Gold vs Equity Investment: किसी भी निवेशक से पैसा निवेश करते समय सबसे बड़ी गलती ये होती है कि वे पिछले सालों में शानदार रिटर्न देने वाले एसेट में ही आगे भी बढ़त की उम्मीद करने लगते हैं। साल 2024 के बाद से सोना और चांदी ने रिकॉर्ड रिटर्न दिए हैं, जबकि शेयर बाजार में लंबा करेक्शन देखने को मिला है।
12 अक्टूबर 2026 तक, सोना लगभग ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2.27 लाख प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि, इतनी बड़ी तेजी के बाद अब कीमती धातुओं में टाइम करेक्शन देखने को मिल सकता है। इसका मतलब है कि कीमतें तेजी से ऊपर जाने के बजाय लंबे समय तक एक सीमित दायरे में रह सकती हैं।
इन्हीं सब अनिश्चितताओं के बीच इस त्योहारी सीजन में नया पैसा कहा-किसमें लगाए इस लेकर काफी कन्फ्यूजन है। 129 वेल्थ एंड रिसर्च एनालिस्ट और पॉल एसेट में फंड मैनेजर प्रसेनजीत पॉल से समझते हैं इस इस समय क्या हो निवेश की रणनीति।
गोल्ड-सिल्वर बनाम इक्विटी: नया पैसा कहां लगाएं?
गोल्ड: अनिश्चितता से बचाव के लिए पोर्टफोलियो में सोने का होना जरूरी है।
सिल्वर: इंडस्ट्रीज में डिमांड का फायदा मिलता है, लेकिन इसमें उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है।
रणनीति: ऑल-टाइम हाई के आसपास सोना-चांदी में एकमुश्त बड़ा निवेश करने में अब बहुत ज्यादा फायदा नहीं है।
प्रसेनजीत पॉल का मानना है कि, मेटल्स के उलट, इक्विटी में जोखिम के मुकाबले रिटर्न का अवसर बेहतर नजर आ रहा है। निफ्टी 9 अक्टूबर 2024 के 24,981 के स्तर से गिरकर 9 अक्टूबर 2026 को 22,520 पर आ गया, जबकि इसका P/E मल्टीपल 23.48 से घटकर 19.20 गुना हो गया है। वैल्युएशन अब काफी वाजिब और आकर्षक हो चुकी है।
बाजार अक्सर आर्थिक आंकड़ों में सुधार दिखने से पहले ही रिकवर करना शुरू कर देते हैं। अगले दो सालों में इक्विटी का प्रदर्शन कीमती धातुओं से बेहतर रह सकता है। निवेशक नए पैसे को 3 से 4 किस्तों में बांटकर इक्विटी में निवेश कर सकते हैं।
मॉडरेट-रिस्क निवेशकों के लिए ₹10 लाख का पोर्टफोलियो एलोकेशन
अगर आप मध्यम जोखिम वाले निवेशक हैं, तो ₹10 लाख की पूंजी को इस तरह बांट सकते हैं:
आपको बता दें कि यह प्रस्तावित पोर्टफोलियो एलोकेशन एक उदाहरण है और इसे निवेशक के मौजूदा पोर्टफोलियो, वित्तीय जिम्मेदारियों और समय सीमा के अनुसार एडजस्ट किया जाना चाहिए। कुल मिलाकर, नए निवेश के लिए हमारी पहली पसंद इक्विटी है, स्थिरता के लिए हाई-क्वालिटी फिक्स्ड-इनकम एसेट्स और डायवर्सिफिकेशन के लिए सोना-चांदी में एक सीमित हिस्सा रखना चाहिए।
क्या हो निवेशक की मूल सोच?
फंड मैनेजर प्रसेनजीत पॉल के मुताबिक, निवेश का नियम बेहद सीधा है- 'जब बाजार में डर हो तब खरीदें और जब लालच हो तब बचें'। इसका मतलब बॉटम या टॉप का अंदाजा लगाना नहीं है, बल्कि सिर्फ इसलिए किसी एसेट में नहीं फंसना है क्योंकि उसने बीते दिनों में असाधारण रिटर्न दिए हैं।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।