता निवेश
ग्लोबली निवेशक गोल्ड-बैक्ड ETFs में पैसा लगा रहे हैं, जिससे फिजिकल गोल्ड रखने की चिंता से छुटकारा मिल जाता है। इस बीच, दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड-बैक्ड ETF SPDR Gold Trust की होल्डिंग्स सोमवार को 0.60% बढ़कर 1,011.73 मीट्रिक टन पहुंच गईं, जो जुलाई 2022 के बाद सबसे ज्यादा है।
साथ ही, अमेरिका और दूसरे विकसित देशों में लंबे समय तक कम ब्याज दरें बने रहने की संभावना है। इससे सोना जैसे बिना ब्याज वाले एसेट और भी आकर्षक हो गए हैं।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।