Gold Price Slips: सोने की चमक आज सोमवार को फीकी पड़ी। लगातार तीन हफ्ते टूटने के बाद इस हफ्ते की शुरुआत भी गोल्ड के लिए लाल रही। कच्चे तेल में उबाल ने महंगाई की रफ्तार को लेकर चिंताए बढ़ाई तो इस बात के आसार बढ़े कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। इसने गोल्ड पर दबाव बढ़ाया और इसके भाव नीचे आए। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की इसी हफ्ते नीतिगत बैठक है। इस बैठक में ब्याज दरें बढ़ाने के आसार पर स्पॉट गोल्ड 0.3% गिरकर प्रति औंस $4,334.31 पर आ गया। वहीं यूएस गोल्ड फ्यूचर्स भी 0.8% फिसलकर $4,375.00 पर आ गया। बाकी मेटल्स की बात करें तो स्पॉट सिल्वर भी 0.7% गिरकर प्रति औंस $64.02 पर आ गया तो प्लेटिनम प्रति औंस $1,796.90 पर स्थिर रहा तो पैलेडियम हल्के बदलाव के साथ $1,298.80 पर आ गया।
ब्याज दरें बढ़ने के आसार और कच्चे तेल के उबाल पर दबाव
अमेरिका में पिछले महीने अगस्त में खुदरा महंगाई की रफ्तार चार महीने में सबसे अधिक रही, जिससे इस बात के आसार बढ़ गए हैं कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। CME FedWatch टूल के अनुसार ट्रेडर्स का मानना है कि मंगलवार और बुधवार को होने वाली सेंट्रल बैंक की पॉलिसी मीटिंग में अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी के आसार लगभग 86.5% हैं, जो पिछले हफ्ते महंगाई के आंकड़े आने से पहले लगभग 67% थी। इसके अलावा यह आसार भी है कि बैंक ऑफ जापान शुक्रवार को ब्याज दरें बढ़ा सकता है।
लगातार महंगाई और मजबूत आर्थिक ग्रोथ के कारण केंद्रीय बैंकों के ब्याज दरें बढ़ाने के आसार बढ़े हैं। इस बीच कच्चा तेल उबल रहा है और पश्चिमी एशिया में तनाव कम होने के संकेत बहुत कम मिल रहे हैं। आमतौर पर सोने को इनफ्लेशन हेज के तौर पर देखा जाता है लेकिन ब्याज दरें बढ़ती है तो सोने जैसे एसेट्स का आकर्षण कम हो जाता है क्योंकि इस पर कोई ब्याज नहीं मिलता है। कच्चे तेल की बात करें सोमवार को यह 2% से अधिक उछल पड़ा और प्रति बैरल ब्रेंट क्रूड $107 के पार पहुंच गया।
Gold को लेकर क्या कहना है जानकारों का
केसीएम ट्रेड के चीफ मार्केट एनालिस्ट टिम वाटरर (Tim Waterer) का कहना है कि गोल्ड के लिए फिलहाल मार्केट का माहौल अच्छा नहीं हैं। टिम के मुताबिक एनर्जी की बढ़ती कीमतें के साथ-साथ अमेरिकी फेड और बैंक ऑफ जापान की बैठकों से पहले ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ते आसार इस पर दबाव डाल रही हैं। हालांकि उनका यह भी कहना है कि जियोपॉलिटिकल टेंशन और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता के चलते निचले स्तर पर खरीदारी भी दिख सकती है।
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