रिटायर होते ही न निकालें NPS का पूरा पैसा! 60 की उम्र के बाद भी मिलता है मोटा ब्याज, जानिए PFRDA का ये नियम
NPS Post Retirement Rules: नेशनल पेंशन सिस्टम में 60 साल की उम्र पूरी होने के बाद भी पैसा निकालना अनिवार्य नहीं है। PFRDA के 'डेफरमेंट' और 'सिस्टमैटिक लंपसम विड्रॉल' नियमों के तहत आप 75 साल की उम्र तक अपने पैसे को एनपीएस में बनाए रख सकते हैं, जिससे बचे हुए फंड पर 10% तक की दर से कंपाउंडिंग रिटर्न मिलता रहता है। जानिए कैसे यह नियम बैंक एफडी से बेहतर साबित होता है और रिटायरमेंट के बाद किन गलतियों से बचना चाहिए
पेंशनभोगी 75 साल की उम्र तक अपने NPS कॉर्पस पर शानदार कंपाउंडिंग का लाभ उठा सकते हैं
NPS Post Retirement Growth & PFRDA Rules: नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को लेकर ज्यादातर लोग सोचते हैं कि 60 साल की उम्र होते ही सारा पैसा निकालकर खाते को बंद कर देना चाहिए। हालांकि, पेंशन फंड रेगुलेटर(PFRDA) का नियम कुछ अलग ही सुविधा देता है। अगर आप रिटायरमेंट के तुरंत बाद पूरा पैसा नहीं निकालते हैं, तो आपका फंड 60 की उम्र के बाद भी बाजार में निवेशित रहकर बंपर रिटर्न देता रहता है।
PFRDA के 'डेफरमेंट' और 'सिस्टमैटिक लंपसम विड्रॉल' जैसे विकल्पों का इस्तेमाल करके पेंशनभोगी 75 साल की उम्र तक अपने NPS कॉर्पस पर शानदार कंपाउंडिंग का लाभ उठा सकते हैं।
60 की उम्र के बाद कैसे बढ़ता है NPS का पैसा?
रिटायरमेंट के समय सब्सक्राइबर के पास अपने कुल कॉर्पस को संभालने के दो ऐसे विकल्प होते हैं, जो उनके पैसे को लगातार बढ़ाना जारी रखते हैं:
1. निकासी टालने की सुविधा(डेफरमेंट): आप अपने एनपीएस खाते की लंपसम निकासी या एन्युटी खरीद को 75 साल की उम्र तक टाल सकते हैं। जब तक आपका पैसा एनपीएस खाते में रहेगा, वह इक्विटी (E) और कॉर्पोरेट/गवर्नमेंट बॉन्ड्स (C & G) में निवेशित रहेगा और उस पर सालाना 8% से 12% तक का मार्केट-लिंक्ड रिटर्न मिलता रहेगा।
2. सिस्टमैटिक लंपसम विड्रॉल (चरणबद्ध निकासी): PFRDA का यह नियम आपको एक साथ 60% लंपसम निकालने के बजाय उसे मासिक, तिमाही, छमाही या सालाना आधार पर किश्तों में निकालने की छूट देता है। जो रकम आपके खाते में बची रहेगी, उस पर लगातार ब्याज और ग्रोथ मिलती रहेगी।
अगर कोई सब्सक्राइबर 60 की उम्र में हड़बड़ी में अपना 60% लंपसम फंड निकालकर बैंक सेविंग्स अकाउंट या साधारण बैंक एफडी में रख देता है, तो उसे दो बड़े नुकसान होते हैं:
कम ब्याज दर: बैंक एफडी आमतौर पर 6.5% से 7.5% के बीच ब्याज देती हैं, जबकि एनपीएस के लॉन्ग-टर्म पोर्टफोलियो में 9% से 11% तक की ग्रोथ की संभावना बनी रहती है।
टैक्स की मार: एनपीएस से निकाला गया 60% लंपसम पैसा पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है, लेकिन जब आप उस पैसे को एफडी में जमा करते हैं, तो उससे मिलने वाला ब्याज आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से पूरी तरह टैक्स योग्य हो जाता है।
रिटायरमेंट के बाद PFRDA के नियम से कितना बढ़ सकता है आपका फंड?
मान लीजिए 60 वर्ष की उम्र में आपका कुल NPS कॉर्पस ₹1 करोड़ है:
रिटायरमेंट पर NPS सब्सक्राइबर ध्यान रखें ये 3 बातें
1. कम से कम 40% एन्युटी खरीदना जरूरी: नियमों के अनुसार, कुल कॉर्पस का कम से कम 40% हिस्सा एन्युटी खरीदने में जाता है, जिससे आपको आजीवन मासिक पेंशन मिलती है।
2. 75 साल तक खाता चालू रखने की छूट: आप 75 वर्ष की आयु तक कभी भी अपना लंपसम हिस्सा निकाल सकते हैं या पेंशन शुरू करवा सकते हैं।
3. नॉमिनेशन अपडेट रखें: रिटायरमेंट के समय अपने खाते में सही नॉमिनी और बैंक खाते की जानकारी अपडेट रखें ताकि SLW या पेंशन किश्तें बिना रुके सीधे खाते में आ सकें।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।