Gold Silver price: सोना ₹1.41 लाख पर, चांदी भी ₹4500 लुढ़की, आखिर अब क्या करें निवेशक
Gold Silver price: सोने -चांदी की कीमतों में यह गिरावट ग्लोबल बुलियन मार्केट में कमजोरी के कारण आई, क्योंकि निवेशक 29 जुलाई को आने वाले US फेडरल रिजर्व के मॉनेटरी पॉलिसी के फैसले से पहले सतर्क नजर आए। साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमजोरी के कारण भी भारत में कीमतों में दबाव दिखा है
सोने -चांदी की कीमतों में यह गिरावट ग्लोबल बुलियन मार्केट में कमजोरी के कारण आई, क्योंकि निवेशक 29 जुलाई को आने वाले US फेडरल रिजर्व के मॉनेटरी पॉलिसी के फैसले से पहले सतर्क नजर आए।
Gold Silver price: सोने-चांदी की कीमतों में आज 28 जुलाई को गिरावट देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, अगस्त डिलीवरी के लिए सोने के वायदा (फ्यूचर्स) में ₹1,655 या 1.16% की गिरावट आई और यह ₹1.41 लाख प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई। सितंबर डिलीवरी के लिए चांदी के वायदा में 2% यानी 4580 रुपये गिरावट आई और यह ₹2.16 लाख प्रति किलोग्राम पर आ गया
सोने -चांदी की कीमतों में यह गिरावट ग्लोबल बुलियन मार्केट में कमजोरी के कारण आई, क्योंकि निवेशक 29 जुलाई को आने वाले US फेडरल रिजर्व के मॉनेटरी पॉलिसी के फैसले से पहले सतर्क नजर आए। साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमजोरी के कारण भी भारत में कीमतों में दबाव दिखा है। Comex गोल्ड फ्यूचर्स 0.85% गिरकर लगभग $4,041.42 प्रति औंस हो गया, जबकि स्पॉट गोल्ड $4,030 प्रति औंस के करीब आ गया।
क्या है बाजार जानकार की राय
विश्लेषकों का कहना है कि मजबूत अमेरिकी डॉलर और फेड के ब्याज दर के नजरिए को लेकर अनिश्चितता ने बुलियन की कीमतों पर दबाव डाला। चूंकि सोने और चांदी का कारोबार वैश्विक स्तर पर डॉलर में होता है, इसलिए अमेरिकी मुद्रा में बढ़ोतरी से दूसरी मुद्राओं का इस्तेमाल करने वाले खरीदारों के लिए ये धातुएं महंगी हो जाती हैं, जिससे अक्सर मांग कम हो जाती है।
LKP सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च एनालिस्ट और वाइस प्रेसिडेंट जतिन त्रिवेदी ने कहा, "ग्लोबल बुलियन में कमजोरी और साथ ही रुपये के मजबूत होने से MCX गोल्ड पर दबाव बना रहा।"
सोने और चांदी के लिए फेड का फैसला अहम क्यों?
फेडरल रिजर्व के पॉलिसी फैसले से सोने-चांदी की कीमतों में अहम बदलाव आने की उम्मीद है। आम तौर पर ऊंची ब्याज दरें सोने और चांदी पर दबाव डालती हैं क्योंकि इससे बिना रिटर्न देने वाली संपत्तियों को रखने की 'अपॉर्चुनिटी कॉस्ट' (वैकल्पिक लागत) बढ़ जाती है, जबकि दर में कटौती की उम्मीदें बुलियन को सहारा देती हैं।
त्रिवेदी ने कहा, "निवेशक US फेडरल रिजर्व के पॉलिसी फैसले से पहले सतर्क हैं, क्योंकि उम्मीद है कि यह बुलियन की कीमतों में अगली दिशा तय करने वाला मुख्य कारक होगा।"
बाजार के लोग ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों पर भी नजर रखे हुए हैं। फेड का नरम रुख सोने- चांदी को सहारा दे सकता है, जबकि उम्मीद से ज्यादा सख्त पॉलिसी संकेत कीमतों पर दबाव बनाए रख सकते हैं।
डॉलर की मजबूती से बुलियन पर दबाव
US डॉलर इंडेक्स एक महीने के उच्चतम स्तर 101.57 पर पहुंच गया, जिससे कीमती धातुओं पर दबाव पड़ा। कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी रिसर्च की AVP कायनात चेनवाला के अनुसार, फेड के फैसले से पहले डॉलर के मजबूत होने के कारण स्पॉट गोल्ड और सिल्वर की कीमतें क्रमशः लगभग $4,030 और $57 तक गिर गईं।
उन्होंने कहा, "मजबूत डॉलर का सीधा असर बुलियन (सोने-चांदी) पर पड़ रहा है।" उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका-ईरान स्थिति को लेकर अनिश्चितता ने भी निवेशकों को सतर्क रखा।
कीमतों को किससे मिल रहा सपोर्ट
हालिया गिरावट के बावजूद, एनालिस्ट्स का कहना है कि लगातार निवेश और फिजिकल डिमांड के कारण सोने का भविष्य का नजरिया सकारात्मक बना हुआ है।
चॉइस ब्रोकिंग की कमोडिटी फंडामेंटल एनालिस्ट पिंकी यादव ने कहा कि सोने की कीमतों में गिरावट कुछ हद तक तब सीमित हो गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि वाशिंगटन ईरान के साथ "अच्छी बातचीत" कर रहा है। इससे कूटनीतिक समाधान की उम्मीदें जगीं और कच्चे तेल की कीमतें कम हुई।
उन्होंने कहा कि चीन से मांग, अधिक आयात, निवेशकों की लगातार खरीदारी और बुलियन-बेस्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में निवेश ने सोने की कीमतों को सहारा दिया है।
(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।